Dec 15, 2018

वर्षा-ऋतु [rainy season]

वर्षा-ऋतु [rainy season]

वर्षा-ऋतु

rainy season essay in hindi
भूमिका- धरती जब तपने लगती है , जब आकाश में घुमारते बादल उसे सांत्वना देने पहुँचते हैं | पशु-पक्षी, पेड़-पौधे, मानव सब भीषम गर्मी से परेशान होकर वर्षा-ऋतु की प्रतीक्षा  करते हैं | ऋतुओं की रानी वर्षा  भी काले बादलों की चुनर में बिजली के सितारे टाँक कर और बूंदों की पायल छनकाती आ जाती है | अपने काले आँचल से दिन को भी रात बनाने वाली इस ऋतु मैं रात का दृश्य तो और भी अनूठा होता है  |

विस्तार- आषाढ़ मास से प्रारंभ होकर सावन-भादों तक इस ऋतु का विस्तार रहता है | बादल छाते है ठंडी-ठंडी हवा बहने लगती है मन-प्राणों को प्रसन्नत से भर देती है |  एक कोने से उठे बादल देखते-ही-देखते पुरे गमन को घेर लेते हैं | नन्हीं फुहारें धीरे-धीरे बौछारौं और फिर मुसलाधार वर्षा का रूप ले लेती हैं |

rainy season essay in hindi
वर्षा की फुहारों के आकर्षण में बाँधे बच्चोघरों से निकल कर मैदानों में छतों  पर निकल परते हैं | बहते पानी को अंजूलि में भर-भरकर एक दुसरे पर फैंकते है, पांवों से छापक-छापक पानी उछालते हैं | बहती धरा में कागज की नाव तैराने का आनंद लेते हैं | धुल से सने पैड़-पौधे वर्षा की फुहारे से नहरे तरोह ताज़ा हो जाते हैं | झूम-झूमकर मनो वर्षा रानी को धन्यवाद् देते हैं | सूखे तलब भर जाते हैं | नदियाँ किनारे तोड़ कर बहने लगते हैं | चारों ओर पानी-ही-पानी, मनो प्रलय आ रही हो | उत्पात मचाकर वर्षा रानी भी थक जाती है और बदल-बिजली की सेना समेटकर चल देती है |
rainy season essay in hindi
किसानो की प्रिय ऋतु है-वर्षा | उनके जीवन का अधर ही यह ऋतु है | बड़ी आस से ए आकाश को ताकते रहते है | और बदलों के छाते ही उनका मन-मयूर नाच उठता है | वे हल-बैल  लेकर खेतो में निकल पड़ते हैं | गीली धरती में उनका हल आसानी से चीरता चला जाता हैं | बिज रोपण का काम प्रारंभ हो जाता है | वर्ष ऋतु के जाते-जाते खेतों  में नन्हें अंकुर पौधों का रूप ले लेती है | ग्रामीण महिलाएँ झूले की पींगे लेती हुई ‘कजरी’ के गीत से वातावरण में रस घोल देती हैं | मयूर पंख खोल कर नृत्य करने लगते है | मेंढको की ‘टर्र-टर्र’ वातावरण में अजीब-सा रहस्य घोल देती है |

उपसंहार- सही कहा गया है- जल ही जीवन है | जीवनदायिनी जल देने वाली वर्षा ऋतु का जड़-चेतन सभी स्वागत करते हैं | और आज के लोग जल में कूड़ा-कड़कट डालके जल को ख़राब कर रहे है उसे बर्बाद कर रहे है |    


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Dec 15, 2017

Digital Marketing और Internet Marketing क्या होता है

Digital Marketing और Internet Marketing क्या होता है

आजकल Online Business की दुनिया में एक ही शब्द सुनने में आता है वो है- Digital Marketing और Internet marketing  . आखिर इसका मतलब क्या होता है? डिजिटल मार्केटिंग क्या होता है? पिछले पोस्ट में हमने आपको बताया कंटेंट मार्केटिंग क्या होता है। कंटेंट मार्केटिंग डिजिटल मार्केटिंग का ही एक पार्ट है। आज इस पोस्ट में हम Digital Marketing in Hindi  में आज जानेगे।

digital marketing

Digital Marketing और Internet Marketing क्या होता है? जानते है हिंदी में। 

सरल शब्दों में कहा जाए तो ये Traditional Marketing को रिप्लेस कर रहा है।  Traditional Marketing
मतलब खुद के प्रोडक्ट्स को टीवी रेडियो के द्वारा advertise करना। पर अभी देखा जाये तो कंपनियां अपने प्रोडक्ट्स का प्रचार सोशल मीडिया के द्वारा, ज्यादा कर रही है। क्योकि दुनिया के ज्यादातर लोग अभी उसपे एक्टिव रहते है।  सोशल मीडिया पे प्रचार करने का सबसे मुख्य कारण यही है कि ज्यादा से ज्यादा लोगो तक उनका बिज़नेस की जानकारी पहुंचे।


डिजिटल मार्केटिंग उन सभी Techniques का मिश्रण है, जिनसे  Online Presence, Return on Investment , Branding आदि किया जा सकता है और जिससे लोगो को आकर्षित कर सकते है।
हर एक कंपनी खुद की Marketing करके अपने Customers Target बनाके करती है। और ज्यादा सरल भाषा में कहा जाये तो घर बैठे बैठे अपने Brand को पॉपुलर बनाना। ये एक प्रकार की Internet Marketing ही है।
जैसे  Amazon ,Flipkart अपनी मार्केटिंग जिस तरह से करती है वो बहुत सराहनीय  है हम देखते है उनके प्रोडक्ट्स का प्रचार हर जगह होता है


Important Chapters of Digital  Marketing

1.Social Media Marketing-जैसे की फेसबुक वगेरा पर कंपनियां अपने ब्रांड्स की पब्लिसिटी के लिए वीडियोज फोटोज अपलोड करती है। जिससे लोगो तक बात पहुंचे उनके प्रोडक्ट्स की डिटेल्स मिले। Facebook ,YouTube ,Google+,LinkedIn,Twitter etc जैसी सोशल मीडिया साइट्स बहुत ज्यादा लाभदायक होती है। जिस से वो लोगो को प्रत्येक दिन अपडेट करते है। ये साइट्स users को easily कम्यूनिकेट करने में हेल्प करती है। ये audience और कंपनी के बीच एक माध्यम का काम करते है। इन साइट्स पे लोग अपने नेगेटिव और पॉजिटिव दोनों reviews देते है जो उस कंपनी  को अपना बिज़नेस बढ़ाने में मदद कर  सकते है।




2.Email,Website,Mobile Application Marketing  -बिज़नेस कंपनी खुद की एक पर्सनल वेबसाइट रखती है जिस पर वे हर दिन खुद का अपडेट देती रहती है। जिस से users उनके बारे में कभी भी जान सके। अपनी नयी पॉलिसीस या नए प्रोडक्ट के बारे में लोगो को ईमेल के रूप में नोटिफिकेशन्स सेंड करना। दुनिया का एक बड़ा भाग एंड्राइड फ़ोन यूज करता है। ऐसे में अपने बिज़नेस के लिए एक मोबाइल एप्लीकेशन बनाना काफी फायदेमंद रहता है। और ईमेल से अपने यूजर के साथ अपना अच्छा सम्बद्ध बनाये रखते है। हर वो अपडेट अपने यूजर को ईमेल द्वारा मिल जाते है।



3. Content Marketing -Content मतलब की वो सब चीज़े जो आप एक Website या  Newspaper में देखते हो जैसे की Images, Texts, Videos etc.  इसको उपयोग में लाने की प्रमुख वजह है लोगो को आकर्षित करना। ज्यादा से ज्यादा लोगो को अपनी तरफ खीचना।  बहुत साडी  बड़ी बड़ी कम्पनीज इसी Strategy को अपनाती है।  Content marketing को साधारण शब्दों में अर्थ है कि ऐसा Content Create करना और लोगो तक पहुंचाना जो की उनके Products से Related हो और जिससे लोग उनकी तरफ आये।  इसको ये भी कह सकते है कि स्टोरी टेलिंग लेकिन वो attractive होनी चाहिए। ये बहुत साड़ी लीडिंग कम्पनीज द्वारा यूज किया जा रहा है। जैसे की Cisco,P&G,Microsoft.सरल शब्दों  एक डीलर एक कस्टमर को इसका यूज करके Attract करता है।

4. Search Engine Marketing -इसको समझने के लिए एक simple उदाहरण है आपने अपनी कोई एक न्यूज़ वेबसाइट बनाई। लेकिन जब एक यूजर किसी टॉपिक के बारे में सर्च करे, तो क्या चान्सेस है कि गूगल के पेज पे टॉप लिंक्स में आपकी साइट होगी। जैसे आप किसी प्रोग्रामिंग या Web-development रिलेटड डाउट google करोगे तो आप पाएंगे की टॉप लिंक्समेStackoverflow,W3Schools,geeksforgeeks मिलेंगे।
 जो वेबसाइट रहती है उसको गूगल की रैंकिंग में लाने के लिए सबसे मुख्य बात है।  उसका कंटेंट कैसा है? इसके लिए सबसे इम्पोर्टेन्ट है Search Engine optimization (SEO).

        SEO कटेंट की केटेगरी में आने के लिए उस साइट का कंटेंट और आर्टिकल ऐसा हो की वो किसी  भी 10 -12 साल तक बच्चे के द्वारा भी रीड की जा सके। मतलब आर्टिकल इतना सरल हो कि को किसी को समझ में जाये। वो यूजर फ्रैडंली हो इसलिए हम देखते है की ज्यादातर बिज़नेस  साइट खुद की वेबसाइट के लिए SEO वाले कंटेंट राइटर को hire करते है



5. Viral Marketing-इसका मतलब इसके नाम में ही छिपा है मतलब अपने बिज़नेस को Viral करना अथार्थ ज्यादा से ज्यादा लोगो तक पहुंचाना।
6. Influencer Marketing- इस मार्केटिंग टाइप का अर्थ होता है लोगो को अपनी strategies से इन्फ्लुएंस करना मतलब लोगो को अपनी तरफ आकर्षित करना।
7. Pay per Click -जब आप कोई साइट ,यूट्यूब ओपन करते हो आपने कई बार ऐड देखी होगी। कुछ साइट्स अपने कंटेंट के बीच में ये सब डालती है,Google Ad-sense के द्वारा इस से पैसे कमाए जा सकते। मतलब डेवलपर को हर एक क्लिक पर कुछ अर्निंग होती है।

8. Public Relation -लोगो की आवश्यकता के अनुसार अपनी strategy में चेंज लाना ,अपना विस्तार करना l
9. Affiliate Marketing -कंपनी द्वारा अपने सेल्स को बढ़ाने के लिए उसे किया जाता हैं जैसे कि डिस्काउंट ऑफर।




उम्मीद है ये नई जानकारी आपको अपने नए बिज़नेस में काफी मदद करेगी। और जैसे जैसे जमाना आगे बढ़ रहा है वैसे वैसे टेक्नोलॉजी बढ़ रही है। और उन टेक्नोलॉजी के साथ साथ हमें भी चलना होता है। तो दोस्तों हमारे साथ जुड़े रहिये और नए नए जानकारी लेते रहिये।

उम्मीद है आपको ये पोस्ट हो। यदि कोई सवाल या सुझाव हो तो निचे कमेंट जरूर करे। धन्यवाद। 

Dec 6, 2017

मानवता मरी नहीं है -Humanity is not dead | by Saurabh Kumar Devrale

मानवता मरी नहीं है -Humanity is not dead | by Saurabh Kumar Devrale

manavta mari nahi hai yar- by sourabh kumar devralay

मानवता मरी नहीं है। 

कुछ ही दिन हुए  थे। मुझे इस बड़े शहर में आये हुए मैं बहुत ही अकेला महसूस करता था, इस शहर में सब कुछ होते हुए भी मुझे एक अकेलापन सा महसूस होता था। मैं जब भी घर से कोचिंग के लिए निकलता, तो मैं देखता ना कोई बोलने वाला, ना कोई पूछने वाला, ना किसी की सहायता करना, ना किसी से बात करना, यही शायद बड़े शहरों की विशेषताएं होती है।मुझे ऐसा लगता है कि मानो यहां पर मानवता मर ही चुकी है।

फिर मैं रोज ही की तरह अपने समय पर कोचिंग के लिए जा रहा था वही सुनसान उस दिन भी मेरे दिमाग में यही बातें चल रही थी मैं यही सोच रहा था कि मानवता तो मर ही चुकी है इस शहर में और शायद यही बड़े शहरों की विशेषताएं होती होगी क्योंकि इससे पहले मैं किसी बड़े शहर में नहीं रहता था बल्कि एक छोटे से गांव से आया था फिर मैं उसी दिन शाम को घर लौट रहा था।

तब बस स्टेशन पर एक बुजुर्ग दादा अस्वस्थ थे पैरों से विकलांग थे चल नहीं पा रहे थे एक तरफ उनके व्हील चेयर पर बैठे हुए थे। बोर्ड को नहीं देख पा रहे थे उस भीड़ में जहां पर बसों का समय लिखा होता था उस दिन उन्होंने एक बालक से पूछा "कि बेटा सिलिकॉन सिटी की बस कब आएगी" तब उसने जवाब दिया "क्या मैं आपको कंडक्टर दिखता हूं जो बताऊं,  कौन की बस कब आएगी" मैं भी पीछे खड़ा कर सुन रहा था मुझे यह सुन बड़ा ही दुख हुआ मुझसे रहा ना गया मैं खुद ही पहुंच गया और कह दिया कि "दादा सिलिकॉन सिटी की बस आने ही वाली है" शायद मुझे देखते ही एक और अंकल वहां पर आ गए और वह भी पूछते हैं "आपको कहां जाना है" मैंने कहा "इनको सिलिकॉन सिटी जाना है" 

फिर उस अंकल और मैंने उस बस का इंतजार किया और जब तक हम दादा के पास ही बैठे रहे हमने देखा कि हमारी सारी गतिविधियां अन्य लोग देख रहे हैं टकाटकी लगाएं जैसे ही बस आती है हम दोनों चिंतित हो जाते हैं क्योंकि  हमें लगा कि आज भी रोज की तरह बस में चढ़ने के लिए धक्का-मुक्की होगी पर पर हम आज का नज़ारा देख आश्चर्यचकित हो गए कि जब बस आती है तो रोज की तरह धक्का-मुक्की नहीं होती और वही लड़का जो पहले अभद्रता से बात कर रहा था बोलता है "दादा जी आप ही पहले चले जाइए बस में फिर हम सब चढ़ जाएंगे" और सभी लोग उस दिन बड़े ही आराम से बस में  चढ़ने के बाद भी सीट के लिए लड़ाई झगड़ा नहीं किया तब मुझे लगा की मानवता मरी नहीं है वो अभी छुप गयी है जिसे धुढना होगा। 
सत्य घटना पर आधारित 
लेखक - सौरभ कुमार देवराले 
खिरकिया

Nov 26, 2017

बस कि आत्मकथा [Bus ki Atma katha]

बस कि आत्मकथा [Bus ki Atma katha]


bus ki atmkatha

भूमिका- मैं बस हूँ | परिवहन के के अनेक साधनों में से एक | जनता-जनार्दन की सेविका | अनेकानेक रूप-रंगों में सड़को पर दौर-दौरकर लोगों को उनकी मंजिल तक पहुँचने वाली सेविका | आप ठहरने के हाथ दिखाते हैं, मैं ठहर जाती हूँ | कंडक्टर की सिटी की धुन पर मैं दिन-रात नाचता हूँ  | ड्राईवर के हाथ का खिलौना हूँ मैं | वह अपनी मर्जी से कबी तेज़ दौराता है, तो कभी कछुए की चल चलता है | चलिए, आप भी स्वर हो जाईये मुझ पर ! मैं आपको अपनी कहानी सुनानी चाहती  हूँ |

विस्तार- कारखाने से जब साज़-धजकर नई नवेली दुल्हन की तरह मैं निकलती थी, तब मेरी शान ही निराली थी | मेरे मालिक ने फूल मालाओं से मेरा श्रृंगार किया था | यात्री अन्य वाहनों को चोरकर मेरी सवारी बनना चाहते थे | रंग-रोगन से सजी थी और सुन्दर नरम गद्दियँ थीं मेरी |

समय परिवर्तनशील है | सदा एक-सा नहीं रहता | मेरे दिन भी बदलने लगे | अंजर-पंजर ढीले पड़ने लगे | बार-बार मुझे मकेनिक के पास ले जाने लागा | चलते-चलते अचानक मेरा दम फूलने जाता और में थम जाती | गर्मी से बेहाल यात्री पानी-पि-पीकर मुझे कोसते | कुछ दुष्ट तो मुझे लतें तक मारते, पान की पीक थूक देते, कुड़ा-कचड़ा फैला देते | में अबला निष्प्राण क्या करती ! सब चुपचाप सहती रहती | एक बार हड़तालो में मेरा ओ बुरा हाल किया की दस दिन तक मैं प्रिय सखी सड़क से नही मिल पाई | पत्थर मार-मारकर कर मेरे शीशे तोड़ दिए, सीटें फाड़ दिए | डंडे मार-मारकर कचुम्मार ही निकल दिया |

उपसंहार- गीत ही जीवन है | मैं तो संतो की वाणी का अनुसरण करती हुँ- ‘चरैवेति-चरैवेति’ अर्थात्- ‘चलते रहो,चलते रहो’ | निरंतर आगे बढ़ना ही मेरा लक्ष्य है | गाँव- शहर, जंगल-पर्वत पार करती मैं निरंतर गतिशील रहती हुँ | जो भी मेरे गोद में आश्रय लेता है, उसे उसके मजिल तक पहुँचती हुँ | गतिवान रहना और गतिशील बनाना ही मेरे जीवन का लक्ष्य है और इसे प्राप्त करने ही मेरे जीवन की सार्थकता है |       


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Nov 17, 2017

Top SEO Techniques हिंदी में

Top SEO Techniques हिंदी में

Top Seo Techniques की मदद से 1000+ से भी ज्यादा visitor per day के कैसे लाये। 

नमस्कार दोस्तों आप का स्वागत है Hindi Articles | हिंदी ब्लॉग में। मै सतीश ! आज में आपको बताने जा रहा हु। की आप आपनी वेबसाइट पर  ट्रैफिक/विज़िटर्स कैसे ला सकते है वो भी कुछ Amazing Seo Technique पर काम करके। वो भी बिलकुल फ्री में आपको बताऊंगा Top Seo Techniques  के बारे में जिससे आप अपने वेबसाइट या ब्लॉग की ट्रैफिक को Organically Boost कर पाएंगे। चलिए जानते  उन टेक्निक को ।

top seo technique

वैसे तो Seo करना कोई मामूली बात नहीं, उसके लिए आपको धेर्य रखना होगा और समय के अनुसार अपना काम करना होगा। हाँ आपको स्मार्ट वर्क और तोड़ी टेक्निकल स्किल भी जरुरत पड़ सकती है। ये पोस्ट में उन्ही मित्रो के लिए लिख रहा हु या आपसे शेयर कर रहा हु। जो Seo सीखना चाहते /इच्छुक है और अपने पर्सनल ब्लॉग की Seo खुद करना चाहते है।

आपने बहुत से कंपनी देखे होंगे जो Seo करने के लिए बहुत ज्यादा रकम लेते है। लेकिन इस काम या Technique को आप अच्छे से समझ लेते है तो आपको कोई कंपनी Hire करने की जरुरत नहीं  है।

SEO[Search Engine Optimization] में सबसे ज्यादा फोकस Backlinks बनाने में करना होता है। Backlink के भी 2 Types है
  • Do-Follow
  • No-Follow
Backlinks क्यों जरुरी है वो हम एक उद्धारण के सहायता से समझते है :-

Backlink = Vote Backlinksएक प्रकार की वोटिंग होती है।
Backlinks हमारे लिए वोटिंग का काम करता है।
जितना ज्यादा वोटिंग उतना हमारे पॉपुलरटी को दिखता है।
बैकलिंक्स का भी यही काम है हमारे साइट को पॉपुलर करना या उसे रैंकिंग करना।
तो जितना जयदा बैकलिंक उतना फ़ायदा।


Top Seo Techniques

1. Directory Submission : टेलीफ़ोन Directory की तरह कुछ वेबसाइट की भी Directory होती है जहा से हम आपनी पसंद की वेबसाइट को सर्च कर सकते है हमे इन Directory साईट में आपनी वेबसाइट को सबमिट करना होता है , वह भी किसी ऐसी केटेगरी में जो हमारी वेबसाइट से Related हो , Directory Submission से हमे Do-Follow Backlink मिलता है .

2. Social Bookmarking : social bookmarking वेबसाइट बिलकुल सोशल नेटवर्किंग साईट जैसी ही होती है जिनका उपयोग आप अपनी वेबसाइट या पोस्ट का प्रमोशन करने हेतु करते है। पर इन वेबसाइट से हमे ज्यादा तर No-follow backlink मिलता है। यह आपके keywords  रैंक करने में काफी असरदार होता है।




3. Classified Ads  : olx, Quikr जैसी Classified Ads  साईट हमे लीड और काफी अच्छा ट्रैफिक देती है। हम इस साइट पर लॉग इन होकर अपनी वेबसाइट रिलेटेड एक पोस्ट करना होता है कोई भी यूजर हमारी एड्स को देखता है और क्ल्सिक करता है तो हमारी ट्रैफिक बदती है। इसे आप फ्री advertising के नाम से भी सर्च कर सकते है।

4. Local Listing : लोकल लिस्टिंग ठीक वैसे ही है जैसे आप गूगल बिज़नस पर आपनी वेबसाइट या बिज़नस को Register करते है , यहाँ पर हमे Just Dial , India Mart etc, वेबसाइट पर अपनी वेबसाइट की लिस्टिंग करनी होती है। ताकि कोई भी आपके बिज़नस के बारे में सर्च करे तो, वो वेबसाइट आपके बिज़नेस के बारे में उन्हें दिखाए। ये रिजल्ट एरिया के People को टारगेट करता है।

5. Blog Commenting : आप backlink के लिए Comments  भी कर सकते है। आपके कीवर्ड्स या टॉपिक से रेलेटेड कोई भी वेबसाइट पर कमेंट करे। वहां से backlink ले सकते है। पर ये सभी No-follow backlink ही होते है, पर ये backlink किसी बड़े ब्लॉग या वेबसाइट से आते है, तो आपका ट्रैफिक भी बढ़ता है।

6. Guest Posting:  Guest Posting या Guest blogging ये दोनों नाम एक ही है। गेस्ट पोस्ट का मतलब यही की आप किसी अन्य वेबसाइट या ब्लॉग पर पोस्ट/आर्टिकल लिखते है। उसके बदले उनके वेबसाइट पर आप अपने ब्लॉग/वेबसाइट का लिंक देते है। इसी कार्य को गेस्ट पोस्टिंग कहते है। इस प्रोसेस में बहुत ही जल्दी आपके वेबसाइट में ट्रैफिक और सर्च इंजिन में रैंकिंग करने में मदद मितली है। इसे Fast Link Exchange Process भी कहते है। यदि आप हमारे इसी वेबसाइट में गेस्ट पोस्ट करना चाहते है तो हमसे संपर्क कर सकते है।

7. Forum posting : फोरम पोस्टिंग एक प्रकार की सवाल जबाब वाले वेबसाइट होते है जिसे हम टेक्निकल भाषा में फोरम बोलते है। इन फोरम की मदद से भी backlink ले सकते है। आप को कुछ पोपुलर साईट जैसे Quora जैसे फोरम पर  रजिस्टर करना होना है। और आपके जानकारी के मुताबिक कोई एक टॉपिक सेलेक्ट करना होता है। जिसमे आप उन पहिये गए सवाल का जवाब देकर आप अपने वेबसाइट का लिंक चोर सकते है। है ध्यान देने वाली बात यह है की जो answer आप दे रहे हो उस टॉपिक से संबंध आपका लिंक हो। इससे आपका answer भी लोगो को हेल्पफुल लगेगा और लोग आपके उस लिक के द्वारा आपके वेबसाइट में भी आएंगे।

8. Articles Submission : Articles पोस्टिंग भी एक बढ़िया जरिया है, जिनसे आप अपने वेबसाइट के लिए ट्रैफिक ला सकते है आप को किसी भी आर्टिकल्स साईट पर अपने आर्टिकल्स को पोस्ट करना होता है। और उसपर कुछ लिंक भी डालकर उसे पोस्ट कर देना है। Articles submission के लिए 460 वर्ड की पोस्ट लिखनी होती है। HubPages.comArticlesBase.comeHow.com ये कुछ वेबसाइट बहुत ही जयदा पॉपुलर है जिनमे आप अपने article submit कर सकते है।

9. web 2.0 directory submission : यह एक Advance SEO technique है जिससे आप Fast Backlink बनाने में मददगार होगी यह सबसे Fast Backlink process है। इसके बारे में पूर्ण जानकारी के लिए यहाँ क्लिक करे Web 2.0 Directory Submission List इस पोस्ट को डिटेल्स में पढ़े ये थोड़ा लंबा पोस्ट है इसलिए हमने इसपर अलग ही एक पोस्ट लिखी हुई है।

10. PDF submission :  pdf  सुब्मिशन एक बढ़िया seo तकनीक है जिससे आप Doc फाइल शेयरिंग साईट से आपने वेबसाइट के लिए backlink बना सकते है। आप को बस किसी भी पीडीऍफ़ साईट पर रजिस्टर करना  होना है और अपना pdf  फाइल को share करना है। इसे डिटेल्स में पढ़े PDF File Submission for SEO

11. Press release : press release website एक  फ्री Advertisement प्लेटफार्म है जहा पर आप अपने साईट या बिज़नस की न्यूज़ को फ्री में पब्लिश कर ट्रैफिक ले सकते है। इसे डिटेल्स में जाने Press Release Submission in SEO

Last Words: आप अपनी वेबसाइट पर आर्गेनिक तरीके से ट्रैफिक लाना चाहते है, या उसे रैंक करनाचाहते है। तो इसी पोस्ट में दिए गए  Top Seo Techniques को यदि 1 month भी सही से फॉलो/काम कर लेंगे तो आपको किसी भी कंपनी को Hire करने की जरुरत नहीं है। और एक month के अंडर ही आपका ट्राफीक 1000+ से भी ज्यादा पहुंच जायेगा।

Twitters Ads Campaign कैसे चलाये - Twitter में Ads कैसे लगाए
Social Media Marketing क्या है हिन्दी में
Content Marketing क्या है हिंदी में
Social Media Marketing Business के लिए कैसे Important है जानिए हिंदी में।

उम्मीद है आपको ये पोस्ट पसंद आया है। इसी तरह के पोस्ट पाने के लिए हमारे साथ जुड़े रहिये और इस पोस्ट को ज्यादा से जयदा शेयर करिये जिससे की जो लोग नए है और seo सीखना चाहते है। उन्हें थोड़ा फ़ायदा पहुंच पाए। आपका बहुत बहुत धन्यवाद।

Oct 17, 2017

दीपोत्सव: दीपावली [ Diwali essay ]

दीपोत्सव: दीपावली [ Diwali essay ]

 diwali essay hindi me


भूमिका- भारत पर्वों का देश है | यहाँ अनेकानेक पर्व मनाए जाते हैं | दीपों का उत्सव दीपावली उन्ही में से एक प्रमुख त्यौहार है | कार्तिक मास की अमावस्या की अँधेरी रात को दीपामालाएँ पूर्णिमा बना देती हैं | हर्ष-उल्लास से परिपूर्ण यह पर्व केवल बहार ही नहीं, बल्कि भीतर से भी सबमें आशा और उमंग का प्रकाश जगमगा देता है |

विस्तार- (क्यों मनाया जाता है) – दीपावली के साथ कई धार्मिक तथा एतिहासिक घटनाएँ जुड़ी हुई हैं | श्री राम चौहद वर्ष का वनवास पूरा कर इसी दिन अयोध्या पहुँचे थे | अयोध्या वासियों ने उनके स्वागत में दीपमालाएँ सजाई थीं | समूद्र मंथन से इसी दिन लक्ष्मी जी प्रकट हुई थीं | इसी दिन भगवन विष्णु ने उपने भक्त प्रह्लाद की रक्षा करने लिए नरसिंह अवतार लिया था | जैन धर्म के चौबीसवें तीर्थंक भगवान महावीर का परिनिर्वाण भी इसी दिन हुआ था | सिक्खों के छठे गुरु हरगोविंद सिंह जी भी मुगलों की जेल से इसी दिन मुक्त हुए थे | ये सभी घटनाएँ  इस पर्व के महत्त्व को बढ़ा देती हैं |
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(कैसे मनाया जाता है) दीपावली मनाने की तैयारी कई दिन पुर से ही प्रारंभ हो जाती है | घर की साफ़-सफ़ाई करके सजावट की जाती है | पकवान बनाए जाते है | बाजार और दुकाने सज जाती हैं | विशेस रूप से मिठाई और पटाखों की दुकानों में खूब रौनक रहती है | खिल-बताशो और मिटटी के खिलौने आदि खरीदना शुभ मन जाता है | दीपावली से दो दिन पहले ‘धन-तेरस’ पर नई बर्तन खरीदे जाते है | एक दिन पूर्व ‘नरक चतुर्दशी’ के दिन भी कुछ दीप जलाए जाते हैं | इस दिन श्री कृष्ण ने नरकासुर का वध  किया था |

दीपावली के दिन का सोभा तो निराली होती है— घर-बाजार नई दुल्हन की तरह सजे होते है | संध्या का अंधेरा घिरते ही सारे घर रोशनी से जगमगाउठते हैं | लक्ष्मी-पूजन और आरती होती है | लो पटाके, फुल्झारियाँ, जलाकर अपना हर्ष प्रकट करते हैं | आतिशबाजी की जगमग से अँधेरी रात रोशन हो जाती हैं |
दीपावली के अगले दिन ‘गोवरधन पूजा’ और ‘अन्नकूट’ होता है तथा दो दिन बाद ‘भैया दूज’ होता है | बहनों अपने भाईयों को तिलक करके मंगलकामना करती हैं | दीपावली का पर्व परस्पर प्रेम और भाईचारे की भावना बढाता है | लोग एक-दुसरे को फल –मिठाई या उपहार देते हैं |
दीपावली का यह सुंदर पर्व जुआ, शराब और पटाखें की दुर्गंध और दुर्घटनाओं से असुंदर भी बन जाता है | इन कुरीतियों को पूरी तरह समाप्त करके ही दीपावली का सच्चा आनंद प्राप्त हो सकता हैं |

उपसंहार- दीपावली हर वर्ष आशा, विश्वास और आनंद का उज्ज्वल प्रकाश लेकर आती है | अंधकार पर प्रकाश की, असत्य पर सत्य की, अन्याय पर न्याय की विजय का संदेश देती है |समृधि की कामना वाले इस पर्व पर हमें उनके अंधियारे जीवन को भी रोशन करना चाहिए, जो गरीब और आशिक्षा के कारण इस दिन मिठाई का एक टुकड़ा तक खरीद नही पाते |  

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diwali essay in hindi pdf

Sep 10, 2017

घनश्याम दास बिड़ला

घनश्याम दास बिड़ला

Ghanshyam das Birla

घनश्याम दास बिड़ला, बिड़ला ग्रुप के संस्थापक थे | वर्तमान में इसका नाम आदित्य बिड़ला ग्रुप हे | घनश्याम दास बिड़ला का जन्म सन 11 अप्रेल 1894 ग्राम पिलानी  राजस्थान में हुआ था | इन के पिता का नाम बलदेवदास बिड़ला था | इनके पिता की चार संतान जुगल किशोर, रामेश्वरदास, घनश्याम दास, ब्रजमोहन दास थी | इनकी माता का नाम योगेश्वरी देवी था | मात्र 14 वर्ष की आयु से ही अपनी सामान्य शिक्षा पूरी कर वे अपने खानदानी व्यावसाय में योगदान देने लगे | 

आईडिया, हिंडालको, और भी कई कंपनिया सव्मित्व में हे | इस ग्रुप का करोबार 20 से अधिक देशो में फेला हे | जिसमे जी डी बिरला का विशेष योग दान रहा | घनश्याम दास बिड़ला भारतीय अर्थव्वस्था के सूत्रधार थे | भारतीय अर्थव्वस्था को प्रगति के पथ पर अग्रसर करने के लिए उनका नाम स्वर्णिम अक्षरों में अंकित हे | घनश्याम दास बिड़ला कभी भी उपलब्धियो से संतुष्ट नहीं होते थे | एक लक्ष्य को प्राप्त कर अगले के लिए अग्रसर हो जाते थे | वे सदेव आत्म प्रसंसा के खिलाफ थे | 

इसलिए उन्होंने अपनी जीवनी पर कभी सहमती नहीं दी | वेसे उन्होंने अपने को कई बार अभिव्यक्त किया जिसका उलेख उनके दवारा लिखे पत्र पत्रिकाओ और भाषण में मिलता हे | जिसमे उनके जीवन दर्शन की झलक मिलती हे | जिससे उनके जीवन की काफी जानकारी मिलती हे | उनके दवारा कियो गए 60 साल के लगतार प्रयासों के कारणों ही 20 सदी में आधुनिक भारत की नीव पड़ी | जब देश आजादी के लिए संघर्ष कर रहा था | तब भी ब्रिटिश सरकार के अधिकारी विस्टन चर्चिल भी भारत में सवेधानिक शासन व्यवस्था के लिए उनसे परामर्श लेते थे | 

उनके दवारा ही भारत में पूंजीवादी व्यवस्था नीव पड़ी | आजादी के बाद उन्होंने देश के उधोग के विकास, कला, संस्कृति, तकनिकी, प्रोधोयोगिकी, शिल्पकला, राजनीती, महत्पूर्ण योगदान दिया | उन के जेसा योगदान किसी और अन्य भारतीय ने नहीं दिया | 1942 आते आते जी.डी. बिड़ला, मील मालिक और उद्योगपति के तोर पर पहचान बना चुके थे | गांधीजी के विचारो से प्रभावित होकर उन्होने खुबसूरत मंदिर, शिक्षण संसथान और सामाजिक कार्यो में भी योगदान दिया | उन्हें दानशीलता और महात्मा गाँधी से आदर्श संबंधो के लिए भी जाना जाता हे | लेकिन दुर्भाग्य से महात्मा गाँधी की हत्या उनके दिल्ली स्थित आवास पर ही हुई थी | 

सामाजिक कार्यो के साथ साथ उन्होंने कभी भी अपने व्यवसायिक हितो को भी क्षति नहीं पहुचने दी | 1947 के पूर्व वे स्वदेशी उधोग के प्रबल समर्थक थे, उन्होंने भारतीय उधोग और उनके विकास के लिए अनेक कार्य किये | जब विश्व युद्ध के कारण विश्व की अर्थव्यवस्था ख़राब थी तब भी घनश्याम दास बिड़ला ने व्यापक लाभ कमाया | 

इस कारण उन होने स्वयं को भारत के प्रथम उधोगपति के रूप में स्थापित कर लिया था | उन्ही के प्रयासों से भारतीय उधोगो को ब्रितानी हुकूमत से रियायते प्राप्त हुई | पूंजीवादी जगत को मजबूत करने के लिए उन्होंने राजनितिक ढाचे के साथ परस्पर समझ को भी विकसित करने का कार्य भी किया |
जी.डी. बिड़ला ने अनेक कार्य किये और वे असिम प्रतिभा के धनी थे | इस लेख में उलेखित विवरण उन के व्यक्तित्व की एक झलक मात्र हे |