Oct 4, 2018

गणेशोत्सव पर निबंध, गणेश चतुर्थी पर निबंध

गणेशोत्सव पर निबंध, गणेश चतुर्थी पर निबंध

गणेशोत्सव पर निबंध, गणेश चतुर्थी पर निबंध
गणेशोत्सव, गणेश चतुर्थी। 

गणेशोत्सव पर निबंध, गणेश चतुर्थी पर निबंध, गणेश उत्सव निबंध, गणेश उत्सव का महत्व।

 प्रस्तावना: गणेश चतुर्थी/उत्सव हिंदुओं का प्रमुख त्योहार है। इसे बहुत ही धूमधाम से मनाया जाता है इसे घर के सभी सदस्य ही बडी खुशियों के साथ मनाते हैं। हमारे हिंदू धर्म में हर कार्य से पहले गणेश जी को सर्व प्रथम पूजा जाता है। इस त्योहार को ना केवल हिंदू बल्कि अन्य धर्म के लोग भी बड़े उत्साह के साथ मनाते हैं। पुराणों के अनुसार गणेश चतुर्थी के दिन गणेश जी का जन्म हुआ था। यह त्योहार खासतौर से महाराष्ट्र में मनाया जाता है। परंतु अब यह भारत के सभी राज्य में बहुत ही हर्षोल्लास और धूमधाम के साथ मनाया जाता है।

गणेश चतुर्थी/उत्सव कब मनाया जाता है? गणेश चतुर्थी शिव पुराण में भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को गणेश उत्सव मनाया जाता है। जबकि गणेश पुराण के अनुसार यह गणेशअवतार भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी चतुर्दशी को हुआ था। गण+पति= गणपति। संस्कृतकोशानुसार गण अर्थात पवित्रक । पति अर्थात  स्वामी गणपति अर्थात पवित्र के स्वामी कहा जाता है और इस दिन को बड़े धूमधाम से गणेश महोत्सव के रूप में मनाया जाता है।

गणेश चतुर्थी/उत्सव की शुरुआत

1983 में से लोकमान्य तिलक ने  सामाजिक कार्यकर्ता भारतीय राष्ट्रवादी तथा स्वतंत्रता सेनानी के द्वारा इस
शुरुआत की उस समय अंग्रेजी शासन से भारतीयों को बचाने के लिए एक गणेश पूजा की प्रथा बनाई उत्सव को एक दंता, असीम शक्तियों की भगवान, असीम शक्तियों के भगवान, हरम्बा, विघ्नहर्ता लंबोदरा विनायक,  भगवानों की बुद्धि, स्मृति तथा संपत्ति के भगवान आदि के नाम से जाना जाता है। ओर इस उत्सव की शुरआत हुई।

गणेश उत्सव की एक प्रसिद्धकथानुसार 
देवदत्त पटनायक के मुताबिक गणेश के जन्म की कहानी कुछ इस प्रकार । वह कहते है कि एक बार माता पार्वती ने घर में स्नान करते समय अपने शरीर के मेल से एक पुतला बनवाया था। उसको पुतले को सजीव करके मां पार्वती ने उनका गणेश नाम रख दिया ओर उसे मुख्य द्वार जाकर पहरा देने के लिए कहा। पार्वती जी ने गणेश जी से कहा कि पुत्र देखते रहना जब तक मैं स्नान ना कर लूं तब तक कोई भी भीतर ना आ सके। उस समय भगवान शिव जी भोगवती जगह पर गए हुए थे। जब वो वहां से वापस आए तो घर में जाने लगे तब गणेश जी ने अंदर उन्हें अंदर  जाने से रोका इस शिव जी को गुस्सा आ गया और उन्होंने गणेश जी का सिर धड़ से अलग कर दिया। जब पार्वती पार्वती मां को पता चला।

तो वो विलाप करने लगी और गणेश जी को  फिर से जीवित करने के लिए कहने लगी। तब शिव जी ने हाथी के बच्चे का मुँह काटकर गणेश जी के धड़ पर लगा दिया और उन्हें जीवित भी कर दिया। और भाद्रपक्ष शुक्ल चतुर्थी के दिन घाटी इस घटना को गणेश जी के नाम कर दिया और कहा कि जो भी व्यक्ति या देवीदेवता जब तक सर्वप्रथम गणेश जी को नही पूजेंगे तब तक व्यक्ति की कोई भी पूजा सफल नही कहलाएगी। तब उसके बाद से ही गणेश चतुर्थी पूजा की शुरुआत हुई। ओर सभी व्यक्ति इन की स्थापना करके सर्वप्रथम पूजनीय गणेश जी से कामना करते है। कि हमारे सभी कार्य सफल और शुभ हो।और हमे खुशया प्राप्त हो।

गणेश महोत्सव, गणेशोत्सव,  गणेश चतुर्थी
हमारे देश में गणेश महोत्सव का एक पारंपरिक को सांस्कृतिक त्योहार है। इस महोत्सव का सबसे ज्यादा असर युवा वर्ग को बच्चों में देखने को मिलता है ।इस त्यौहार को समारोह के बजाय समुदाय की भागीदारी के माध्यम से मनाया जाता है ।इस समारोह में पंडाल तैयार करते हैं । समुदाय के लोग पूजा करने के लिए गणेश जी की प्रतिमा लाते हैं वह दूसरों की तुलना में अपने पंडाल को ज्यादा सुंदर दिखाने के लिए जो उनसे बनता है वो ये करते है। अपनी मूर्ति को सुंदर दिखाने के लिए सुंदर फूल, माला ,बिजली की रोशनी आदि का उपयोग करते हैं ।और तरह-तरह से पंडाल को सजाते हैं पंडित जी लाल सफेद धोती के साथ मूर्ति की स्थापना मंत्र उच्चारण के साथ करते हैं ।फिर प्रसाद आदि चडाते है। जिसमें गणेश जी का प्रिय लड्डू ओर मोदक तो जरूर शामिल रहता है।

इस प्रकार पूरे दस दिन तक यह समारोह चलता है। ओर  अनंत चतुर्थी को गणेश जी की पूजा अर्चना करने के बाद सभी सदस्य मिलकर मूर्ति का विसर्जन करते हैं। और उनसे पार्थना करते है कि। है गणपति महाराज अगले बरस तू जल्दी आना और हमारे सभी दुखो ओर दर्द को हर कर अपने साथ ले जाना।

उपसंहार
इस प्रकार यह गणेश उत्सव हम हिंदुओं का अति महत्वपूर्ण और हर्षोल्लास का त्योहार है जिसमें हम भगवान से प्रार्थना करते हैं कि।

         वक्रतुंड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ
           निर्विघ्नम कुरु देव शुभ कार्यषु सर्वदा।

मतलब है हाथी के जैसे विशालकाय जिसका तेज सूर्य के सहस्त्र किरणों के समान है। बिना विघ्न के मेरा कार्य पूर्ण हो और सदा  ही मेरे लिए शुभ हो। ओर ऐसी कामना करते हैं और उनसे विनती करते हैं कि धर्मों में भेदभाव मिटाकर हम हमेशा ही हम इस उत्सव को खुशी के साथ मनाएं और अगले बरस फिर आपके आगमन की तैयारी करें।

#सम्बंधित:Hindi Essay, हिंदी निबंध। 

Sep 24, 2018

Bitcoin कैसे बनते है, बिटकॉइन माइनिंग क्या होता है? Bitcoin mining in Hindi.

Bitcoin कैसे बनते है, बिटकॉइन माइनिंग क्या होता है? Bitcoin mining in Hindi.

Bitcoin क्या है, कैसे बनते है? बिटकॉइन माइनिंग क्या होता है? और बिटकॉइन mining से सम्बंधित technical जानकारी ।

दुनिया में Bitcoin ने अपनी अलग ही पहचान बना ली है, लेकिन आज भी ऐसे बहुत कम लोग हैं जो actually जानते हैं कि Bitcoin आखिर है क्या? देखा जाये तो आम जनता अभी भी bitcoin से बहुत परे है। ये situation कुछ ऐसी ही है, जैसे जब Albert Einstein ने "theory of relativity" को invent किया। सारा जहाँ समझ रहा था कि कुछ बड़ा हुआ है, लेकिन क्या, उसका सार कोई नहीं जानता।  Bitcoins भी ऐसा ही कुछ है। हाँ" ये पिछले कुछ सालों में बहुत Famous हो गया है, लेकिन अभी भी काफी लोग bitcoins के बारे में बहुत कम जानते हैं.

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Bitcoins को समझने के लिए internet पर बहुत सी Guides Available हैं जहाँ से bitcoins के बारे में सारी जानकारी मिल जाएगी. इस article में हम बात करेंगे bitcoin mining के बारे में. यह एक ऐसा term है जो bitcoin के साथ हमेशा जुड़ा ही पाया जाता है। तो चलिए जानते हैं इसके बारे में details में।

क्या है Bitcoin Mining?

Bitcoin Mining एक ऐसी process है जिसकी मदद से Bitcoin Transactions को Public Ledger में Update किया जाता है। जिस तरह हम हर कुछ समय के बाद Banks जाकर हमारी Passbooks में हमारे Transactions को Document/Print करते हैं, ठीक उसी तरह, Bitcoins के भी Transactions आप Online देख सकते हैं। और यही क्रिया bitcoin mining कहलाती है। इस Process में bitcoins बनाने वाली Blockchain से interaction किया जाता है। जो लोग इस computationally complicated activities में part करना चाहते हैं, उन्हें bitcoin tokens से reward किया जाता है.

Blockchain क्या है?

कोई भी Information जो पुराने Bitcoin Transaction से Associated है, उसे Block कहा जाता है. Virtual currency/ Cryptocurrency की दुनिया में किसी भी पुराने bitcoins Transactions के Ledger को blockchain कहा जाता है.  आसान शब्दो में कहूँ तो आपकी passbook जिसमे आपके पुराने सारे transactions का लेखा जोखा है, वह bloackchain कहलाएगी और इस passbook पर लिखा हुआ हर transaction block कहलायेगा. सीधी बात करू तो bloackchain एक ऐसी क्रिया है जिससे bitcoin network में Transactions Record किये जाते हैं।

ऐसे लोग जो Software Field में महारत हासिल कर चुके हैं, केवल वही इस Mining क्रिया यानि कि bitcoin Transactions Recording की क्रिया को कर सकते हैं। ये जो expert लोग होते हैं, जो कि mining करते हैं, उन्हें bitcoin की दुनिया में Miner कहा जाता है। और मैं ये आपको बता दूँ कि इस काम के बदले अच्छी खासी fees मिलती है, और साथ ही, इस process में बने bitcoins भी उन्ही miners को मिलते हैं।

Mining क्यों की जाती है?

चूँकि Bitcoin आजकल बहुत ही Iimportant हो गया है, इस Bitcoin nodes को एक fishing या छेड़छाड़ के बिना safe allowance देना बहुत ज़रूरी हो गया है, Mining का main motive यही है. Mining  की मदद से bitcoins system में launch किये जाते हैं. और जैसे कि मैंने आपको बताया, इस Mining की process के बदले उन्हें new bitcoins की subsidy भी प्राप्त होती है. आजकल तो market में कई Bitcoin Mining calculators भी उपलब्ध हैं जो आपसे कुछ जानकारी लेकर ये बता देते हैं कि कितने bitcoins इस क्रिया से generate होंगे।

Bitcoin Mining एक Decentralized तरीके से bitcoins को promote करता है, इसके अलावा ये लोगों को system की safety पर ध्यान देने के लिए भी encourage करता है. जिस तरह हम Mining की मदद से लोग Gold, Diamond, आदि ज़मीन से निकलते है, ठीक उसी तरह, Bitcoin भी mine किया जाता है, इसके लिए भी hardwork लगता है, और यह process भी बहुत धीरे धीरे होता है।

लेकिन दोस्तों, ऐसा नहीं है कि bitcoins प्राप्त करने का यह एकमात्र तरीका है. अगर आप bitcoins चाहते हैं तो आप इन्हे किसी product/service के बदले में, या currency exchange में या online games में भी पा सकते हैं।

क्या आप जानते हैं कि bitcoins इस तरह से design किये गए हैं कि एक बार में 21 million से ज्यादा bitcoins exist नहीं कर सकते, और इसीलिए Bitcoin Mining की process इतनी complicated है और एक specific  resource द्वारा ही process की जा सकती है.  अगर ये process इतनी complicated नहीं होगी तो ये संख्या जल्दी ही इस limit से कई आगे बढ़ जाएगी क्यूंकि अभी ही around 16 million bitcoins already उपयोग में हैं. किसी भी block की authenticity check  करनी हो तो proof of work का उपयोग किया जाता है. यह proof of work हर transaction में दूसरा Bitcoin node check करता है. इस checking process के लिए Bitcoin एक function का उपयोग करता है, जिसे Hashcash कहा जाता है।

POW/Proof of work क्या है?

दोस्तों, POW या Proof of work ये ensure करता है कि कोई भी miner cheat ना करे।

चूंकि Bitcoin network में कोई भी real world identity connect नहीं होती, miners को खुद के लिए ही new bitcoins generate करने से रोकने के लिए कोई process चाहिए होगी.  चलिए, आपको इसे एक example की मदद से समझाते हैं. समझिये आप कुछ लोगों के साथ हैं और आप सभी को एक math problem का answer guess करना है और कोई भी नहीं जाता कि कौन सबसे पहले सही जवाब देगा. जो भी सबसे पहले सही जवाब दे देगा, उसे reward(इनाम) मिल जायेगा, लेकिन बाकि दुसरे miners को इस transactional record को approve करना पड़ेगा। अगर बाकि miners को ये लगता है कि कोई miner fraud transaction कर रहा है, तो वे लोग इसे accept करने से मना कर सकता हैं।

यही वजह है कि new block creation की process energy sensitive होती है ताकि हर new block create होते वक़्त कुछ cost involve हो. इस तरीके से उन miners को रोका जाता है जो बहुत सारे fraud blocks ये सोच कर create कर देते हैं कि शायद वो accept हो जाएँ और reward पा लें।

▶️ Virtual Currency- आभासी मुद्रा के बारे में अधिक जानकारी के लिए इन्हे भी पढ़े !

Wrapping it up!

तो दोस्तों, आशा है कि इस article ने आपकी सभी queries को solve किया. अगर फिर भी आपको कोई doubts हो, तो comments में ज़रूर share करें।

Sep 23, 2018

महात्मा गांधी पर निबंध, मोहनदास करमचंद गाँधी पर हिंदी निबंध।

महात्मा गांधी पर निबंध, मोहनदास करमचंद गाँधी पर हिंदी निबंध।

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Mahatma Gandhi (Mohandas Kramchand Gandhi ) Hindi essay

महात्मा गांधी,  मोहनदास करमचंद गाँधी- पर निबंध 

प्रस्तावना: महात्मा गांधी(मोहनदास करमचंद गाँधी) का नाम हमारे देश में कौन नहीं जानता उन्हें हम राष्ट्रपिता और बापु के नाम से भी जानते हैं महात्मा गांधी  भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के प्रमुख नेता थे, भारत में कई प्रकार की स्वतंत्रता सेनानी हुये वह भी दो तरह के होते थे, पहला वह जो अंग्रेजों द्वारा किए गए अत्याचारों का जवाब देते थे जैसे सरदार भगत सिंह, चंद्रशेखर आजाद आदि, दूसरे तरह के सेनानी जो खूनी मंजर के बजाय शांति की राह पर चलना पसंद करते थे और उनमें सबसे प्रमुख नाम महात्मा गांधी जी का आता है जो सत्य अहिंसा के पुजारी थे इसलिए इनको महात्मा गांधी के नाम से हम सब जानते हैं।

गांधीजी का पूरा नाम और जन्म: महात्मा गांधी जी का पूरा नाम मोहनदास करमचंद गांधी था उनका जन्म 2 अक्टूबर 1869 में पोरबंदर काठियावाड़ नाम के  स्थान पर हुआ था, जो कि गुजरात में है।

महात्मा गांधी जी का परिवार: महात्मा गांधी जी के पिता का नाम करमचंद गांधी था। यह राजकोट के दीवान थे माता का नाम पुतलीबाई था जो कि धार्मिक विचारों वाले थीं महात्मा गांधी अपने परिवार में सबसे छोटे थे उन्से एक बड़ी बहन और दो बड़े भाई थे, रलियत ( बहन) (लक्ष्मीदास नंद,कुंवरबेन  ) भाई कृष्णदास( गंगा) भाई, इनकी पत्नी का नाम कस्तूरबा गांधी था महात्मा गांधी जी के बेटे का नाम हरिलाल गांधी, मणिलाल गांधी, रामदास गांधी, देवदास गांधी, उनके चार बेटे थे जिनमें १३ पोते-पोतिया थे, गोपाल कृष्ण गांधी जी भी महात्मा गांधी जी के पोते थे जो कि 2004 से 2009 तक पश्चिम बंगाल के राज्यपाल रहे थे 2017 में उपराष्ट्रपति के चुनाव में चर्चा में रहे।

महात्मा गांधी जी की शिक्षा:- महात्मा गांधी जी की प्रारंभिक शिक्षा राजकोट में हुई थी 1881 में उन्होंने हाई स्कूल में प्रवेश लिया 1887 में गांधी जी ने मैट्रिक की शिक्षा प्राप्त की, भाव सागर के रामलदास कॉलेज में उन्होंने कॉलेज की पढ़ाई की परंतु परिवार वालों के कहने पर उन्हें अपनी शेष पढ़ाई पूरी करने के लिए इंग्लैंड जाना पड़ा उन्होंने अपनी वकालत की पढ़ाई इंग्लैंड पूरी की, उनका मानना था कि मेरे भारत देश में एक भी व्यक्ति अशिक्षित ना रहे शिक्षा को बहुत महत्व देते थे।

महात्मा गांधी जी का भारत वापस आना:- सन 1916 में महात्मा गांधीजी वकालत की शिक्षा ग्रहण करके भारत लौटे और अपने कदम इन्होने आजादी के लिए बढ़ाएं और 1920 में कांग्रेस के लीडर बाल गंगाधर तिलक की मृत्यु के बाद कांग्रेस  के मार्गदर्शक  बने, प्रथम विश्व युद्ध जो कि 1914-1919 में हुआ था तब गांधी जी ने बिट्रिश सरकार की मदद इस शर्त पर कि कि वो भारत छोड़कर चले जाएंगे और भारत को आजाद कर देंगे  पर अंग्रेजों ने ऐसा नहीं किया तब महात्मा गांधी जी ने कई आंदोलन करे थे।

महात्मा गांधी जी के आंदोलन:-

(1) भारतीय स्वतंत्रता संग्राम -1916 -1945
(2) चंपारण और खेड़ा सत्याग्रह -1998- 1919
(3) खिलाफत आंदोलन -1919 -1924
(4) असहयोग आंदोलन -1920
(5) अवज्ञा आंदोलन ,नमक सत्याग्रह ,दांडी यात्रा ,हरिजन आंदोलन- 1930
(6) भारत छोड़ो आंदोलन , दित्तीय विशव युद्ध ,देश का विभाजन और भारत की आजादी -1942

महात्मा गांधी के आंदोलन जो भी आंदोलन किए वह सभी शांतिपूर्ण ढंग से किया, वह सत्य और अहिंसा का पालन करते थे, यदि कोई भी हिंसा होती थी तो वह आंदोलन को टाल देते थे।

गांधी जी की कुछ महत्वपूर्ण बातें:- 
(1) गांधी जी ने दक्षिण प्रवास के दौरान 1899 में, एंग्लो बोयर युद्ध में  स्वास्थ्य कर्मि का काम किया था।
(2) जीस ब्रिटिश सरकार से महात्मा गांधी ने  लड़ाई लड़ी उन्ही ने  उनके सम्मान में उनके निधन के 21 साल बाद  उनके नाम का डाक टिकट जारी किया था।
(3) गांधी जी के आंदोलन कुल 4 महाद्वीप और 12 देशों तक पहुंचा था।
(4) भारत में 53 सड़कें महात्मा गांधी जी के नाम से है जबकि 48 लड़के विदेशों में हैं।
(5) महात्मा गांधी जी ने अफ्रीका के डरबन में 3 फुटबॉल क्लब स्थापित किए।
(6) महात्मा गांधी जी को शांति नोबेल पुरस्कार अभी तक नहीं मिला जबकि पांच बार वह इसके लिए  नॉमिनेट  हो चुके हैं।

उपसंहार
महात्मा(गाँधी) जी के कार्यों का उल्लेख अगर करने लगे तो शब्दों की कमी पड़ जाएगी इस महात्मा की तीन महत्वपूर्ण सिद्धांत थे ना बोल बुरा, ना देख बुरा, ना सुन बुरा, महात्मा गाँधी के इन सिद्धांतों को नजरअंदाज़ करके 30 जनवरी 1948 को एक व्यक्ति ने उनकी हत्या कर दी इस महात्मा ने देश के लिए अपनी जान देदी और हमें इनके  कार्यो को ना भूलते  हुए इस आजादी  का सही उपयोग करना चाहिए क्युकी ऐसे महान व्यक्ति सदियों में एक ही धरती पर अवतरित होते  है बार-बार नहीं।

#सम्बंधित लेख : महात्मा गाँधी 

Sep 18, 2018

घनश्याम दास बिड़ला, आदित्य बिड़ला ग्रुप, बिड़ला ग्रुप हिस्ट्री, कारोबार।

घनश्याम दास बिड़ला, आदित्य बिड़ला ग्रुप, बिड़ला ग्रुप हिस्ट्री, कारोबार।

घनश्याम दास बिड़ला, आदित्य बिड़ला ग्रुप के संस्थापक
घनश्याम दास बिड़ला, बिड़ला ग्रुप के संस्थापक। 

घनश्याम दास बिड़ला जीवनी , बिड़ला ग्रुप हिस्ट्री, परिवार। 

घनश्याम दास बिड़ला (Ghanshyam das Birla), बिड़ला ग्रुप के संस्थापक थे। वर्तमान में इसका नाम आदित्य बिड़ला ग्रुप हे। घनश्याम दास बिड़ला का जन्म सन 11 अप्रेल 1894 ग्राम पिलानी राजस्थान में हुआ था। इन के पिता का नाम बलदेवदास बिड़ला था। इनके पिता की चार संतान जुगल किशोर बिड़ला, रामेश्वरदास बिड़ला, घनश्याम दास, ब्रजमोहन दास बिड़ला थी। इनकी माता का नाम योगेश्वरी देवी था। घनश्याम दास मात्र 14 वर्ष की आयु से ही अपनी सामान्य शिक्षा पूरी कर वे अपने खानदानी व्यावसाय में योगदान देने लगे।

आईडिया (Idea), हिंडालको(Hindalco), और भी कई कंपनिया सव्मित्व में हे। इस बिड़ला ग्रुप का करोबार 20 से अधिक देशो में फेला हे। जिसमे घनश्याम दास का विशेष योग दान रहा। घनश्याम दास बिड़ला भारतीय अर्थव्वस्था के सूत्रधार थे। भारतीय अर्थव्वस्था को प्रगति के पथ पर अग्रसर करने के लिए उनका नाम स्वर्णिम अक्षरों में अंकित हे। घनश्याम दास बिड़ला कभी भी उपलब्धियो से संतुष्ट नहीं होते थे। एक लक्ष्य को प्राप्त कर अगले के लिए अग्रसर हो जाते थे। वे सदेव आत्म प्रसंसा के खिलाफ थे।

इसलिए उन्होंने अपनी जीवनी पर कभी सहमती नहीं दी। वेसे उन्होंने अपने को कई बार अभिव्यक्त किया जिसका उलेख उनके दवारा लिखे पत्र पत्रिकाओ और भाषण में मिलता हे। जिसमे उनके जीवन दर्शन की झलक मिलती हे। जिससे उनके जीवन की काफी जानकारी मिलती हे। उनके दवारा कियो गए 60 साल के लगतार प्रयासों के कारणों ही 20 सदी में आधुनिक भारत की नीव पड़ी। जब देश आजादी के लिए संघर्ष कर रहा था। तब भी ब्रिटिश सरकार के अधिकारी विस्टन चर्चिल भी भारत में सवेधानिक शासन व्यवस्था के लिए उनसे परामर्श लेते थे।

उनके दवारा ही भारत में पूंजीवादी व्यवस्था की नीव पड़ी। आजादी के बाद उन्होंने देश के उधोग के विकास, कला, संस्कृति, तकनिकी, प्रोधोयोगिकी, शिल्पकला, राजनीती, महत्पूर्ण योगदान दिया। उन के जेसा योगदान किसी और अन्य भारतीय ने नहीं दिया। 1942 आते आते G.D बिड़ला, मील मालिक और उद्योगपति के तोर पर पहचान बना चुके थे। गाँधी जी के विचारो से प्रभावित होकर उन्होने खुबसूरत मंदिर, शिक्षण संसथान और सामाजिक कार्यो में भी योगदान दिया। उन्हें दानशीलता और महात्मा गाँधी से आदर्श संबंधो के लिए भी जाना जाता हे। लेकिन दुर्भाग्य से महात्मा गाँधी की हत्या उनके दिल्ली स्थित आवास पर ही हुई थी।

सामाजिक कार्यो के साथ साथ उन्होंने कभी भी अपने व्यवसायिक हितो को क्षति नहीं पहुचने दी। 1947 के पूर्व वे स्वदेशी उधोग के प्रबल समर्थक थे, उन्होंने भारतीय उधोग और उनके विकास के लिए अनेक कार्य किये। जब विश्व युद्ध के कारण विश्व की अर्थव्यवस्था ख़राब थी तब भी घनश्याम दास बिड़ला ने व्यापक लाभ कमाया।

इस कारण उन्होंने स्वयं को भारत के प्रथम उधोगपति के रूप में स्थापित कर लिया था। उन्ही के प्रयासों से भारतीय उधोगो को ब्रितानी हुकूमत से रियायते प्राप्त हुई। पूंजीवादी जगत को मजबूत करने के लिए उन्होंने राजनितिक ढाचे के साथ परस्पर समझ को भी विकसित करने का कार्य भी किया। घनश्याम दास बिड़ला ने अनेक कार्य किये और वे असिम प्रतिभा के धनी थे। इस लेख में उलेखित विवरण उन के व्यक्तित्व की एक झलक मात्र हे।

घनश्याम दास बिड़ला, आदित्य बिड़ला ग्रुप, बिड़ला ग्रुप के कारोबार।  

उनकी कुछ कार्यो का वर्णन इस लेख में किया गया हे, जो इस प्रकार हे। आदित्य बिड़ला ग्रुप एक बहुराष्ट्रीय व्यापारिक संस्था हे। जो 20 से ज्यादा देशो में अपना कारोबार संचालित करता हे। इसका मुख्यालय मुंबई भारत में स्थित हे।

1. धातु कारोबार:- धातु कारोबार में विश्वभर में आदित्य बिड़ला ग्रुप की एलुमिनियम और तांबा उत्पादन की लगत सब से कम आती हे। इस कारण नियुनतम लगत में उत्पादन करने के मामले में हिंडाल्को विश्व की प्रमुख 500 कंपनियों में से एक हे। यह विश्व की सबसे बड़ी एलुमिनियम रोलिंग कंपनी मानी जाती हे। एलुमिनियम के प्राथमिक उत्पादन में इसे एशिया में तीसरा और कॉपर के उत्पादन में इसे चोथा स्थान प्राप्त हे।

2. अन्य कारोबार:- धातु कारोबार के साथ साथ बिड़ला ग्रुप कई वस्तुओ का उत्पादन करता हे और कई सेवाए भी प्रदान करता हे। इन क्षेत्रो में भी समूह का योगदान महत्वपूर्ण हे और उसे अग्रणीय स्थान प्राप्त हे। जेसे बी.पी.ओ. सेवाओ में विश्व में 15 वा और भारत में तीसरा स्थान प्राप्त हे। तथा खाद उत्पादन में भी अग्रणीय भूमिका हे। वस्त्रो के उत्पादन में प्रमुख स्थान प्राप्त हे। तथा यार्न के उत्पादन में भारत में प्रथम स्थान प्राप्त हे। कलोर एल्करी सेक्टर में दूसरा स्थान प्राप्त हे। संपत्ति प्रबंधन के कारोबार में और लाइफ इंसोरेंस के भारत की 5 प्रमुख कंपनियों में से एक हे। तथा भारत की 5 प्रमुख मोबाइल कंपनी में अग्रणीय स्थान हे।

3. सीमेंट कारोबार:- समूह का सीमेंट कारोबार ग्रासिम एवं अल्ट्रा टेक सीमेंट के नाम से संचालित हे। तथा दोनों भारत की अग्रणीय कपनियां हे और सीमेंट कारोबार में भारत में इनका पहला स्थान हे। और क्वालिटी वाइज भी नंबर वन ब्रांड हे। अल्ट्रा टेक सीमेंट को अब समूह में शामिल कर लिया गया हे, पहले यह एल एंड टी दवारा सीमेंट उत्पादन करती थी। सन 2007 में समूह दवारा इसका अधिग्रहण कर लिया गया हे।

4. कार्बन ब्लैक कारोबार:- कार्बन ब्लैक के उत्पादन में समूह विश्व में चोथे स्थान पर हे। इसके उत्पादन के प्लांट भारत चीन थाएलैंड मिस्त्र में हे वही से इसका उत्पादन होता हे। और समूह दवारा विश्व के सभी टायर विक्रेताओ को कार्बन ब्लैक की आपूर्ति की जाती हे।

5. टेलिकॉम कारोबार:- समूह का टेलिकॉम व्यावसाय आईडिया(Idea) सेल्युलर कंपनी दवारा संचालित किया जाता हे। भारत में यह प्रमुख टेलिकॉम ऑपरेटरर्स में से एक हे। इसका प्राम्भिक पूंजी निवेश भारत में किया गया हे, आईडिया सेल्युलर का बाजार में पूंजी निवेश के हिसाब से तीसरा स्थान हे।

ये बिड़ला ग्रुप वर्तमान आदित्य बिड़ला ग्रुप के कुछ प्रमुख कारोबार जो विश्व भर में विभिन्न कपनियो के माध्यम से संचालित किये जाते हे, इन सभी कारोबार के एकीकरण का श्रेय भी घनश्याम दास बिड़ला को जाता हे।

Sep 12, 2018

भाई दूज पर लेख और निबंध

भाई दूज पर लेख और निबंध

भाद्र द्वितीय कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को मनाया जाने वाला पर्व  भाई दूज है ।जो हिंदू धर्म का पर्व है जिसे यम द्वितीय  भी कहते हैं। भाई दूध दीपावली के तीसरे दिन बाद आने वाला ऐसा पर्व है जो भाई के प्रति बहन जे स्नेह को अभिव्यक्त करता है एवं बहने अपने भाई की खुशहाली के लिए कामना करती है।
भाई दूज। यम द्वितीया। लेख। निबंध 
भाई दूज मनाने का मुहूर्त
हमारे हिंदू धर्म में हर त्यौहार को मनाने का एक मुहूर्त होता है वैसे ही भाई दूज को मनाने का भी एक मुहूर्त होता है भाई दूज कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि पर शुभ मुहूर्त में भाई को तिलक करके मनाया जाता है।

भाई दूज की पूजा की सामग्री
भाई को तिलक करने से पहले बहने कुछ आवश्यक सामग्रियों का इस्तेमाल करती है जो कि इस प्रकार है।

(१) आरती की थाली
(२) तिलक के लिए कुमकुम चावल
(३) नारियल ,(सूखा गोला ,खोपरा)
(४) मिठाई
(५) सर ढकने के लिए रुमाल  या स्वच्छ कपड़ा
(६)बैठने के लिए आसन ,पटिया

भाईदूज की पौराणिक कथा अनुसार
कार्तिक शुक्ल की  द्वितीय तिथि को पूर्व काल में यमुना ने यमराज को अपने घर पर सत्कार पूर्वक भोजन कराया था उस दिन नरक का जीवन जी रहे जीवो को इस यातना से छुटकारा मिला था और वह पाप मुक्त होकर सब बंधनों से छुटकारा पा गए और सभी अपनी इच्छा अनुसार संतोष पूर्वक रहते थे।
उन सब ने मिलकर एक महान उत्सव मनाया जो की यम लोक के लिए हम सुख और खुशी पोहचने  वाला था इसलिए ये तिथी तीनों लोकों में यम द्वितीया के नाम से प्रख्यात हुई , जिस तिथि  के दिन यमुना ने यम को अपने घर बुलाकर भोजन कराया था उसी तिथि  के दिन जो मनुष्य अपनी बहनों के हाथों से अच्छा भोजन करता है उसे पौराणिक मान्यता के अनुसार उत्तम  भोजन सहित धन की प्राप्ति होती है।

भाई दूज की रोचक कथा अनुसार
एक बूढ़ी औरत के साथ बैठे थे और एक बेटी थी बेटों पर सर्प की कुदृष्टि थी जैसे ही उसके बेटे की शादी में  का सातवा फेरा होता साँप उसे डस लेता है इस प्रकार बुढ़िया के छह बेटे मर गए इस डर से उसने सातवें बेटे की शादी नहीं करी लेकिन बहन ने देखा लेकिन बहन से यह  सब देखा नहीं जा रहा था तो वह एक ज्योतिषी के पास गयी ज्योतिषी ने उससे कहा तेरे भाइयों पर सर्प की कुदृष्टि है अगर तू उसकी सारी  बलाये अपने ऊपर लेले तो उसकी जान बच सकती है तो उसने अपना रौद्र रूप दिखाना शुरू कर दिया वह जोर-जोर से चिल्लाने व सबसे लड़ने लगती थी उसके बाद सभी लोग इस वजह से उसकी सब बातें मानने लगे थे।

जब उसके भाई की शादी का वक्त आया और उसके जीजा जी उसके भाई को सेहरा बांधने लगे तोवह चिल्लाने लगी सहरा पहले में बाँधूँगी तो सहरा उसे बांध दिया सहरा में साँप था तो उसने उसे फेंक दिया जब उसके भाई का  घोड़े पर बैठने का समय आया तो वो फिर चिल्लाने लगी कि मैं घोड़े पर बैठूंगी इस प्रकार उसे फिर घोड़े ओर बैठा दिया  जिस पर साँप था ,उसने उसे भी फेक दिया इस प्रकार स्वागत के समय भी यही हुआ ।

अब जब शादी शुरू हुई तो सांपों का राजा उसे ढसने आया तब बहन ने उसे एक टोकरी में बंद कर दिया फेरे होने लगे तब  नागिन बहन  के पास आई और बोली मेरे पति को छोड़ दे तब बहन बोली पहले मेरा भाई से अपनी कुद्रष्टि हटा नागिन ने ऐसा ही किया, इस प्रकार उसने अपने आप को बुरा बना कर ना केवलबअपने भाई की रक्षा ही नहीं बल्कि उसके प्राण भी बचाए।

भाई दूज की मान्यता
भाई दूज को लेकर हमारे देश में यह मान्यता प्रचलित है कि इस दिन बहनें भाई को प्रेम पूर्वक तिलक कराती हैं उन्हें प्यार से भोजन कराती है और भगवान से उनकी लंबी आयु की कामना करती है क्योंकि इस दिन यमुना जी ने भी अपने भाई  यमराज से वचन लिया था उसके अनुसार भाई दूज मनाने से यमराज के भय से मुक्ति मिलती है और भाई-बहन में प्रेम के साथ ही सौभाग्य में भी वृद्धि होती है।

भाई दूज के कई अन्य नाम भी है 
भाई दूज को भारत में विभिन्न स्थान में विभिन्न नामों से पुकारा जाता है (गोवा, महाराष्ट्र और कर्नाटक )में इसे भाऊबीज कहते है (नेपाल) में भाई तिलक कहते हैं( बंगाल) में ईसे भरात्रु द्वितीया, भाऊबीज, भाई फोटा, और (मणिपुर) में निंनगोल, चोकुवा, नाम से पुकारते हैं। इस प्रकार हमारे देश भारत में भाई दूज को कई अन्य नाम से भी पुकारा जाता है ।

उपसंहार
बचपन से ही भाई का बहन का एक दूसरे के प्रति ध्यान और प्रेम की भावना झलकती  है ,और इसी प्रेम को दर्शाने के लिए यह त्योहार बने है। भाई दूज होली और दीपावली दोनों ही समय आती है दोनों में ही बहन का केवल प्रेम और स्नेह  ही झलकता है भाई बहन अपनी सभी लड़ाई-झगड़ों को भुलाकर बहने भाई को तिलक करती है।  बहने अपने भाई के माथे पर तिलक करके उनकी खुशहाली और लंबी आयु की कामना करती है हमारे देश भारत में प्रेम और स्नेह को दिखाने वाले इतने सुंदर ओर प्यारे त्योहार है जो शायद ही कही होंगे।

Sep 4, 2018

महात्मा गांधी के आंदोलन के नाम।

महात्मा गांधी के आंदोलन के नाम।

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महात्मा गांधी के आंदोलन और  जीवनी। 

महात्मा गांधी आंदोलन के नाम। 

" जिस दिन प्रेम की शक्ति.
शक्ति के प्रति प्रेम पर हावी हो जाएगी,
दुनिया में अमन आ जाएगा "

"ये कथन हमारे राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के थे की जिस दिन शक्ति पर प्रेम हावी हो जाएगा उस दिन हमारे देश मे अमन आ जायेगा"

महात्मा गांधी जी की जीवनी

महात्मा गांधी जी का जन्म 1869 गुजरात  के पोरबंदर में हुआ था उनके पिता का नाम करमचंद गांधी था जो कि पोरबंदर के दीवान थे उनकी मां का नाम पुतलीबाई था जो धार्मिक प्रवृत्ति के थे और उनके धार्मिक प्रवृत्ति का असर महात्मा गांधी पर काफी पड़ा था उनकी पत्नी का नाम कस्तूरबा गांधी था जो कि उन से 1 साल बड़ी थी उनका विवाह 13 वर्ष की आयु में हो गया था ,1887 में उन्होंने मैट्रिक की परीक्षा पास की थी सन 1888  में उन्होंने भावनगर के सामलदास कॉलेज में पढ़ाई की यहां से वहां  लंदन गए जहां इन्होंने बैरिस्टर की शिक्षा प्राप्त की थी।

महात्मा गांधी जी के आंदोलन की परिभाषा

         " दे दी हमें आजादी बिना खड़ग बिना ढाल.साबरमती के संत तूने कर दिया कमाल."

हमारे राष्ट्रपिता के लिए लिखी गई है दो लाइनों उनके आंदोलन की पूरी व्याख्या करते हैं इसमें बोला गया है कि इस महात्मा ने बिना किसी हत्यार और बिना किसी को ढाल बनाकर हमारे देश भारत को सत्य और अहिंसा के सहारे आजादी दिलवाई।

महात्मा गांधी जी सत्य और अहिंसा के पुजारी थे उनका पूरा जीवन सत्य और अहिंसा के मार्ग पर आधारित था सत्य और अहिंसा के दम पर एकजुट होकर हमारे भारत देश को स्वतंत्रता दिलाई अपने पूरे जीवन में केवल सत्य और अहिंसा का ही प्रयोग किया एक तरह से उनका पूरा जीवन एक आंदोलन ही था उनके अनुसार केबल रक्त बहाकर ओर किसी को नुकसान पोहचाना ही आंदोलन नही होता आंदोलन सत्य और अहिंसा का सहारा लेकर भी किया जा सकता है और वो अपने जीवन के सभी आंदोलन में सफल भी रहे।

महात्मा गांधी जी के आंदोलन के नाम

महात्मा गांधी जी ने सत्य और अहिंसा के बदौलत अपने देश को स्वतंत्रता दिलाई इस हेतु उन्होंने कई आंदोलन करें जो कि इस प्रकार है।

(1) चंपारण सत्याग्रह -1917
 चंपारण बिहार राज्य का एक जिला है और इस जिले के किसानों की मदद के लिए यह आंदोलन किया गया था इसे निल की खेती को रोकने के लिए किया गया था क्योंकि नील की खेती से जमीन खराब हो जाती थी इस आंदोलन को चंपारण आंदोलन नाम दिया गया था।

(2) खेड़ा सत्याग्रह- 1918
खेड़ा गुजरात में है यह एक किसान आंदोलन था जिसमें किसानों की दशा को सुधारने के लिए किया गया था जो कि लगान व्रद्धि की समाप्ति पर आधारित था।

(3) अहमदाबाद अनशन -1918
अहमदाबाद अनशन अहमदाबाद के कर्मचारियों पर आधारित था इस आंदोलन का मुख्य उद्देश्य मालिकों द्वारा मजदूरों को दिया जाने वाला प्लेग बोनस को समाप्त करना था।

(4)खिलाफत आंदोलन -1919
खिलाफत आंदोलन भारत में मुख्य रूप से मुसलमानों द्वारा चलाया गया था यह आंदोलन राजनीति  ऒर धार्मिक था इस आंदोलन का उद्देश्य (शुन्नी)
इस्लाम के  मुखिया माने जाने वाले तुर्की के खलीफा के पद की पुनः स्थापना कराने हेतु या आंदोलन किया गया था।

(5) असहयोग आंदोलन 1920
असहयोग आंदोलन महात्मा गांधी  तथा भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के बीच के नेतृत्व  में आंदोलन चला था जिसने भारतीय स्वतंत्रता  आंदोलन को एक नई जागृति प्रदान करि।

(6) दांडी मार्च  -1930
दांडी मार्च सत्याग्रह अंग्रेज सरकार के नमक के ऊपर कर लगाने के कानून के विरुद्ध किया गया आंदोलन था।

(7) सविनय अवज्ञा आंदोलन -1930
सविनय अवज्ञा आंदोलन गांधी जी द्वारा 1930 में शुरू किया गया था जिसका अर्थ था बिना किसी हिंसा के किसी सरकारी आदेश की अवहेलना करना (लॉर्ड इरविन )ने गांधी जी की 11 मांगों को नामंजूर कर दिया था तो महात्मा गांधी जी ने इन मांगों के लिए सविनय अवज्ञा आंदोलन किया था।

(8) व्यक्तिगत सविनय अवज्ञा आंदोलन - 1940
व्यक्तिगत सविनय अवज्ञा आंदोलन गांधी जी की इरविन पेंट समझौता को ना मानना और ब्रिटिश सरकार द्वारा पूर्ण स्वराज की बात को स्वीकार नहीं करने के विरुद्ध व्यक्तिगत सविनय अवज्ञा आंदोलन  पूर्ण स्वराज्य हेतु शुरु किया गया था।

(9) भारत छोड़ो आंदोलन - 1942
भारत छोड़ो आंदोलन द्वितीय विश्व युद्ध के समय आरंभ किया गया था जिसका मकसद भारत मां को अंग्रेजों की गुलामी से आजाद कराना  था महात्मा गांधी जी ने इस आंदोलन के शुरुआत अखिल भारतीय कांग्रेस समिति के मुंबई अधिवेशन से शुरू की थी।

(10) नोआखाली सत्याग्रह  -1946

महात्मा गांधी स्वतंत्र आंदोलन के द्वारा सांप्रदायिकता के खिलाफ लड़ते रहते थे क्योंकि वह जानते थे कि इसका घातक परिणाम सामने आएगा उनका मानना था यदि ऐसा हुआ तो हिंदू मुसलमानों में आपसी  मतभेद होगा तो भारत को कभी भी इस गुलामी से मुक्ति नहीं मिल पाएगी साम्प्रदायिक सद्भावना हेतु उन्होंने ये आंदोलन किया था।

गांधी जी के जीवन दर्शन का आधार भारतीय आदर्शवाद है

महात्मा गांधी जी के जीवन के मोटे तौर पर चार प्रमुख तत्व जो उनके आदर्शवाद पर आधारित है.

(1) सत्य
 गांधी जी के लिए ईशवर और सत्य में कोई अंतर नहीं था वह कहते थे यदि कोई व्यक्ति मन, वचन ,कर्म , अथवा कार्य में सत्य का प्रयोग करता है तो उसे ईश्वर अवश्य प्राप्त होता है।

(2) अहिंसा
अहिंसा अपने  सक्रीय रूप में जीवन के प्रति सद्भावना है यह शुद्व प्रेम  है।

(3) निर्भयता
समस्त ब्रहा भयो  से मुक्ति इसका अर्थ है।

(4) सत्याग्रह
विरोधी को कष्ट देकर नहीं अपितु स्वयम अपने आप को कष्ट देकर सत्य का समर्थन कराना सत्याग्रह कहलाता है।

गांधी जी का शिक्षा दर्शन

संसार के अधिकांश लोग गांधी जी को एक महान राजनीतिक ही मानते हैं परंतु उन्होंने देश की राजनीतिक उन्नति की अपेक्षा सामाजिक उन्नति को अधिक महत्व दिया था जिसमें उन्होंने शिक्षा को अधिक महत्व दिया जिसमें खास तौर पर बच्चों की शिक्षा पर ज्यादा बल दिया उनके अनुसार साक्षरता ना तो शिक्षा का अंत है और न आरंभ  यह केवल एक साधन है जिसके द्वारा पुरुष व स्त्री को शिक्षित किया जा सकता है।

 गांधी जी की शिक्षा के उद्देश्य

 इन्हें दो भागों में बांटा गया था।

(1) गांधीजी के तात्कालिक उद्देश्य

(2) शिक्षा का सर्वोच्च उदेश्य

गांधीजी के तात्कालिक उदेश्य इस प्रकार है। 

(1) जीविकोपार्जन का उद्देश्य

(2) सांस्कृतिक उद्देश्य

(3) पूर्ण विकास का उद्देश्य

(4) नैतिक अथवा चारित्रिक विकास

 (5) मुक्ति का उद्देश्य

शिक्षा का सर्वोच्च उद्देश्य

गांधी जी के अनुसार शिक्षा का सर्वोच्च उद्देश्य स्तय अथवा ईशवर की प्राप्ति शिक्षा के सारे उद्देश्य इस उद्देश्य के अधीन है यह  उद्देश्य वही आत्माभूति का उद्देश्य है ,आत्मा का विकास करना चरित्र का निर्माण करना है तथा व्यक्ति को ईश्वर ओर आत्मानुभूति के लिए प्रयास करने के योग्य बनाना है सर्वोच्च उद्देश्य है शिक्षा का ।

निष्कर्ष
इस प्रकार महात्मा गांधी जी ने अपना पूरा जीवन देश को समर्पित कर दिया था उस दुबले-पतले से दिखने वाले व्यक्ति महात्मा गांधी जी ने अपने  शरीर के वस्त्र तक देश के लिए छोड़ दिया था तो उनके बारे में कुछ भी लिखना या बोलना कहीं ना कहीं कुछ कम ही लगेगा ऐसे महात्मा को मेरा शत शत नमन है ।

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