Sep 18, 2018

घनश्याम दास बिड़ला, आदित्य बिड़ला ग्रुप, बिड़ला ग्रुप हिस्ट्री, कारोबार।

घनश्याम दास बिड़ला, आदित्य बिड़ला ग्रुप, बिड़ला ग्रुप हिस्ट्री, कारोबार।

घनश्याम दास बिड़ला, आदित्य बिड़ला ग्रुप के संस्थापक
घनश्याम दास बिड़ला, बिड़ला ग्रुप के संस्थापक। 

घनश्याम दास बिड़ला जीवनी , बिड़ला ग्रुप हिस्ट्री, परिवार। 

घनश्याम दास बिड़ला (Ghanshyam das Birla), बिड़ला ग्रुप के संस्थापक थे। वर्तमान में इसका नाम आदित्य बिड़ला ग्रुप हे। घनश्याम दास बिड़ला का जन्म सन 11 अप्रेल 1894 ग्राम पिलानी राजस्थान में हुआ था। इन के पिता का नाम बलदेवदास बिड़ला था। इनके पिता की चार संतान जुगल किशोर बिड़ला, रामेश्वरदास बिड़ला, घनश्याम दास, ब्रजमोहन दास बिड़ला थी। इनकी माता का नाम योगेश्वरी देवी था। घनश्याम दास मात्र 14 वर्ष की आयु से ही अपनी सामान्य शिक्षा पूरी कर वे अपने खानदानी व्यावसाय में योगदान देने लगे।

आईडिया (Idea), हिंडालको(Hindalco), और भी कई कंपनिया सव्मित्व में हे। इस बिड़ला ग्रुप का करोबार 20 से अधिक देशो में फेला हे। जिसमे घनश्याम दास का विशेष योग दान रहा। घनश्याम दास बिड़ला भारतीय अर्थव्वस्था के सूत्रधार थे। भारतीय अर्थव्वस्था को प्रगति के पथ पर अग्रसर करने के लिए उनका नाम स्वर्णिम अक्षरों में अंकित हे। घनश्याम दास बिड़ला कभी भी उपलब्धियो से संतुष्ट नहीं होते थे। एक लक्ष्य को प्राप्त कर अगले के लिए अग्रसर हो जाते थे। वे सदेव आत्म प्रसंसा के खिलाफ थे।

इसलिए उन्होंने अपनी जीवनी पर कभी सहमती नहीं दी। वेसे उन्होंने अपने को कई बार अभिव्यक्त किया जिसका उलेख उनके दवारा लिखे पत्र पत्रिकाओ और भाषण में मिलता हे। जिसमे उनके जीवन दर्शन की झलक मिलती हे। जिससे उनके जीवन की काफी जानकारी मिलती हे। उनके दवारा कियो गए 60 साल के लगतार प्रयासों के कारणों ही 20 सदी में आधुनिक भारत की नीव पड़ी। जब देश आजादी के लिए संघर्ष कर रहा था। तब भी ब्रिटिश सरकार के अधिकारी विस्टन चर्चिल भी भारत में सवेधानिक शासन व्यवस्था के लिए उनसे परामर्श लेते थे।

उनके दवारा ही भारत में पूंजीवादी व्यवस्था की नीव पड़ी। आजादी के बाद उन्होंने देश के उधोग के विकास, कला, संस्कृति, तकनिकी, प्रोधोयोगिकी, शिल्पकला, राजनीती, महत्पूर्ण योगदान दिया। उन के जेसा योगदान किसी और अन्य भारतीय ने नहीं दिया। 1942 आते आते G.D बिड़ला, मील मालिक और उद्योगपति के तोर पर पहचान बना चुके थे। गाँधी जी के विचारो से प्रभावित होकर उन्होने खुबसूरत मंदिर, शिक्षण संसथान और सामाजिक कार्यो में भी योगदान दिया। उन्हें दानशीलता और महात्मा गाँधी से आदर्श संबंधो के लिए भी जाना जाता हे। लेकिन दुर्भाग्य से महात्मा गाँधी की हत्या उनके दिल्ली स्थित आवास पर ही हुई थी।

सामाजिक कार्यो के साथ साथ उन्होंने कभी भी अपने व्यवसायिक हितो को क्षति नहीं पहुचने दी। 1947 के पूर्व वे स्वदेशी उधोग के प्रबल समर्थक थे, उन्होंने भारतीय उधोग और उनके विकास के लिए अनेक कार्य किये। जब विश्व युद्ध के कारण विश्व की अर्थव्यवस्था ख़राब थी तब भी घनश्याम दास बिड़ला ने व्यापक लाभ कमाया।

इस कारण उन्होंने स्वयं को भारत के प्रथम उधोगपति के रूप में स्थापित कर लिया था। उन्ही के प्रयासों से भारतीय उधोगो को ब्रितानी हुकूमत से रियायते प्राप्त हुई। पूंजीवादी जगत को मजबूत करने के लिए उन्होंने राजनितिक ढाचे के साथ परस्पर समझ को भी विकसित करने का कार्य भी किया। घनश्याम दास बिड़ला ने अनेक कार्य किये और वे असिम प्रतिभा के धनी थे। इस लेख में उलेखित विवरण उन के व्यक्तित्व की एक झलक मात्र हे।

घनश्याम दास बिड़ला, आदित्य बिड़ला ग्रुप, बिड़ला ग्रुप के कारोबार।  

उनकी कुछ कार्यो का वर्णन इस लेख में किया गया हे, जो इस प्रकार हे। आदित्य बिड़ला ग्रुप एक बहुराष्ट्रीय व्यापारिक संस्था हे। जो 20 से ज्यादा देशो में अपना कारोबार संचालित करता हे। इसका मुख्यालय मुंबई भारत में स्थित हे।

1. धातु कारोबार:- धातु कारोबार में विश्वभर में आदित्य बिड़ला ग्रुप की एलुमिनियम और तांबा उत्पादन की लगत सब से कम आती हे। इस कारण नियुनतम लगत में उत्पादन करने के मामले में हिंडाल्को विश्व की प्रमुख 500 कंपनियों में से एक हे। यह विश्व की सबसे बड़ी एलुमिनियम रोलिंग कंपनी मानी जाती हे। एलुमिनियम के प्राथमिक उत्पादन में इसे एशिया में तीसरा और कॉपर के उत्पादन में इसे चोथा स्थान प्राप्त हे।

2. अन्य कारोबार:- धातु कारोबार के साथ साथ बिड़ला ग्रुप कई वस्तुओ का उत्पादन करता हे और कई सेवाए भी प्रदान करता हे। इन क्षेत्रो में भी समूह का योगदान महत्वपूर्ण हे और उसे अग्रणीय स्थान प्राप्त हे। जेसे बी.पी.ओ. सेवाओ में विश्व में 15 वा और भारत में तीसरा स्थान प्राप्त हे। तथा खाद उत्पादन में भी अग्रणीय भूमिका हे। वस्त्रो के उत्पादन में प्रमुख स्थान प्राप्त हे। तथा यार्न के उत्पादन में भारत में प्रथम स्थान प्राप्त हे। कलोर एल्करी सेक्टर में दूसरा स्थान प्राप्त हे। संपत्ति प्रबंधन के कारोबार में और लाइफ इंसोरेंस के भारत की 5 प्रमुख कंपनियों में से एक हे। तथा भारत की 5 प्रमुख मोबाइल कंपनी में अग्रणीय स्थान हे।

3. सीमेंट कारोबार:- समूह का सीमेंट कारोबार ग्रासिम एवं अल्ट्रा टेक सीमेंट के नाम से संचालित हे। तथा दोनों भारत की अग्रणीय कपनियां हे और सीमेंट कारोबार में भारत में इनका पहला स्थान हे। और क्वालिटी वाइज भी नंबर वन ब्रांड हे। अल्ट्रा टेक सीमेंट को अब समूह में शामिल कर लिया गया हे, पहले यह एल एंड टी दवारा सीमेंट उत्पादन करती थी। सन 2007 में समूह दवारा इसका अधिग्रहण कर लिया गया हे।

4. कार्बन ब्लैक कारोबार:- कार्बन ब्लैक के उत्पादन में समूह विश्व में चोथे स्थान पर हे। इसके उत्पादन के प्लांट भारत चीन थाएलैंड मिस्त्र में हे वही से इसका उत्पादन होता हे। और समूह दवारा विश्व के सभी टायर विक्रेताओ को कार्बन ब्लैक की आपूर्ति की जाती हे।

5. टेलिकॉम कारोबार:- समूह का टेलिकॉम व्यावसाय आईडिया(Idea) सेल्युलर कंपनी दवारा संचालित किया जाता हे। भारत में यह प्रमुख टेलिकॉम ऑपरेटरर्स में से एक हे। इसका प्राम्भिक पूंजी निवेश भारत में किया गया हे, आईडिया सेल्युलर का बाजार में पूंजी निवेश के हिसाब से तीसरा स्थान हे।

ये बिड़ला ग्रुप वर्तमान आदित्य बिड़ला ग्रुप के कुछ प्रमुख कारोबार जो विश्व भर में विभिन्न कपनियो के माध्यम से संचालित किये जाते हे, इन सभी कारोबार के एकीकरण का श्रेय भी घनश्याम दास बिड़ला को जाता हे।

Sep 12, 2018

भाई दूज पर लेख और निबंध

भाई दूज पर लेख और निबंध

भाद्र द्वितीय कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को मनाया जाने वाला पर्व  भाई दूज है ।जो हिंदू धर्म का पर्व है जिसे यम द्वितीय  भी कहते हैं। भाई दूध दीपावली के तीसरे दिन बाद आने वाला ऐसा पर्व है जो भाई के प्रति बहन जे स्नेह को अभिव्यक्त करता है एवं बहने अपने भाई की खुशहाली के लिए कामना करती है।
भाई दूज। यम द्वितीया। लेख। निबंध 
भाई दूज मनाने का मुहूर्त
हमारे हिंदू धर्म में हर त्यौहार को मनाने का एक मुहूर्त होता है वैसे ही भाई दूज को मनाने का भी एक मुहूर्त होता है भाई दूज कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि पर शुभ मुहूर्त में भाई को तिलक करके मनाया जाता है।

भाई दूज की पूजा की सामग्री
भाई को तिलक करने से पहले बहने कुछ आवश्यक सामग्रियों का इस्तेमाल करती है जो कि इस प्रकार है।

(१) आरती की थाली
(२) तिलक के लिए कुमकुम चावल
(३) नारियल ,(सूखा गोला ,खोपरा)
(४) मिठाई
(५) सर ढकने के लिए रुमाल  या स्वच्छ कपड़ा
(६)बैठने के लिए आसन ,पटिया

भाईदूज की पौराणिक कथा अनुसार
कार्तिक शुक्ल की  द्वितीय तिथि को पूर्व काल में यमुना ने यमराज को अपने घर पर सत्कार पूर्वक भोजन कराया था उस दिन नरक का जीवन जी रहे जीवो को इस यातना से छुटकारा मिला था और वह पाप मुक्त होकर सब बंधनों से छुटकारा पा गए और सभी अपनी इच्छा अनुसार संतोष पूर्वक रहते थे।
उन सब ने मिलकर एक महान उत्सव मनाया जो की यम लोक के लिए हम सुख और खुशी पोहचने  वाला था इसलिए ये तिथी तीनों लोकों में यम द्वितीया के नाम से प्रख्यात हुई , जिस तिथि  के दिन यमुना ने यम को अपने घर बुलाकर भोजन कराया था उसी तिथि  के दिन जो मनुष्य अपनी बहनों के हाथों से अच्छा भोजन करता है उसे पौराणिक मान्यता के अनुसार उत्तम  भोजन सहित धन की प्राप्ति होती है।

भाई दूज की रोचक कथा अनुसार
एक बूढ़ी औरत के साथ बैठे थे और एक बेटी थी बेटों पर सर्प की कुदृष्टि थी जैसे ही उसके बेटे की शादी में  का सातवा फेरा होता साँप उसे डस लेता है इस प्रकार बुढ़िया के छह बेटे मर गए इस डर से उसने सातवें बेटे की शादी नहीं करी लेकिन बहन ने देखा लेकिन बहन से यह  सब देखा नहीं जा रहा था तो वह एक ज्योतिषी के पास गयी ज्योतिषी ने उससे कहा तेरे भाइयों पर सर्प की कुदृष्टि है अगर तू उसकी सारी  बलाये अपने ऊपर लेले तो उसकी जान बच सकती है तो उसने अपना रौद्र रूप दिखाना शुरू कर दिया वह जोर-जोर से चिल्लाने व सबसे लड़ने लगती थी उसके बाद सभी लोग इस वजह से उसकी सब बातें मानने लगे थे।

जब उसके भाई की शादी का वक्त आया और उसके जीजा जी उसके भाई को सेहरा बांधने लगे तोवह चिल्लाने लगी सहरा पहले में बाँधूँगी तो सहरा उसे बांध दिया सहरा में साँप था तो उसने उसे फेंक दिया जब उसके भाई का  घोड़े पर बैठने का समय आया तो वो फिर चिल्लाने लगी कि मैं घोड़े पर बैठूंगी इस प्रकार उसे फिर घोड़े ओर बैठा दिया  जिस पर साँप था ,उसने उसे भी फेक दिया इस प्रकार स्वागत के समय भी यही हुआ ।

अब जब शादी शुरू हुई तो सांपों का राजा उसे ढसने आया तब बहन ने उसे एक टोकरी में बंद कर दिया फेरे होने लगे तब  नागिन बहन  के पास आई और बोली मेरे पति को छोड़ दे तब बहन बोली पहले मेरा भाई से अपनी कुद्रष्टि हटा नागिन ने ऐसा ही किया, इस प्रकार उसने अपने आप को बुरा बना कर ना केवलबअपने भाई की रक्षा ही नहीं बल्कि उसके प्राण भी बचाए।

भाई दूज की मान्यता
भाई दूज को लेकर हमारे देश में यह मान्यता प्रचलित है कि इस दिन बहनें भाई को प्रेम पूर्वक तिलक कराती हैं उन्हें प्यार से भोजन कराती है और भगवान से उनकी लंबी आयु की कामना करती है क्योंकि इस दिन यमुना जी ने भी अपने भाई  यमराज से वचन लिया था उसके अनुसार भाई दूज मनाने से यमराज के भय से मुक्ति मिलती है और भाई-बहन में प्रेम के साथ ही सौभाग्य में भी वृद्धि होती है।

भाई दूज के कई अन्य नाम भी है 
भाई दूज को भारत में विभिन्न स्थान में विभिन्न नामों से पुकारा जाता है (गोवा, महाराष्ट्र और कर्नाटक )में इसे भाऊबीज कहते है (नेपाल) में भाई तिलक कहते हैं( बंगाल) में ईसे भरात्रु द्वितीया, भाऊबीज, भाई फोटा, और (मणिपुर) में निंनगोल, चोकुवा, नाम से पुकारते हैं। इस प्रकार हमारे देश भारत में भाई दूज को कई अन्य नाम से भी पुकारा जाता है ।

उपसंहार
बचपन से ही भाई का बहन का एक दूसरे के प्रति ध्यान और प्रेम की भावना झलकती  है ,और इसी प्रेम को दर्शाने के लिए यह त्योहार बने है। भाई दूज होली और दीपावली दोनों ही समय आती है दोनों में ही बहन का केवल प्रेम और स्नेह  ही झलकता है भाई बहन अपनी सभी लड़ाई-झगड़ों को भुलाकर बहने भाई को तिलक करती है।  बहने अपने भाई के माथे पर तिलक करके उनकी खुशहाली और लंबी आयु की कामना करती है हमारे देश भारत में प्रेम और स्नेह को दिखाने वाले इतने सुंदर ओर प्यारे त्योहार है जो शायद ही कही होंगे।

Sep 4, 2018

महात्मा गांधी के आंदोलन और  जीवनी।

महात्मा गांधी के आंदोलन और जीवनी।

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महात्मा गांधी के आंदोलन और  जीवनी। 

महात्मा गांधी आंदोलन और  जीवनी। 

" जिस दिन प्रेम की शक्ति.
शक्ति के प्रति प्रेम पर हावी हो जाएगी,
दुनिया में अमन आ जाएगा "

"ये कथन हमारे राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के थे की जिस दिन शक्ति पर प्रेम हावी हो जाएगा उस दिन हमारे देश मे अमन आ जायेगा"

महात्मा गांधी जी की जीवनी

महात्मा गांधी जी का जन्म 1869 गुजरात  के पोरबंदर में हुआ था उनके पिता का नाम करमचंद गांधी था जो कि पोरबंदर के दीवान थे उनकी मां का नाम पुतलीबाई था जो धार्मिक प्रवृत्ति के थे और उनके धार्मिक प्रवृत्ति का असर महात्मा गांधी पर काफी पड़ा था उनकी पत्नी का नाम कस्तूरबा गांधी था जो कि उन से 1 साल बड़ी थी उनका विवाह 13 वर्ष की आयु में हो गया था ,1887 में उन्होंने मैट्रिक की परीक्षा पास की थी सन 1888  में उन्होंने भावनगर के सामलदास कॉलेज में पढ़ाई की यहां से वहां  लंदन गए जहां इन्होंने बैरिस्टर की शिक्षा प्राप्त की थी।

महात्मा गांधी जी के आंदोलन की परिभाषा

         " दे दी हमें आजादी बिना खड़ग बिना ढाल.साबरमती के संत तूने कर दिया कमाल."

हमारे राष्ट्रपिता के लिए लिखी गई है दो लाइनों उनके आंदोलन की पूरी व्याख्या करते हैं इसमें बोला गया है कि इस महात्मा ने बिना किसी हत्यार और बिना किसी को ढाल बनाकर हमारे देश भारत को सत्य और अहिंसा के सहारे आजादी दिलवाई।

महात्मा गांधी जी सत्य और अहिंसा के पुजारी थे उनका पूरा जीवन सत्य और अहिंसा के मार्ग पर आधारित था सत्य और अहिंसा के दम पर एकजुट होकर हमारे भारत देश को स्वतंत्रता दिलाई अपने पूरे जीवन में केवल सत्य और अहिंसा का ही प्रयोग किया एक तरह से उनका पूरा जीवन एक आंदोलन ही था उनके अनुसार केबल रक्त बहाकर ओर किसी को नुकसान पोहचाना ही आंदोलन नही होता आंदोलन सत्य और अहिंसा का सहारा लेकर भी किया जा सकता है और वो अपने जीवन के सभी आंदोलन में सफल भी रहे।

महात्मा गांधी जी के आंदोलन के नाम

महात्मा गांधी जी ने सत्य और अहिंसा के बदौलत अपने देश को स्वतंत्रता दिलाई इस हेतु उन्होंने कई आंदोलन करें जो कि इस प्रकार है।

(1) चंपारण सत्याग्रह -1917
 चंपारण बिहार राज्य का एक जिला है और इस जिले के किसानों की मदद के लिए यह आंदोलन किया गया था इसे निल की खेती को रोकने के लिए किया गया था क्योंकि नील की खेती से जमीन खराब हो जाती थी इस आंदोलन को चंपारण आंदोलन नाम दिया गया था।

(2) खेड़ा सत्याग्रह- 1918
खेड़ा गुजरात में है यह एक किसान आंदोलन था जिसमें किसानों की दशा को सुधारने के लिए किया गया था जो कि लगान व्रद्धि की समाप्ति पर आधारित था।

(3) अहमदाबाद अनशन -1918
अहमदाबाद अनशन अहमदाबाद के कर्मचारियों पर आधारित था इस आंदोलन का मुख्य उद्देश्य मालिकों द्वारा मजदूरों को दिया जाने वाला प्लेग बोनस को समाप्त करना था।

(4)खिलाफत आंदोलन -1919
खिलाफत आंदोलन भारत में मुख्य रूप से मुसलमानों द्वारा चलाया गया था यह आंदोलन राजनीति  ऒर धार्मिक था इस आंदोलन का उद्देश्य (शुन्नी)
इस्लाम के  मुखिया माने जाने वाले तुर्की के खलीफा के पद की पुनः स्थापना कराने हेतु या आंदोलन किया गया था।

(5) असहयोग आंदोलन 1920
असहयोग आंदोलन महात्मा गांधी  तथा भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के बीच के नेतृत्व  में आंदोलन चला था जिसने भारतीय स्वतंत्रता  आंदोलन को एक नई जागृति प्रदान करि।

(6) दांडी मार्च  -1930
दांडी मार्च सत्याग्रह अंग्रेज सरकार के नमक के ऊपर कर लगाने के कानून के विरुद्ध किया गया आंदोलन था।

(7) सविनय अवज्ञा आंदोलन -1930
सविनय अवज्ञा आंदोलन गांधी जी द्वारा 1930 में शुरू किया गया था जिसका अर्थ था बिना किसी हिंसा के किसी सरकारी आदेश की अवहेलना करना (लॉर्ड इरविन )ने गांधी जी की 11 मांगों को नामंजूर कर दिया था तो महात्मा गांधी जी ने इन मांगों के लिए सविनय अवज्ञा आंदोलन किया था।

(8) व्यक्तिगत सविनय अवज्ञा आंदोलन - 1940
व्यक्तिगत सविनय अवज्ञा आंदोलन गांधी जी की इरविन पेंट समझौता को ना मानना और ब्रिटिश सरकार द्वारा पूर्ण स्वराज की बात को स्वीकार नहीं करने के विरुद्ध व्यक्तिगत सविनय अवज्ञा आंदोलन  पूर्ण स्वराज्य हेतु शुरु किया गया था।

(9) भारत छोड़ो आंदोलन - 1942
भारत छोड़ो आंदोलन द्वितीय विश्व युद्ध के समय आरंभ किया गया था जिसका मकसद भारत मां को अंग्रेजों की गुलामी से आजाद कराना  था महात्मा गांधी जी ने इस आंदोलन के शुरुआत अखिल भारतीय कांग्रेस समिति के मुंबई अधिवेशन से शुरू की थी।

(10) नोआखाली सत्याग्रह  -1946

महात्मा गांधी स्वतंत्र आंदोलन के द्वारा सांप्रदायिकता के खिलाफ लड़ते रहते थे क्योंकि वह जानते थे कि इसका घातक परिणाम सामने आएगा उनका मानना था यदि ऐसा हुआ तो हिंदू मुसलमानों में आपसी  मतभेद होगा तो भारत को कभी भी इस गुलामी से मुक्ति नहीं मिल पाएगी साम्प्रदायिक सद्भावना हेतु उन्होंने ये आंदोलन किया था।

गांधी जी के जीवन दर्शन का आधार भारतीय आदर्शवाद है

महात्मा गांधी जी के जीवन के मोटे तौर पर चार प्रमुख तत्व जो उनके आदर्शवाद पर आधारित है.

(1) सत्य
 गांधी जी के लिए ईशवर और सत्य में कोई अंतर नहीं था वह कहते थे यदि कोई व्यक्ति मन, वचन ,कर्म , अथवा कार्य में सत्य का प्रयोग करता है तो उसे ईश्वर अवश्य प्राप्त होता है।

(2) अहिंसा
अहिंसा अपने  सक्रीय रूप में जीवन के प्रति सद्भावना है यह शुद्व प्रेम  है।

(3) निर्भयता
समस्त ब्रहा भयो  से मुक्ति इसका अर्थ है।

(4) सत्याग्रह
विरोधी को कष्ट देकर नहीं अपितु स्वयम अपने आप को कष्ट देकर सत्य का समर्थन कराना सत्याग्रह कहलाता है।

गांधी जी का शिक्षा दर्शन

संसार के अधिकांश लोग गांधी जी को एक महान राजनीतिक ही मानते हैं परंतु उन्होंने देश की राजनीतिक उन्नति की अपेक्षा सामाजिक उन्नति को अधिक महत्व दिया था जिसमें उन्होंने शिक्षा को अधिक महत्व दिया जिसमें खास तौर पर बच्चों की शिक्षा पर ज्यादा बल दिया उनके अनुसार साक्षरता ना तो शिक्षा का अंत है और न आरंभ  यह केवल एक साधन है जिसके द्वारा पुरुष व स्त्री को शिक्षित किया जा सकता है।

 गांधी जी की शिक्षा के उद्देश्य

 इन्हें दो भागों में बांटा गया था।

(1) गांधीजी के तात्कालिक उद्देश्य

(2) शिक्षा का सर्वोच्च उदेश्य

गांधीजी के तात्कालिक उदेश्य इस प्रकार है। 

(1) जीविकोपार्जन का उद्देश्य

(2) सांस्कृतिक उद्देश्य

(3) पूर्ण विकास का उद्देश्य

(4) नैतिक अथवा चारित्रिक विकास

 (5) मुक्ति का उद्देश्य

शिक्षा का सर्वोच्च उद्देश्य

गांधी जी के अनुसार शिक्षा का सर्वोच्च उद्देश्य स्तय अथवा ईशवर की प्राप्ति शिक्षा के सारे उद्देश्य इस उद्देश्य के अधीन है यह  उद्देश्य वही आत्माभूति का उद्देश्य है ,आत्मा का विकास करना चरित्र का निर्माण करना है तथा व्यक्ति को ईश्वर ओर आत्मानुभूति के लिए प्रयास करने के योग्य बनाना है सर्वोच्च उद्देश्य है शिक्षा का ।

निष्कर्ष
इस प्रकार महात्मा गांधी जी ने अपना पूरा जीवन देश को समर्पित कर दिया था उस दुबले-पतले से दिखने वाले व्यक्ति महात्मा गांधी जी ने अपने  शरीर के वस्त्र तक देश के लिए छोड़ दिया था तो उनके बारे में कुछ भी लिखना या बोलना कहीं ना कहीं कुछ कम ही लगेगा ऐसे महात्मा को मेरा शत शत नमन है ।

Aug 28, 2018

छोटे व्यापारी  कैसे उठा सकते हैं Flexi ऋण योजना का लाभ

छोटे व्यापारी कैसे उठा सकते हैं Flexi ऋण योजना का लाभ




हर व्यवसायी चाहता है कि वो अपना बिजनेस बढ़ाएं। मगर बिजनेस को बढ़ाने के लिए सबसे जरूरी होता है पैसा। पैसे की जरूरतों को पूरा करने के लिए व्यापारी बिजनेस लोन का सहारा लेते हैं। बड़े व्यवसायियों को तो बहुत आराम से बिजनेस लोन मिल जाता है। मगर छोटे व्यवसायियों को स्माल बिजनेस लोन प्राप्त करने में परेशानियों का सामना करना पड़ता है। अगर आप एक छोटे व्यवसायी हैं और बिजनेस लोन की तलाश में हैं, तो Flexi ऋण योजना काफी मददगार साबित होती है।

Flexi ऋण योजना क्या है?
फ्लेक्सी बिजनेस लोन प्लान फ्लोटिंग और फिक्स्ड प्लान का मिला जुला रूप है। इस प्लान को हाइब्रिड लोन प्लान भी कहा जाता है। इसमें सबसे खास बात यह है कि ग्राहक अपनी जरूरत अनुसार लोन अवधि के बीच में अपना प्लान फिक्स्ड या फ्लोटिंग में बदलवा सकता है। इस प्लान के तहत लोन लेने पर शुरुआत में इंटरेस्ट फिक्स्ड रेट से लगाया जाता हैजिसके बाद यह फ्लोटिंग हो जाता है।

Flexi ऋण योजना क्यों है फायदेमंद-
एक फ्लेक्सी लोन लेना हमेशा ही फायदेमंद होता है, क्योंकि यह लोन चुकाने में उधारकर्ताओं को छूट देता है। फलेक्सी बिजनेस लोन का सबसे बड़ा फायदा यह है, कि इसमें उधारकर्ता किसी भी तरह की विशेष भुगतान अनुसूची द्वारा सीमित नहीं है और अपनी आवश्यकता अनुसार अपना लोन चुका सकता है।

आइए आपको फ्लेक्सी लोन के कुछ और फायदें बताते हैं-
  1. कार्यशील पूंजी में बढ़ोत्तरी
  2. अधिक क्षमता के व्यवसाय केंद्र भाड़े पे लेना
  3. आपके दफ्तर में सुधार लाना
  4. यन्त्र सामग्री खरीदना, भाड़े पे लेना या उनमे सुधर लाना
  5. नयी तकनीक लाना या तकनीकी सुधर करना
  6. व्यावसायिक वस्तुसूचि में बढ़ौती करना
  7. मियादी मजदूर नियुक्त करना
  8. बड़ी मांग के लिए कच्ची सामग्री खरीदना
  9. नए शहर में विस्तार करना
  10. व्यावसायिक प्रक्रियाओं मे वृद्धि करना और बड़ी परियोजनाएं हाथ में लेकर अपने बिजनेस को और आगे बढ़ाना
  11. समय से पहले अपने लोन के भुगतान से अपना सिबिल स्कोर बढ़ाना।
Flexi बिजनेस लोन कैसे है बाकी लोन से अलग-

स्माल बिजनेस लोन लेने के वैसे तो कई विकल्प उपलब्ध हैं, लेकिन इन सभी विकल्पों में से सबसे बेहतर विकल्प होता है- Flexi बिजनेस लोन। Flexi ऋण योजना के तहत बिजनेस लोन प्राप्त करना व्यवसायियों के लिए काफी सुविधाजनक होता है। Flexi ऋण योजना सबसे अच्छा फायदा है कि आप इसे अपनी सुविधानुसार आसान किस्तों में चुका सकते हैं। इसमें इस सुविधा ये भी होती है कि कुछ NBFC प्री-पेमेंट पर कोई एक्स्ट्रा चार्जेज नहीं लेती हैं। जिसकी वजह से आपका लोन चुकाना काफी आसान हो जाता है। चाहे कार्यशील पूँजी हो, छोटा उपकरण खरीदना हो, या फिर कोई अन्य बिजनेस विस्तार की योजना हो Flexi बिजनेस लोन इन सभी में मददगार होता है।

कहां से लें Flexi बिजनेस लोन-

ये तो थे Flexi बिजनेस लोन के फायदें। अब इन फायदों का लाभ उठाने के लिए सबसे बड़ा सवाल उठता है, कि आखिर Flexi बिजनेस लोन ले कहां से? बिजनेस लोन के लिए आप विभिन्न बैंकों में आवेदन कर सकते हैं। हालांकि बैंको की लोन देने की प्रोसेस थोड़ी जटिल होती है, लेकिन फिर भी काफी अधिक संख्या में लोग अभी भी बिजनेस लोन के लिए बैंकों पर ही निर्भर रहते हैं। मगर बहुत कम बैंक हैं, जो आपको फ्लेक्सी बिजनेस लोन की सुविधा प्रदान कर सकते हैं।

ऐसे में बैंकों की इस जटिल प्रोसेस से बचने के लिए आप एनबीएफसी का सहारा ले सकते हैं। ऐसी बहुत सी एनबीएफसी हैं, जो व्यवसायियों के लिए Flexi ऋण योजना चलाती हैं। एनबीएफसी बहुत कम पेपर वर्क में आपको आसानी से 5 लाख रुपये तक का Flexi बिजनेस लोन प्रदान कर देती हैं। सामान्यतया NBFC से बिजनेस लोन लेने में आपको 3 से 5 दिनों के भीतर ही लोन राशि मिल जाती है। इसके साथ ही NBFC स्माल बिजनेस लोन भी आपको आसानी से प्रदान कर देते हैं।

Flexi बिज़नेस लोन लेने की योग्यता-

वैसे तो अलग-अलग कंपनी या बैंक के लिए अलग-अलग योग्यता मापदंड होता है, लेकिन फिर भी जो जरूरी मापदंड हैं, वो आपको बता रहे हैं।
  • पिछले 12 महीनो मे कम से कम 10 लाख रुपये का बिज़नेस किया हो
  • पिछले साल का ITR 2.5 लाख से ज़्यादा हो
  • घर या बिज़नेस की जगह अपनी हो
  • घर और बिज़नेस अलग जगहों पर हो
  • कम से कम 2 साल से बिज़नेस कर रहे हो
स्माल बिजनेस लोन के लिए ज़रूरी काग़ज़ात-

स्माल बिजनेस लोन के लिए भी अलग-अलग कंपनियों की अलग-अलग दस्तावेजों की सूची होती है। लेकिन हम आपको सबसे जरूरी दस्तावेजों की सूची बता रहे हैं
  • पैन कार्ड
  • पिछले 12 महीनों का बैंक विवरण
  • पिछले 2-3 साल का ITR
  • बिज़नेस स्थान का पता
  • घर के पते का प्रमाण
सभी जानकारियां विस्तार से होनी चाहिए, जिससे की बैंक को बिजनेस लोन देने में सोचना ना पड़े। आपकी जानकारी बैंक को इस बात का आश्वासन जरूर दे सकें कि आप बैंक को लोन समय से चुका सकते हैं। वैसे तो ये जरूरी दस्तावेजों की सूची NBFC के लिए है। बैंकों के लिए जरूरी दस्तावेजों की सूची काफी लंबी होती है, जिसे पूरा कर पाना लगभग असंभव हो जाता है। ऐसे में NBFC से आसानी से Flexi ऋण योजना का लाभ उठाया जा सकता है।

ब्याज की दरें-

बिजनेस लोन लेने से पहले उसकी ब्याज की दरें जरूर जांच लें। क्योंकि कई बार ब्याज की दरें काफी अधिक होती हैं, जिसके कारण बिजनेस लोन चुका पाना व्यवसायियों के लिए मुश्किल हो जाता है। अलग-अलग बैंकों और NBFC की ब्याज दरें अलग-अलग होती हैं। ऐसे में व्यवसायी को स्माल बिजनेस लोन लेने से पहले ब्याज दरों का जानना आवश्यक होता है। वैसे तो ज्यादातर बैंकों या NBFC की ब्याज की दरें चक्रवर्ती दरें होती हैं। मगर कई बैंकों या NBFC में Flexi ऋण योजना के लिए अलग ब्याज दरें होती हैं, तो व्यवसायियों को एक बार यह भी जांचना जरूरी होता है। ऐसा ना हो कि बिजनेस लोन लेने के बाद उन्हें पछताना पड़े।
भारत का मंगलयान /  मंगल मिशन-Mars Orbiter Mission / लेख, निबंध

भारत का मंगलयान / मंगल मिशन-Mars Orbiter Mission / लेख, निबंध

भारत का मंगलयान / मंगल मिशन / मंगल ग्रह- लेख, निबंध,

प्रस्तावना: अभी तक ऐसा कोई प्रमाण नहीं मिला कि अंतरिक्ष पर जीवन संभव नहीं है कुछ भी ले सकते हैं जैसे कीड़े , बैक्टीरिया या वनस्पति या कुछ भी परंतु यही हासिल हुआ की अंतरिक्ष में जीवन संभव नहीं है इसके बावजूद दावे के साथ नहीं कह सकते हैं कि जीवन वहां पर संभव नहीं है लेकिन फिर भी वैज्ञानिकों ने कई कोशिश करी परंतु कुछ हासिल नहीं हुआ पर ऐसा नहीं है भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी का उपग्रह मंगलयान मंगल ग्रह की कक्षा में प्रवेश कर चुका है और यह भारत के अंतरिक्ष पर शोध की एक अद्भुत घटना है जो कामयाब भी रही तो हो सकता है आगे चलकर हमारे यहां के वैज्ञानिक अपना मंगलयान को भेजने में पहली ही कोशिश में सफलता हासिल कर ली तो वो दिन दूर नहीं जब हमारे देश के वेज्ञानिक वहां रह कर भी आ जाये और उसमे भी कामयाब रहे।
भारत का मंगलयान /  मंगल मिशन-Mars Orbiter Mission / लेख, निबंध
मंगलयान /  मंगल मिशन-Mars Orbiter Mission 

भारत का मंगलयान कब छोड़ा गया?

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन ( Indian Space Research Organisation) की एक महत्वकांक्षी अंतरिक्ष परियोजना है। जिसमें भारत का मंगलयान 5 नवंबर 2013 को 2:30 पर मंगल ग्रह की परिक्रमा करने हेतु छोड़ा गया।
आंध्रप्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से धुर्वीय उपग्रह प्रक्षेपण यान सी-25 के द्वारा सफलतापूर्वक छोड़ा गया था। यह दिन हमारे देश के लिए बहुत ही गौरवपूर्ण दिन रहा।

हमारे भारत के मंगलयान की ऐतिहासिक कामयाबी

मंगलयान की सफलता पर भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संस्थान इसरो के वैज्ञानिकों ने कहा कि मंगल की कक्षा में जाने की प्रक्रिया बिना किसी गड़बड़ी के हो गई थी तरल इंजन की 24 मिनट के बर्न आउट के बाद यान कक्षा में स्थापित हो गया था।

पर हमारे देश ने वह कर दिखाया जो कई अन्य विकसित देश जैसे अमेरिका और चीन जैसा देश भी नहीं कर सका दुनिया के कई देशों ने लगभग मंगल में पहुंचने के लिए 51 मिशन छोड़े इनमें से कामयाब बस 21 ही हुए हैं पर भारत का मंगलयान 67 किलोमीटर का सफर पूरा करके पहली ही कोशिश में सीधे मंगल ग्रह की कक्षा में जा पहुंचा।

भारत की ओर से मिशन मंगल जो मिशन मंगल पर पहली कोशिश में पहुंचा उसका नाम मार्स ऑर्बिटर मिशन यानी (mars orbiter mission ) नाम है जिस दिन हमारा मंगल वहाँ पर पहुंचा उस दिन बुधवार का दिन था पर खुशी इतनी थी कि चारों ओर ही बस मंगल ही मंगल की चर्चा हो रही थी।

सुबह से ही सभी की सांसे थम सी गई थी सब बस मॉम को मंगल पर पहुंचने का इंतजार कर रहे थे निगाहे बस इसरो के मंगल मिशन पर ही थी करीब 7:31 पर मंगल का इंजन चालू करने के बाद सस्पेंस कि करीब 30 मिनट बहुत भारी हो रहे थे कुछ भी हो सकता था कि सफलता मिलेगी कि नहीं यान मंगल के पीछे जा चुका था रेडिओ संपर्क टूट चुका था कुछ पता नहीं चल रहा था कि वहां क्या चल रहा है लेकिन बुधवार के दिन बस मंगल होना था सो हो गया और 7:58 पर यान मंगल की छाया से बाहर आ गया 4 मिनट बाद 8:02 पर इसरो के सेंटर पर खुशी की लहर दौड़ गई थी।

हमारा मोम अमेरिका स्पेस एजेंसी नासा की मावेन मिशन के मंगल की कक्षा में पहुंचने की ठीक 48 घंटे बाद भारत के मंगलयान ने लाल ग्रह की कक्षा में प्रवेश करने में सफलता पाई मंगलयान पर 450 करोड रुपए खर्च हुए जो नासा के मार्स मिशन का दसवां हिस्सा ही है.
इस प्रकार कम समय और कम खर्चे की लागत में और कड़ी मेहनत से हमारे मंगलयान ने मंगल पर अपनी सफलता हासिल करि।

मंगल पर पहुंचने वाले नाकामयाब देश

एशिया में कोई भी ऐसा देश नहीं है जिसने मंगलयान पर पहली ही कोशिश में सफलता प्राप्त की हो पर हमारे देश का मंगलयान पहली ही कोशिश में सफल रहा।

चीन
चीन का मंगल मिशन यंगहाउ -1, 2011 में असफल हो गया था।

जापान
1998 में जापान का मंगलयान ईंधन खत्म होने के कारण असफल रहा।

अमेरिका
अमेरिका ने भी पहली पहली 6 कोशिश में नाकामयाब रही थी।

मंगलयान की सफलता में रूस, अमेरिका, यूरोपीय यूनियन, के बाद भारत चौथे स्थान पर है भारत का मंगलयान पहली ही कोशिश में सफल रहा।

मंगलयान की सफलता पर बधाई देने वाले सदस्य। 
मंगलयान के सफलतापूर्वक मंगल की कक्षा में प्रवेश होते ही पूरे विश्व से भारत को बधाई संदेश आने लगे थे राजनेता से लेकर अभिनेता, वैज्ञानिकों ,प्रधानमंत्री ,राष्टपति सभी ने अपनी ख़ुशी जाहिर करते हुए भारत के मंगलयान पर ढेरो बधाईया दी उनमे से कुछ के नाम इस प्रकार है।

इस उपलक्ष में हमारे देश के प्रधान मंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने अपनी ख़ुशी जाहिर करते हुए कहा की।

'हमने इंसानी साहस और नवीनता की सीमा पार कर ली है।,

(1) शशि थरूर।

(2) अरविंद केजरीवाल।

(3) अमिताभ बच्चन।

(4) मधुर भंडारकर।

(5) मनमोहन सिंह।

इत्यादि इन सभी ने चाहे वह क्रिकेटर हो फिल्म इंडस्ट्री के लोग हो राजनेता हो सभी ने मंगलयान की जीत पर ढेरों बधाइयां दी इसके साथ ही भारत के वैज्ञानिकों में खुशी की लहर दौड़ गयी ,सभी वैज्ञानिको के लिए ये मिशन बहुत महत्वपूर्ण था जिसमें उन्होंने सफलता प्राप्त की।

वैज्ञानिकों के उद्देश्य

यह सफलता साइंस और टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में विकास और सुधार के नए द्वार,खोलेगी।

  • मंगल ग्रह की सतह की आकृति, स्थलाकृति और खनिज का अध्ययन करके विशेषताएं पता लगाना
  • सुदूर संवेदन तकनीक का उपयोग कर मंगल ग्रह का माहौल के घटक सहित मीथेन और कार्बन डाइआक्साइड का अध्ययन करना।
  • मंगल ग्रह के ऊपरी वायुमंडल पर सौर हवा, विकिरण और बाह्य अंतरिक्ष के गतिशीलता का अध्ययन
  • मिशन मंगल के चाँद का भी निरीक्षण करने के लिए कई अवसर प्रदान करेगा

मंगलयान का मुख्य उद्देश्य भारत के रॉकेट प्रक्षेपण प्रणाली, अंतरिक्ष यान के निर्माण और संचालन क्षमताओं का प्रदर्शन करने के लिए हैं। विशेष रूप से, मिशन का प्राथमिक उद्देश्य ग्रहों के बीच के लिए मिशन के संचालन,उपग्रह डिजाइन, योजना और प्रबंधन के लिए आवश्यक तकनीक का विकास करना है। द्वितीयक उद्देश्य मंगल ग्रह की सतह का स्वदेशी वैज्ञानिक उपकरणों का उपयोग कर विशेषताओं का पता लगाना है।

उपसंहार
मंगलयान हमारे देश का एक गौरवमयी और महत्वकांक्षी मिशन रहा है जिसने पूरे विश्व में भारत का नाम रोशन किया है तथा उन सभी अग्रणी देशों की पंक्ति में खड़ा होने का भारत को सौभाग्य प्राप्त हुआ है जिसमें कुछ ही देशों ने यह सफलता प्राप्त की है जैसे अमेरिका, रूस, यूरोपीय यूनियन ,और अब भारत,भारत ने इसमें अपना चौथा स्थान बनाया वह भी पहली ही कोशिश में।

देश के उन सभी महान वैज्ञानिकों को आभार जिन्होंने इस महत्वपूर्ण मिशन को सफल बनाने में अपना परोक्ष और अपरोक्ष रूप से भारत के मंगलयान में सहयोग प्रदान किया है। 
आलेख का वर्गीकरण/ रिपोर्ट, फीचर और आलेख में अंतर / आलेख के उदाहरण

आलेख का वर्गीकरण/ रिपोर्ट, फीचर और आलेख में अंतर / आलेख के उदाहरण

आलेख क्या होता है
आलेख क्या होता है
सर्वप्रथम हमें जानना अतिआवश्यक है कि आलेख क्या होता है:- तो आइए हम जानते हैं इसकी परिभाषा, इसका नमूना, इसके अंग तथा साथ ही यह जानते हैं कि रिपोर्ट और आलेख में समानता तथा अंतर, आलेख के उदाहरण तथा लेखन हेतु महत्वपूर्ण बिंदु ।

आलेख एक गद्य लेखन विधा है जिसे वैचारिक गद्य रचना भी कह सकते हैं, वैचारिक जहां हमारे विचारों की प्रधानता है, लेखक के नीति विचारों की प्रधानता है। आलेख निम्न विषयों पर  प्रतिपादित किए जाते हैं जैसे ज्वलंत विषय, समस्याओं, अवसरों तथा चरित्र पर आलेख लिखे जाते हैं।

किसी एक विषय पर प्रधान छोटी सी संयुक्त रचना को आलेख कहते हैं जिसमें तथ्यात्मक, विश्लेषणात्मक अथवा विचारात्मक संपूर्ण जानकारी होती है, आलेख गद्य लेखन की वह विधा है जिसमें लेखक अपनी बातों को स्वतंत्रता पूर्वक दुनिया के सामने बयां कर सकता हैं।

आलेख लेखन के मुख्य अंग निम्न प्रकार है:- 

आलेख में मुख्य रूप से दो अंग प्रयुक्त होते हैं प्रथम अंग है भूमिका तथा इसका द्वितीय व महत्वपूर्ण अंग है विषय का प्रतिपादन । भूमिका के अंतर्गत शीर्षक का अनुरूपण किया जाता है जिसमें भूमिका के अनुरूप छोटे लिखने की बात कही जाती है तथा  विषय के प्रतिपादन में विषय का क्रमिक विकास तारतम्यता और क्रमबद्धता का ध्यान रखा जाता है तथा अंत में तुलनात्मक विश्लेषण करके निष्कर्ष निकाला जाता है ।

आलेख लिखने हेतु महत्वपूर्ण बाते :-

सर्वप्रथम आलेख लिखने से पहले अध्ययन, शोध कार्य, चिंतन-मनन और विश्लेषण होना अति आवश्यक है तथा उसके बाद आलेख की शुरुआत करनी चाहिए तथा ध्यान देने हेतु बात यह है कि आलेख का प्रकार संक्षिप्त होना चाहिए इसे हम निबंध का संक्षिप्त रूप भी कह सकते हैं, आलेख और निबंध में यही अंतर होता है कि आलेख में निजी विचार होते हैं तथा निबंध में ऐसा नहीं होता । तीसरी ध्यान रखने बात यह है कि विषय वस्तु से संबंधित आंकड़े या भ्रमण हेतु उदाहरण कहीं से नोट कर लें और आलेख लिखते समय उन्हें सही स्थान दें और इसमें वैचारिक और तकनीकी युक्त कौशल भाषा जिसमें विचारों और तथ्यों की स्पष्टता रहती है।

यह विचार श्रृंखलाबद्ध होने चाहिए और आलेख की भाषा सरल समझ में आ सकने वाली रोचक और आकर्षक होनी चाहिए वाक्य छोटे हो एक परिच्छेद में एक भाव व्यक्त हो, अंत में ध्यान रखने योग्य बात यह है कि आलेख का समाप्ति अंश निष्कर्ष परक होना चाहिए इन बातों का ध्यान रखते हुए आलेख की रचना होनी चाहिए।

अब हम जानते हैं कि आलेख और फीचर में क्या समानता होती है तथा क्या अंतर होते हैं:- 

फीचर किसी रोचक विषय पर मनोरंजक ढंग से लिखा गया विशिष्ट आलेख होता है यह मनोरंजन ढंग से तथ्यों को प्रस्तुत करने की कला है जबकि आलेख गंभीर अध्ययन पर आधारित प्रामाणिक रचना होती है, फीचर विषय से संबंधित अनुभूतियों पर आधारित विशिष्ट आलेख होता है जिसमें कल्पनाशीलता और सृजनात्मकता कौशल होनी चाहिए जबकि आलेख एक विषय पर तथ्यात्मक विश्लेषणात्मक अथवा विचारात्मक जानकारी होती है कल्पना का स्थान नहीं होता है।

आइए हम एक आलेख लिखते हैं जहां शीर्षक है:-

 ‘राष्ट्रीय एकता’ :- किसी देश को सही से चलाने के लिए तथा विकास और प्रगति के पथ पर अग्रसर होने के लिए राष्ट्रीय एकता सुनिश्चित होनी चाहिए बिना राष्ट्रीय एकता के देश खंडों में विभाजित हो जाएगा जाति धर्म क्षेत्र भाषा के आधार पर लोग एक दूसरे से भेदभाव करेंगे देश में आए दिन सांप्रदायिक दंगे होंगे, राष्ट्रीय एकता देश के लिए अति आवश्यक अंग है जो देश को सभी राज्यों के साथ जोड़ने का जरिया है।

भारत एक विशाल देश है। इसकी भौगोलिक और प्राकृतिक स्थिति ऐसी है कि इस एक देश में अनेक देशों की कल्पना को सहज रूप से किया जा सकता है। इस देश में 6 ऋतुओं का एक अद्भुत क्रम है। देश में एक ही समय में एक क्षेत्र में गर्मी का वतावरण होता है तो एक तरफ सर्दी का वातावरण होता है। एक क्षेत्र में हरियाली होती है तो दुसरे क्षेत्र में दूर-दूर तक रेती के अलावा और कुछ दिखाई नहीं देता है।

 अंग्रेजों ने भारत में एकछत्र राज्य करने के लिए सबसे पहले यहाँ की एकता पर प्रहार किया क्योंकि कोई भी शासक अपना प्रभुत्व जमाने के लिए जनता में एकता नहीं चाहता है। इसलिए अंग्रेजों ने फूट डालो राज करो की प्रबल नीति अपनाई जिसके कारण वे सैंकड़ों वर्षों तक भारत के सशक्त शासक बने रहे।

जिसका परिणाम यह हुआ कि भारत में धर्मों व जातियों तथा वर्गों के आधार पर कलह , दंगे भडकते रहते हैं। वे कभी किसी एक धर्म के लोगों को संरक्षण देते और दूसरों को तंग करते तो कभी दुसरे धर्मों के लोगों को प्रोत्साहित करते थे जिससे जनता परस्पर लडती रहे। फिर भारत के स्वतंत्र होने पर अंग्रेज भारत की अखंडता समाप्त करके ही गये थे।