May 17, 2018

दवाईओं पर विशेष चिन्ह कियो होते है ?

दवाईओं पर विशेष चिन्ह कियो होते है ?

दवाईओं पर विशेष चिन्ह कियो होते है ?

आपने कई बार देखा होगा की दवाईयों कुछ विशेष चिन्ह होते हे | जेसे की लाल हरी नीली लाइन या संक्षिप शब्दों में कुछ लिखा होता हे | और हर तरह की दवाई पर कुछ न कुछ निशान जरुर होता हे | जिसका उस दवाई की मात्र और किस की सलाह पर लेने हे इस बात से काफी गहरा संबंध होता हे | ये चिन्ह सरकार के मानक और दवा की प्रकति के आधार पर लगाये जाते हे | जो की कुछ स्तर तक अन्तराष्ट्रीय रूप में भी समान होते हे | या दुसरे शब्दों में कहे तो कुछ निशान अन्तराष्ट्रीय रूप में भी समान होते हे | कियोकी कई देश आपस में दवाओ का आयात निर्यात करते हे |

किस चिन्ह का क्या मतलब हे इसका विवरण इस प्रकार हे |

1)  किसी भी दवाई पर यदि लालाधारी का निशान होता हे इसका मतलब यह हे की | दवाई को बिना डॉक्टर के पेर्मिशन लिए न बेचा जा सकती हे, और ना ही इस्तेमाल किया जा सकता हे | ऐसी दवाये जीवन रक्षक दवाओ की श्रेणी में आती हे | इनका उपयोग गंभीर बीमारियों जेसे डेगू मलेरिया एड्स टीबी के इलाज के में किया जाता हे | और एंटीबायोटिक दवाओ के गलत इस्तेमाल को रोकने के लिए भी इस निशान का इस्तेमाल किया जाता हे |

2) Rx- निशान का मतलब होता हे की ये डॉक्टर दवारा लिखकर दी गई दवा हे | और केवल उसी मरीज को दी जा सकती हे जिसे उसने अपने Medical Prescription में लिख कर दी हो | मतलब बिना डॉक्टर के पर्चे के दवा नहीं दी जा सकती हे |

3) NRx- निशान का मतलब हे, की यहाँ एक ऐसी दवा हे | जिसे आप तभी बेच सकते हे जब इसे ऐसे डॉक्टर ने लिख कर दिया हो | जिसके पास नशीली दवाओ का लाइसेंस हो जेसे Neurologist Anesthesiologist Psychiatrist आदि | इन दवाओ का सेवन अपनी मर्जी से काम ज्यादा मात्रा एक निश्चित समय पर और समय अवधि तक ही किया जाता हे | यदि मात्रा और समयावधि में परिवर्तन करना होतो डॉक्टर का परामर्श जरुरी हे | इन दवाओ का इस्तेमाल दिमाग और तंत्रिका तंत्र से सम्बंधीत बीमारियों के इलाज में किया जाता हे।

4) XRx- निशान का मतलब हे की यहाँ दवा आप किसी ऐसे डॉक्टर को बेच सकते हो | जिसके पास नशीली दवाओ का लाइसेंस हो जेसे Neurologist Anesthesiologist Psychiatrist आदि | और इस दवा को डॉक्टर सीधे अपने मरीज को दे सकता हे | ये दवा आप सीधे तोर पर मेडिकल स्टोर से नहीं खरीद सकते भले ही फिर आप के पास डॉक्टर का पर्चा हो | ये दवाए अति संवेदनशील होती हे इसलिए इसे डॉक्टर मरीज की स्थिति का पता लगा कर अपनी देखरेख में ही मरीज को देता हे | वेसे भी इन दवाओ का उपयोग विशेष गंभीर परिस्थित में किया जाता हे |

➽ सम्बंधित पोस्ट 


निष्कर्ष- दवाओ पर दिए गए चिन्हों के विवरण से प्राम्भिक तोर पर ही यहाँ स्पष्ट हो जाता हे की दवा किस संदर्भ में दी जा रही हे और उसका उसका स्तर क्या हे | इसलिए दवाओ खरीद हो या इस्तेमाल काफी सावधानी से करनी चाहिए |

Apr 26, 2018

डॉक्टर Medical Prescription साफ शब्दों में  कियो नहीं लिखते ?

डॉक्टर Medical Prescription साफ शब्दों में कियो नहीं लिखते ?

आपने अधिकतर देखा होगा की जब भी आप किसी डॉक्टर के पास अपनी बीमारी का इलाज करवाने जाते हे | तो वो अपने पर्चे पर जो दवाओ का नाम लिखते हे, मतलब इलाज का जो Medical prescription हे वो साफ शब्दों में नहीं होता हे | उस दवाओ के नाम का पहला अक्षर ही capital Letter होता हे और बाकि सब Small Letter में होते हे | इस कारण हे की Medical Field में कम समय में बहुत से काम करने होते हे | और Study Time में भी कई सरे Test और Exam कम समय में देने होते हे | इसलिए जल्दी लिखने के कारण उनकी Writing साफ नहीं होती |

डॉक्टर Medical Prescription साफ शब्दों में  कियो नहीं लिखते ?

हालांकि medical Council of India (MCI) डॉक्टर्स स्पस्ट निर्देश दिए हे की वे इलाज़ का Medical Prescription Capital Letter में ही लिखे | और मरीज को भी ये अधिकार हे की वो डॉक्टर से बोल कर अपना Medical Prescription साफ और स्पस्ट शब्दों में लिखवा सकता हे | और ऐसा कई बार काम समय में ज्यादा मरीज देखने के कारण भी होता हे | और यह एक मानवीय स्वभाव भी की वो जो काम लगातार करता हे वो उसकी आदत बन जाता हे |

हलाकि यही भाषा medical Store वाले को आसानी से समझ आ जाती हे | इस यह कारण हे की उन होने दवाओ की जानकारी और उसके ज्ञान के बारे में अध्यन किया होता हे | तथा उनको दवाओ के Formula  भी मालूम होते हे | और उनको जानकारी होती हे की किस बीमारी में कोन सी दवा दी जाती हे | इसलिए medical Store वाले को दवा के नाम का पहला अक्षर देखकर ही पहचान लेते हे की दवा कोनसी हे |

इसमें सब से ज्यादा ध्यान देने वाली बात ये हे की दवाओ को Medical Store से लेते समय अपने डॉक्टर को जरुर दिखा लेनी चाहिए | कियोकी कई बार दवाओ की कंपनी बदला जाती हे | कहने का मतलब यहाँ हे की एक ही बीमारी की दवा कई कंपनीयां बनती हे | जिससे दवा की गुणवत्ता और प्रकति में काफी अंतर आ जाता हे | ऐसा इसलिए होता हे या तो दवा बनाने का पूरा Formula अलग हो या एक दो Formula अलग हो या उन के Formula की मात्रा भी कम ज्यादा हो सकती हे | एक कारण और भी हे जो कई Medical Store वाले करते हे |

उनको जिस कंपनी की दवा पर ज्यादा लाभ होता हे उसकी पहले देते हे | इसलिए आप ने देखा होगा की कई बार लोगो को दवा असर नही करती या उनको पूरा लाभ नहीं होता हे | इसका एक और प्रमुख कारण हे की बाजार में नकली दवा भी धड्ले से बिक रही हे | जिसे खाकर कई लोगो की जान भी चली जाती हे | इसलिय आप Medical Store से दवा लेने से पहले अपने डॉक्टर को दिखा ले और विचार विमर्श करने के बाद ही दवा ले | और दवा हमेशा Registered Medical Store से ही ले |   

Apr 25, 2018

GST में शामिल राज्य सरकार के कर

GST में शामिल राज्य सरकार के कर

GST rajya sarkar tax, gst tax sarkar, gst sarkar

GST लागू होने पर राज्य के जिन अप्रत्यक्ष करो को हटाया गया हे वो इस प्रकार हे:-

राज्य सरकार के अप्रत्यक्ष कर :-

1. राज्यीय वेट ( State Vat ) जिन राज्यों में वेट लागु हे उन राज्य में वस्तुओ के क्रय विक्रय पर लगने वाले टैक्स को   (Value added Tax) राज्यीय वेट कहते हे | यह कर प्रत्येक स्तर पर विक्रय बड़ने वाले मूल्य पर लागत हे इसलिए इसे (Value added Tax) कहते हे | इस से सरकार को ज्यादा राजस्व भी प्राप्त होता हे |

2. विक्रय कर ( Sales Tax ) जिन राज्यों में वेट लागु नहीं हे उन राज्यों में वस्तुओ के विक्रय पर (Sales tax) लगता हे जिसे विक्रय कर भी कहते हे | इस कर की गणना वैट के नियमो से अलग होती हे तथा इसमें रिफंड के प्रावधान भी वेट से अलग होते | हर राज्य पर निर्भर करता हे की वो अपने राजस्व को देखकर ही वेट या विक्रय कर को लागु करे ये अधिकार केंद्र सरकार ने राज्यों को दिए हे | कियोकी हर राज्य की आर्थिक और भोगोलिक स्थिति अलग होती हे   

3. मनोरंजन कर ( Entertainment Tax ) यह कर सभी प्रकार के मनोरंजन और उनके माध्यमओ लगाया जाता हे जेसे फिल्म, टॉकीज, पीवीआर, मल्टीप्लेक्स, फनक्लब, गेमिंग, पार्क, आदि।

4. प्रवेश शुल्क ( Entry Tax ) जब कोई भी वस्तु किसी भी ट्रांसपोर्ट के माध्यम से एक राज्य से दुसरे राज्य की सीमा   में प्रवेश करती तब यह कर लगाया जाता हे | इस कर की दर अधिकतर राज्यों में 1% हे |

5. लाटरी कर ( Lottery Tax ) यह कर सभी प्रकार की इनामी योजना एवं और लाटरी पर लगाया जाता हे |

6. विलासिता कर ( Luxury Tax ) यहाँ कर सभी प्रकार की विलासिता की वस्तुओ और सेवाओ पर लगाया जाता हे |

7. क्रय कर ( Purchase Tax ) जिन राज्यों (VAT) वेट लागु नही हे | उन राज्यों में वस्तुओ के क्रय पर लगने वाले   कर को (Purchase Tax) या क्रय कर भी कहते हे | इस कर की दर हर राज्य के हिसाब से अलग अलग होती हे और वस्तुओ एवं सेवाओ की मांग के आधार पर होती हे | इस कर की गणना वैट के नियमो से अलग होती हे तथा इसमें रिफंड के प्रावधान भी वेट से अलग होते | हर राज्य पर निर्भर करता हे की वो अपने राजस्व को देखकर ही वेट या क्रय कर को लागु करे ये अधिकार केंद्र सरकार ने राज्यों को दिए हे | कियोकी हर राज्य की आर्थिक और भोगोलिक स्थिति अलग होती हे

8. विज्ञापन कर ( Advertisement Tax ) यह कर सभी प्रकार की वस्तुओ और सेवाओ के विज्ञापन पर लगाया जाता हे जो की Electronic Media या Print Media या होर्डिग के माध्यम से दिखाए जाते हे

9. राज्यीय सरचार्ज और सेस ( State Surcharge or cess ) यह कर राज्य सरकार अपने वितीय घाटे और विशेष कार्य के लिए और समाज में आमिर गरीब के अंतर को नियंत्रित रखने के लिए लगाती हे | इसको लागु करने और हटाने का पूरा अधिकार राज्य सरकार के पास होता हे | इस कर की दर राज्य सरकार अपने हिसाब से तय करती हे और इसकी आय पर पूर्ण अधिकार राज्य सरकार का होता हे | इस कर को हर राज्य अपनी आर्थिक स्थिति के हिसाब से काम या ज्यादा रखता हे |

संबंधित पोस्ट 


किन्तु GST लागु होने पर इन सभी राज्य सरकार के करो को स्थाई तोर पर समाप्त कर दिया गया हे | ये केवल राज्य सरकार के करो का विवरण हे | जो GST  लागु होने पर पूर्ण से समाप्त कर दिए गए हे। 

Apr 22, 2018

जानिए Bitcoin Mining के बारे में ? बिटकॉइन मीनिंग हिंदी में।

जानिए Bitcoin Mining के बारे में ? बिटकॉइन मीनिंग हिंदी में।

Bitcoin कैसे बनते है? बिटकॉइन माइनिंग क्या होता है? और बिटकॉइन से सम्बंधित टेक्निकल बातें।

आज की दुनिया में bitcoin ने अपनी अलग ही पहचान बना ली है, लेकिन आज भी ऐसे बहुत कम लोग हैं जो actually जानते हैं कि bitcoin आखिर है क्या? देखा जाये तो आम जनता अभी भी bitcoin से बहुत परे है। ये situation कुछ ऐसी ही है, जैसे जब Albert Einstein ने "theory of relativity" को invent किया। सारा जहाँ समझ रहा था कि कुछ बड़ा हुआ है, लेकिन क्या, उसका सार कोई नहीं जानता।  Bitcoins भी ऐसा ही कुछ है। हाँ" ये पिछले कुछ सालों में बहुत Famous हो गया है, लेकिन अभी भी काफी लोग bitcoins के बारे में बहुत कम जानते हैं.

bitcoin mining, vitual currency, bitcoin mining in hindi

Bitcoins को समझने के लिए internet पर बहुत सी Guides Available हैं जहाँ से bitcoins के बारे में सारी जानकारी मिल जाएगी. इस article में हम बात करेंगे bitcoin mining के बारे में. यह एक ऐसा term है जो bitcoin के साथ हमेशा जुड़ा ही पाया जाता है। तो चलिए जानते हैं इसके बारे में details में।

क्या है Bitcoin Mining?

Bitcoin Mining एक ऐसी process है जिसकी मदद से Bitcoin Transactions को Public Ledger में Update किया जाता है। जिस तरह हम हर कुछ समय के बाद Banks जाकर हमारी Passbooks में हमारे Transactions को Document/Print करते हैं, ठीक उसी तरह, Bitcoins के भी Transactions आप Online देख सकते हैं। और यही क्रिया bitcoin mining कहलाती है। इस Process में bitcoins बनाने वाली Blockchain से interaction किया जाता है। जो लोग इस computationally complicated activities में part करना चाहते हैं, उन्हें bitcoin tokens से reward किया जाता है.

Blockchain क्या है?

कोई भी Information जो पुराने Bitcoin Transaction से Associated है, उसे Block कहा जाता है. Virtual currency/ Cryptocurrency की दुनिया में किसी भी पुराने bitcoins Transactions के Ledger को blockchain कहा जाता है.  आसान शब्दो में कहूँ तो आपकी passbook जिसमे आपके पुराने सारे transactions का लेखा जोखा है, वह bloackchain कहलाएगी और इस passbook पर लिखा हुआ हर transaction block कहलायेगा. सीधी बात करू तो bloackchain एक ऐसी क्रिया है जिससे bitcoin network में Transactions Record किये जाते हैं।

ऐसे लोग जो Software Field में महारत हासिल कर चुके हैं, केवल वही इस Mining क्रिया यानि कि bitcoin Transactions Recording की क्रिया को कर सकते हैं। ये जो expert लोग होते हैं, जो कि mining करते हैं, उन्हें bitcoin की दुनिया में Miner कहा जाता है। और मैं ये आपको बता दूँ कि इस काम के बदले अच्छी खासी fees मिलती है, और साथ ही, इस process में बने bitcoins भी उन्ही miners को मिलते हैं।

Mining क्यों की जाती है?

चूँकि Bitcoin आजकल बहुत ही Iimportant हो गया है, इस Bitcoin nodes को एक fishing या छेड़छाड़ के बिना safe allowance देना बहुत ज़रूरी हो गया है, Mining का main motive यही है. Mining  की मदद से bitcoins system में launch किये जाते हैं. और जैसे कि मैंने आपको बताया, इस Mining की process के बदले उन्हें new bitcoins की subsidy भी प्राप्त होती है. आजकल तो market में कई Bitcoin Mining calculators भी उपलब्ध हैं जो आपसे कुछ जानकारी लेकर ये बता देते हैं कि कितने bitcoins इस क्रिया से generate होंगे।

Bitcoin Mining एक Decentralized तरीके से bitcoins को promote करता है, इसके अलावा ये लोगों को system की safety पर ध्यान देने के लिए भी encourage करता है. जिस तरह हम Mining की मदद से लोग Gold, Diamond, आदि ज़मीन से निकलते है, ठीक उसी तरह, Bitcoin भी mine किया जाता है, इसके लिए भी hardwork लगता है, और यह process भी बहुत धीरे धीरे होता है।

लेकिन दोस्तों, ऐसा नहीं है कि bitcoins प्राप्त करने का यह एकमात्र तरीका है. अगर आप bitcoins चाहते हैं तो आप इन्हे किसी product/service के बदले में, या currency exchange में या online games में भी पा सकते हैं।

क्या आप जानते हैं कि bitcoins इस तरह से design किये गए हैं कि एक बार में 21 million से ज्यादा bitcoins exist नहीं कर सकते, और इसीलिए Bitcoin Mining की process इतनी complicated है और एक specific  resource द्वारा ही process की जा सकती है.  अगर ये process इतनी complicated नहीं होगी तो ये संख्या जल्दी ही इस limit से कई आगे बढ़ जाएगी क्यूंकि अभी ही around 16 million bitcoins already उपयोग में हैं. किसी भी block की authenticity check  करनी हो तो proof of work का उपयोग किया जाता है. यह proof of work हर transaction में दूसरा Bitcoin node check करता है. इस checking process के लिए Bitcoin एक function का उपयोग करता है, जिसे Hashcash कहा जाता है।

POW/Proof of work क्या है?

दोस्तों, POW या Proof of work ये ensure करता है कि कोई भी miner cheat ना करे।

चूंकि Bitcoin network में कोई भी real world identity connect नहीं होती, miners को खुद के लिए ही new bitcoins generate करने से रोकने के लिए कोई process चाहिए होगी.  चलिए, आपको इसे एक example की मदद से समझाते हैं. समझिये आप कुछ लोगों के साथ हैं और आप सभी को एक math problem का answer guess करना है और कोई भी नहीं जाता कि कौन सबसे पहले सही जवाब देगा. जो भी सबसे पहले सही जवाब दे देगा, उसे reward(इनाम) मिल जायेगा, लेकिन बाकि दुसरे miners को इस transactional record को approve करना पड़ेगा। अगर बाकि miners को ये लगता है कि कोई miner fraud transaction कर रहा है, तो वे लोग इसे accept करने से मना कर सकता हैं।

यही वजह है कि new block creation की process energy sensitive होती है ताकि हर new block create होते वक़्त कुछ cost involve हो. इस तरीके से उन miners को रोका जाता है जो बहुत सारे fraud blocks ये सोच कर create कर देते हैं कि शायद वो accept हो जाएँ और reward पा लें।

▶️ Virtual Currency- आभासी मुद्रा के बारे में अधिक जानकारी के लिए इन्हे भी पढ़े !

Wrapping it up!

तो दोस्तों, आशा है कि इस article ने आपकी सभी queries को solve किया. अगर फिर भी आपको कोई doubts हो, तो comments में ज़रूर share करें।
सुधा अरोड़ा [sudha arora]

सुधा अरोड़ा [sudha arora]

जीवन परिचय

जन्म:- सुधा अरोड़ा का जन्म लाहौर (पाकिस्तान) में सन् 1948 में हुआ | उनकी उच्च शिक्षा कलकत्ता विश्वविधालय से हुई | इसी विश्वविधालय के दो कॉलेजों में उन्होंने सन् 1969 से 1971 तक अध्यापन कार्य किया | सुधा अरोड़ा कथा साहित्यक में एक चिर्चित नाम है |

रचनाएँ:- इनके अनेक कहानी संग्रह प्रकाशित हैं- काला शुक्रवार ‘बगैर तराशे हुए’, ‘युद्ध विराम’, ‘महानगर की भौतिकी’, ‘काँसे का गिलास’, तथा ‘औरत की कहानी’ (संपादित) आदि | उनकी कहानियाँ लगभग सभी भारतीय भाषा के अलावा कई विदेशी भाषओं में अनुदित है | उन्होंने भारतीय महिलाओ कलाकारोंके आत्मकथ्यों के दो संकलन ‘दहलीज को लांघते हुए’ तथा ‘पंखोकी उड़ान’ तैयार किया हैं |


          लेखन के स्तर पर पत्र-पत्रिकाओं में भी उनकी सक्रियता बनी हुई हैं | परीक्षा ‘सारिका’ में ‘आम आदमी जिन्दा सवाल’ और राष्ट्रीय दैनिक ‘जनसत्ता’ में महिलाओं से सम्बंधित मुद्दे पर उनका साप्ताहिक स्तंभ ‘वामा’ बहुचर्चित रहा है | महिला संगठनो के सामाजिक कार्यों के प्रति उनकी सक्रियता एवं समर्थन जारी है | महिलाओं पर ही केन्द्रित ‘औरत की दुनिया बनाम दुनिया की औरत’ लेखो का संग्रह शिग्रघ प्रकाश्य है | ‘उत्तर प्रदेश हिन्दी संसथान’ द्वारा उन्हें खास परुस्कार से सम्मानित किया गया |


सहित्यिक विशेषताएँ:- सुधा अरोड़ा मूलतः कथाकार हैं | उनके यहाँ स्त्री विमर्श का रूप आक्रामक न होकर सहज तथा संयत है | सामाजिक और मानवीय सरोकारों को वे दिलचस्प तरीके से विश्लेषित करतीं है | ए उधाहरण क्व माध्यम से वे अपनी बातो को पुष्ट करती हैं | इन्होने खाड़ी बोली में अभिवयक्ति की हैं | ये मिश्रित सब्दावाली का प्रयोग करती हैं |         
तुलसीदास [Tulsidas biography in hindi]

तुलसीदास [Tulsidas biography in hindi]



जीवन परिचय


जन्म:- तुलसीदास का जन्म सन् 1532 में बाँदा जिले के राजापुर गाँव में हुआ था | कुछ विद्वान उनका जन्म स्थान सोरों को भी मानते हैं | तुलसीदास का बचपन घोर गरीबी में बिता | बचपन में ही उनके माता–पिता बिछोह हो गये थे और भिक्षाटन व्दारा वे अपने जीवन-यापन कररने को विवास हुए | कहते है गुरु नरहरिदास की कृपा से उन्हें राम-भक्ति का मार्ग मिला | रत्नावली से उनका विवाह होना तथा उसकी बातों से प्रभावित हो कर तुलसीदास का गृह्त्याग करने की कथा प्रसिद हैं, किन्तु इसका पर्याप्त प्रमाण नही मिलता | गृहस्त जीवन से विरक्त होने के बाद वे कशी,चित्रकुत अयोध्या आदि तीर्थों में भ्रम करते रहे | सन् 1574 में अयोध्या में उन्होंने रामचरितमानस की रचना प्राम्भ की, जिसका कुछ अंश बाद में उन्होंने कशी में लिखा | तत्पश्चात वे कशी में रहने लगे थे और यहीं उनका निधन हुआ |


साहित्यिक विशेषता:- तुलसीदास लोकमंगल की साधना के कवि हैं | उन्हें समन्वय का कवि भी कहा जाता हैं | तुलसीदास का भावजगत धार्मिक, सामाजिक और संस्कृतिक दृष्टी  से बहुत व्यापक हैं | मानव  प्राकृति और जीवन-जगत संबंधी गहरी अंतदृष्टी और व्यापक जीवनानुभव के कारण ही वे रामचरितमानस में लोक जीवन के विभिन्न पक्षों का उद्घाटन करने में सफल हो सके | मानस में उनके ह्रदय की विशालता, भाव प्रसार की शक्ति तथा मर्मस्पर्शी स्थल की पहचान की क्षमता पूरे उत्कर्ष के साथ व्याक्त हुई हैं | तुलसीदास को मानस के जिन प्रंसगो को अभिव्यक्त करने का अवसर नहीं मिला उनको उन्होंने गीतावली, कवितावली में व्यक्त किआ हैं | विनय पत्रिका में विनय और आत्म-निवेदन के पद हैं | इस प्रकार तुलसी के काव्य में आत्मबोध और विश्वबोध का अदितीय समनव्य हुआ हैं |

तुलसीदास के रचनाओ में काव्यरूप, भाव, विचार, छंद-विवेचन और भाषा की विविधता मिलती है | रामचरितमानस को हिन्दी का सर्वश्रेस्ट महाकाव्य माना जाता हैं | इसकी रचना मुख्यता दोहा और चोपाई, छंद में हुई हैं | इसकी भाषा अवधि है |

प्रमुख रचनाए:- गीतावली, कृष्ण गीतावली तथा विनय पत्रिका पद्शैली की रचनाए हैं तो वहीँ दोहावली स्फुट दोहों का संकलन है | कवितावली कवित और सवैया छंद में में रचित एक उत्क्रिस्ट रचना है|


भाषा शैली:- अवधि और ब्रज दोनों ही भाषाओ पर तुलसी का साधारण अधिकार था | तुलसीकृत बारह कृतियाँ प्रमाणिक मानी जाती हैं |