Jan 1, 2019

असफल व्यक्ति का प्रेम-The Love of Failed Person

असफल व्यक्ति का प्रेम-The Love of Failed Person

असफल व्यक्ति का प्रेम और असफल व्यक्ति का सही अर्थ। :- प्रेम की बात करे इससे पहले हम असफ़ल व्यक्ति को जान ले | कौन होता हे असफ़ल व्यक्ति ? समाज में इसको कुछ नाम दिए हे जेसे :- निकम्मा, निठल्ला, नाकारा, आवारा, पर वास्तव में इन शब्दों से असफ़ल व्यक्ति का दूर दूर तक कोई लेना देना नहीं हे। असफ़ल व्यक्ति वो होता हे जिसने प्रयास किये हो पर असफ़ल रहा हो। क्षेत्रवाद, वर्गवाद ज्ञान, राजनीती और मोलिक सिद्धान्तो के कारण या जिसके काम को स्वीकारा नहीं जाता हो, जिसके काम को पहचान न मिली हो, या जिसकी आय, व्यय से कम हो | मतलब आर्थिक तोर पर पूर्ण सफल न हो ऐसा व्यक्ति असफ़ल कहलाता हे।

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अब बात आती हे ऐसे व्यक्ति के प्रेम की या, विवाह की, और उसकी पसंद-नपसंद की | ऐसा व्यक्ति जब भी प्रेम करता हे या विवाह प्रस्ताव रखता हे तो उसकी पसंद-ना-पसंद कोई मायने नहीं रखती समाज या दुसरे पक्ष के सामने और यदि शारीरिक सुन्दरता नहीं हो तो “ सोने पे सुहागा ” “ जलती आग में घी डालना ” जेसा यही से खेल शुरू होता हे समझोते का कुछ लोग इसको स्वीकार कर जीवन भर इस बोझ को ढोते और सामान्य कहलाते हे |

और कुछ इसका विरोध कर इसको ताकत बनाकर जीवन को दुसरे विषय में लगा कर महानायक बन जाते हे | और कुछ क्रोध प्रतिशोध में खलनायक बन जाते हे | तीनो ही सूरतो में न प्रेम सफल हुआ न तुलना, जिस उद्देश्य के लिये दो लोग मिले थे न वो पूरा हुआ | संबंध कोई भी हो तुलना और बारबरी जरुरी हे | दोनों पक्षों की पसंद नपसंद भी जरुरी हे | धन और सामाजिक स्तर भी जरुरी हे | पर तुलना केवल बिना जाने समझे धन और किताबी ज्ञान के आधार पर हो | अपनी कमी और आवश्कताओं को जाने बगेर हो ये उचित नहीं हे |

क्योकि हमें इस बात को समझ न होगा की वक्त कभी भी किसी का बदल सकता हे | और तन, मन, आयु की एक सीमा हे | धनी हो या निर्धन प्रेम, साथ, वफ़ादारी की दोनों को ही आवश्कता हे | और यदि ये हमें स्वीकार नहीं हे तो हम अकेले ही रहे | या फिर अपने जीवन की भूमिका पहले से ही तय कर ले की हमें दोलत चाहिए या सुन्दरता या भोतिक सुख, फिर हमें प्रेम समर्पण वफ़ादारी को भूल जाना चाहिए | किसी को सब मिल जाये वो उसका नसीब हे | और सात जन्मों का साथ, मन से मन का मिलन, इन बातो को विचारो को किताबो से हटा देना चाहिए |

क्योकि यदि जीवन क्रय विक्रय बन जाये तो फिर भावनाओ का क्या काम | व्यापार में माल की गुणवता और माग ही उसकी कीमत तय करती हे | और व्यवहारिक जीवन में सफल व्यक्ति की तुलना में असफल व्यक्ति का प्रेम देखे तो वो ज्यादा सार्थक और सटीक हे सच्चा हे | कियोकी उसके पास केवल उसका प्रेम ही हे प्रेम करने को और वही उसके जीवन का आधार भी हे कियोकी उसके संघर्षो में वही उसकी प्रेरणा भी था और उपलब्धि भी | और इसके विपरीत सफल व्यक्ति के पास प्रेम और गर्व करने को उसका नाम, ज्ञान, ताकत, दोलत, शोहरत, सबकुछ हे | और प्रेम केवल जीवन की एक उपलब्धि या आवश्कता हे |

निष्कर्ष :- अपवाद हो सकते हे एवं लेख में व्यक्ति शब्द पुरुष प्रधान हे पर इसमे लिखी बाते लड़का हो या लड़की स्त्री या पुरुष दोनों पक्षों को समान रखते हुए लिखी गई हे |
प्रसिद्ध साहित्यकार - मुंशी प्रेमचंद की जीवनी (Munsi Premchand)

प्रसिद्ध साहित्यकार - मुंशी प्रेमचंद की जीवनी (Munsi Premchand)

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मुंशी प्रेमचंद की जीवनी

मुंशी प्रेमचंद की जीवनी (Munsi Premchand)

#विषय जानकारियाँ 
1.नाम मुंशी प्रेमचंद 
2.पूरा नामधनपत राय श्रीवास्तव
3.जन्म और स्थल 31 जुलाई 1880 वाराणसी, निकट लमही गाँव 
4.भाषा हिंदी, उर्दू 
5.शिक्षा का आरंभउर्दू, फ़ारसी। 
6.प्रमुख रचनाएँ गोदान, कर्मभूमि, रंगभूमि, सेवासदन
7.कार्य क्षेत्र अध्यापक, लेखक, पत्रकार, 
8.माता का नामआनन्दी देवी
9.पिता का नाम मुंशी अजायबराय
10मृत्यु8,अक्टूबर 1936 .

मुंशी प्रेमचंद का जन्म वाराणसी जिले के लमही गाँव में सन् 1880 में हुआ। उनका मूल नाम धनपत राय श्रीवास्तव था। उनके पिता डाकखाने में एक नौकरी करते थे। उनकी माँ बचपन में ही चल बसी इसलिए उनका बचपन घोर संकटों में बीता। उनके पिता ने फिर दूसरी शादी भी की। और जब प्रेमचंद की उम्र लगभग 15 साल थी तभी उनके पिता जी का भी देहांत हो गया।

मुंशी प्रेमचंद ने भी अपने जीवन में दो  शादियाँ की। पहली शादी उनके सौतेले नाना ने करवाई। उनकी पहली पत्नी विवाद के कारण उन्हें छोड़कर चली गयी। फिर काफी समय बाद उन्होंने दूसरी शादी एक विधवा औरत के साथ की। जिसका नाम शिवरानी देवी था।

उन्होंने प्रारम्भिक शिक्षा वाराणसी में ग्रहण की। बचपन में एक मौलाना से उर्दू और फ़ारसी का ज्ञान लिया।  मेट्रिक करने के बाद वे आध्यापन कार्य करने लगे। फिर उन्होंने स्वाध्याय करके बी.ए. की परीक्षा उत्तीर्ण की। वे सरकारी नौकरी में भी रहे। वे महात्मा गांधी जी से बहुत प्रभावित थे। इसीलिए असहयोग आन्दोलन के समय नौकरी से त्यागपत्र  दे दिया।

लेखन कार्य में तो वे लगभग 13 वर्ष की उम्र से ही सक्रिय रहे। प्रेमचंद ने अपना लेखन कार्य उर्दू में नबाबराय नाम से आरम्भ किया, बाद में वे हिन्दी में लिखने लगे। उनकी पहली कहानी सन् 1915 में ‘सरस्वती’ पत्रिका में प्रकाशित हुई।

मृत्यु - सन् 1936 में प्रेमचंद जी बीमार रहने लगे और उनकी मृत्यु हो गयी।

प्रेमचंद का रचनात्मक और संपादन कार्य। 

कहानी संग्रह - उनके जीवन काल में उनकी कहानियाँ विभिन्न संग्रहों के नामों से छपी। उनके मरने के बाद आंकी सभी कहानियों को मानसरोवर (आठों भागो में) संग्रह के नाम से आठ भागों में प्रकाशित कर दिया गया।
उनका सबसे पहले प्रकाशित होने वाला कहानी संग्रह वतन था। जिसका नाम था - सोजे वतन। सोजे वतन का हिंदी में मतलब होता है - राष्ट्र का विलाप या देश का दर्द। इस कहानी संग्रह ने उसे ज़माने में खूब धूम मचाई थी। क्योंकि यह संग्रह देशभक्ति की कहानियों का संग्रह था।

इस कहानी संग्रह का अंग्रेजी शासन पर इतना प्रभाव पड़ा कि उन्हें इस पर रोक लगानी पडी। और साथ में प्रेमचंद जी को न लिखने के लिए कहा। इसी घटना के बाद से प्रेमचंद जी ने अपना नाम नवाबराय से बदलकर हमेशा के लिए प्रेमचंद कर लिया।

उपन्यास - सेवासदन, कर्मभूमि, रंगभूमि, निर्मला, गबन, गोदान, प्रेमाश्रम।
गोदान उनका सबसे ज्यादा प्रसिद्ध उपन्यास है।
नाटक - कर्बला, संग्राम, प्रेम की देवी।
निबंध या लेख संग्रह - विविध प्रसंग (तीन भागों में), कुछ विचार।
संपादन कार्य - माधुरी, हंस, मर्यादा, जागरण।

शिल्पगत विशेषताएँ

प्रेमचंद ने अपनी रचनाओं में किसानों, दलितों एवं नारियों की वेदना तथा वर्ण-व्यवस्था की कुरीतियों का मानवीय चित्रण किया है। वे साहित्य को सामाजिक परिवर्तन का सशक्त साधन मानते थे। उनकी दृष्टि में साहित्यकार समाज के भवन को गिरता नहीं है बल्कि उसका निर्माण करता है। उन्होंने समाज-सुधार और राष्ट्रीय भावना को अपनी रचनाओं में स्थान दिया। कथा-संगठन एवं चरित्र-चित्रण की दृष्टि से उनकी रचनाएँ बेजोड़ हैं।

भाषा

प्रेमचंद की रचनाओं की भाषा सजीव, मुहावरेदार और बोलचाल वाली है। इसमें उर्दू की स्वच्छता, गति और मुहावरे से साथ संस्कृत भावमयी पदावली का भी सुन्दर प्रयोग है। प्रेमचंद ने अपनी कहानियों और उपन्यासों से हिंदी को लोकप्रिय बनाया।

हिंदी में बाल-मनोविज्ञान से सम्बंधित कहानियाँ बहुत कम लिखी गयी है। प्रेमचंद उन दुर्लभ कथाकारों में से हैं जिन्होंने पूरी प्रमाणिकता तथा तन्मयता से साथ बाल-जीवन को अपनी कहानियों में स्थान दिया। उनकी सम्पूर्ण साहित्य भारत की साझी संस्कृति व ग्रामीण जीवन के विविध रंगों से भरा पड़ा हैं।

मुंशी प्रेमचंद के जीवन पर आधारित कार्यकर्म । 

यह कार्यक्रम उपन्यास सम्राट प्रेमचंद्र के जीवन पर आधारित है। (कथा सम्राट-प्रेमचंद  Duration 25 min)

यह कार्यक्रम  हिंदी और उर्दू के उपन्यास लेखक, कहानी लेखक और नाटककार मुंशी प्रेमचंद के जीवन पर आधारित है। (प्रेमचंद का बचपन और बच्चों की कहानियाँ  Duration 25 min) 
जानें कैसे छोटे व्यवसायियों को NBFC से बिजनेस लोन लेना है बेहद आसान |

जानें कैसे छोटे व्यवसायियों को NBFC से बिजनेस लोन लेना है बेहद आसान |

छोटे व्यवसायियों को अपने बिजनेस के विस्तार के लिए तमाम तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में छोटे व्यवसायियों के लिए बिजनेस लोन एक संजीवनी बूटी की तरह होता है। इसी बिजनेस लोन को पाने के लिए छोटे व्यापारी काफी परेशान रहते हैं। जो सबसे बड़ी समस्या छोटे व्यापारियों को झेलनी पड़ती है, वो है कि बिजनेस लोन के लिए बैंको का चक्कर लगाना। छोटे व्यापारियों के लिए बैंको से लोन के लिए चक्कर लगाने से अच्छा है, NBFC से बिजनेस लोन लेना। NBFC से बिजनेस लोन के लिए आपको मात्र एक बिजनेस लोन Application form भरना होता है। जिसके बाद सामान्यतया एक हफ्ते के भीतर ही बिजनेस लोन मिल जाता है।
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जानें कैसे छोटे व्यवसायियों को NBFC से बिजनेस लोन लेना बेहद आसान |

NBFC क्या है-

NBFC उन कंपनियों को कहते हैं जो कंपनी अधिनियम, 1956 के अंतर्गत पंजीकृत हो। NBFC का मुख्य कारोबार उधार देना, विभिन्न प्रकार के share/stock/bonds, पट्टा कारोबार, hire purchase, बीमा कारोबार, चिट संबंधी कारोबार में निवेश करना होता है। इसके साथ ही NBFC का काम किसी योजना या फिर व्यवस्था के अंतर्गत एकमुश्त रूप से अथवा किस्तों मे लोन प्रदान करना है।

NBFC क्यों है एक बेहतर विकल्प-

पारंपरिक तौर पर ज्यादातर व्यापारी बिजनेस लोन के लिए बैंकों पर ही निर्भर रहते हैं। मगर बैंको से लोन लेने की प्रक्रिया काफी जटिल है और योग्यता मापदंड भी काफी कठिन होते हैं।  जिसे ज्यादातर व्यापारी पूरी नहीं कर पाते है और अंत में उन्हें निराशा ही हाथ लगती है। वहीं इसके विपरीत NBFC से बिजनेस लोन लेना काफी आसान होता है। NBFC व्यापारियों को बिना किसी ज्यादा बड़ी कागजी कार्यवाई के आसानी से बिजनेस लोन प्रदान करती है। इसके साथ ही ज्यादातर NBFC छोटे व्यापारियों को बिजनेस लोन बिना किसी सिक्योरिटी के ही प्रदान करती हैं।

एक वजह और है, जो छोटे व्यापारियों को बिजनेस लोन लेने के लिए बैंकों की तुलना में NBFC को बेहतर बनाती है। वो वजह है सिबिल स्कोर। बैंक किसी व्यापारी को बिजनेस लोन सिबिल स्कोर के आधार पर देते हैं। अगर व्यवसायी का सिबिल स्कोर अच्छा होगा, तब तो उन्हें लोन मिल जाएगा, लेकिन अगर सिबिल स्कोर अच्छा नहीं हुआ, तो फिर उन्हें बिजनेस लोन नहीं दिया जाता है। मगर ऐसी बहुत सी NBFC हैं, जो बिजनेस लोन देने के लिए सिबिल स्कोर को आधार नहीं बनाती हैं, बल्कि अपने मापदंडों के आधार पर आसानी से बिजनेस लोन प्रदान करती हैं।

कम समय में मिल जाता है बिजनेस लोन-

NBFC की कोशिश रहती है, कि वे ग्राहक को ज्यादा परेशान ना करके कम से कम कागजी कार्यवाई करें। इसके साथ ही NBFC से ग्राहकों को बैंक की तुलना में लोन राशि जल्दी प्राप्त हो जाती है। ज्यादातर NBFC Flexi बिजनेस लोन की भी सुविधा देते हैं। इसके तहत व्यापारी अपनी सुविधानुसार लोन को समय से पहले तथा आसान किस्तों में चुका सकते हैं।

जरूरी दस्तावेज-

बैंको से बिजनेस लोन लेने पर तमाम तरह के दस्तावेज और कागजी कार्यवाई करनी पड़ती है। मगर NBFC बिजनेस लोन के लिए ज्यादा दस्तावेज नहीं मांगते हैं। साधारणतया NBFC जो दस्तावेज मांगते हैं, हम उनके बारे में आपको बताने जा रहे हैं।

  • पिछले 2-3 साल आईटीआर
  • पिछले साल के बैंक स्टेटमेंट्स
  • व्यापार / निवास पता प्रमाण
  • आधार कार्ड और पैन कार्ड


मात्र इन दस्तावेजों की सहायता से छोटे व्यापारी एनबीएफसी बिजनेस लोन प्राप्त कर सकते हैं।

Dec 7, 2018

निवेश योजना और मार्गदर्शन के बारे में सब कुछ पता होना चाहिए

निवेश योजना और मार्गदर्शन के बारे में सब कुछ पता होना चाहिए

लोग निवेश क्यों करते हैं? शायद उन्हें वित्तीय सुरक्षा की जरूरत है। वित्तीय सुरक्षा प्राप्त करने का सबसे अच्छा तरीका क्या है? यह भविष्य में वित्तीय स्थिरता रखने के लिए लंबे समय तक पैसे बचाने और निवेश करना है। अधिकांश लोगों की सामान्य सोच के अनुसार, यदि आपको अधिक धन की आवश्यकता है तो आपको और अधिक काम करने की आवश्यकता है। लेकिन क्या आपके पास पैसे का आनंद लेने के लिए समय नहीं है? आपके लिए हर बार काम करने के लिए आपके पास क्लोन नहीं हो सकता है, इसलिए धन का विस्तार आपके कामकाजी घंटों का विस्तार होता है। निवेश आपके पैसे को आपके लिए काम करना है, अपनी कमाई क्षमता को अधिकतम करना भारत में सर्वोत्तम निवेश विकल्पों के बारे में अधिक जानने के लिए।
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निवेश योजना और मार्गदर्शन के बारे में सब कुछ पता होना चाहिए

आजकल, निवेश पैसे बचाने के लिए नहीं बल्कि आय उत्पन्न करने के साधनों के रूप में देखा जाता है। आपकी बचत को बढ़ाने के बहुत से तरीके हैं जैसे कि स्टॉक मार्केट, म्यूचुअल फंड, फिक्स्ड डिपॉज़िट, बांड और भी बहुत कुछ।

स्टॉक और इक्विटी जैसे निवेश विकल्प आपको उतार-चढ़ाव वाले स्टॉक इंडेक्स और बाजार की अस्थिरता से जुड़े उच्च जोखिमों के बावजूद अधिक रिटर्न अर्जित करने में सक्षम करते हैं। हालांकि प्रत्येक निवेश विकल्प के साथ कुछ जोखिम जुड़ा होता है, पर जोखिम का स्तर प्रत्येक निवेशक के लिए अलग होता है।
कुछ निवेशक संभावित रूप से अधिक रिटर्न के बदले में अधिक जोखिम ले सकते हैं, जबकि अन्य निवेशक कम जोखिम वाले स्थिर निवेश की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हैं। कम जोखिम के साथ जाने वाले निवेशक पब्लिक प्रोविडेंट फण्ड, बांड, लिक्विड फंड, या फिक्स्ड डिपॉज़िट में निवेश कर सकते हैं।

सही निवेश चुनते समय, अपने निवेश के लक्ष्य पर विचार करने के लिए पर्याप्त समय समर्पित करना, वह अवधि जिसके लिए आप निवेश करना चाहते है उसके बारें में जानना और जिस रिटर्न की आप उम्मीद कर रहे हैं उसकी दर के बारें में सोचना यह सभी महत्वपूर्ण है। प्रभावी ढंग से निवेश करने और अपने निवेश से अधिक लाभ उठाने के लिए, एक स्मार्ट निवेश रणनीति होना महत्वपूर्ण है। यहाँ एक स्मार्ट निवेश रणनीति बनाने का एक संक्षिप्त तरीका दिया गया है।

निवेश रणनीति की रिसर्च करें

सभी उपलब्ध निवेश विकल्पों की मार्केट रिसर्च करना अत्यंत महत्वपूर्ण है। विभिन्न निवेश योजनाओं और प्रस्तावों की समझ प्राप्त करें जो विभिन्न बैंक और एनएफबीसी (गैर-वित्तीय बैंक कंपनियां) प्रदान करती हैं। असल में, सभी मौजूदा निवेश योजनाओं को जानने और समझने की सलाह दी जाती है ताकि आप एक सोचा-समझा निर्णय ले सकें। यह आपको विभिन्न निवेशों पर उपलब्ध मौजूदा रुझानों और ऑफ़र के बारें में और इनसे होने वाले लाभों के बारें में बताता है। आप प्रत्येक योजना के विभिन्न पहलुओं पर रिसर्च कर सकते हैं जैसे कि:
  •  आप कहां निवेश कर रहे है और स्कीम की आवेदन प्रक्रिया क्या है?
  •  प्रत्येक स्कीम (बैंक या एनबीएफसी) के लिए सबसे अच्छी योजना कौन प्रदान करता है?
  • निवेश के लिए न्यूनतम कितनी राशि की आवश्यकता है?
  • रिटर्न की दरें क्या हैं?
  • क्या निवेश बाजार की अस्थिरता से प्रभावित होगा ? यदि हां तो कितना?
  • दीर्घकालिक लाभ की संभावनाएं क्या है?

जोखिम सहनशीलता(टॉलरेंस) और दीर्घकालिक निवेश

उच्च जोखिम निवेश तब किया जाता है जब उसको करने का लक्ष्य धन को बढ़ाना होता है। जोखिम भरे निवेश वह हैं जो बाजार में होने वाले उतार-चढ़ाव से प्रभावित होते हैं यानी बाजार के पतन के दौरान भारी नुकसान भी हो सकता है। इन निवेशों को आपकी जोखिम सहनशीलता क्षमता के अनुसार किया जाना चाहिए। आपकी उम्र के आधार पर, निवेश के लिए आपका लक्ष्य और बाजार में उतार-चढ़ाव से निपटने के आपके दृष्टिकोण से आपकी जोखिम सहनशीलता क्षमता निर्धारित की जा सकती है। यदि आपकी निवेश योजना बाजार जोखिमों को बर्दाश्त नहीं कर सकती है, तो आप सावधि जमा (फिक्स्ड डिपॉज़िट) जैसे बिना जोखिम वाले निवेश में निवेश करने पर विचार कर सकते हैं। बजाज फाइनेंस 9 .10% रिटर्न के साथ उच्च एफडी ब्याज दरें प्रदान करता है। ये दीर्घकालिक निवेश रिटर्न की गारंटी देते है जो उन्हें कम जोखिम वाला विकल्प बनाती हैं जो कि किसी भी गैर-आक्रामक निवेशक के लिए आदर्श हैं।

विविध निवेश और मूर्त संपत्ति (टेंजिबल असेट्स) आवंटन

जब आपके पास निवेश करने के लिए बहुत अधिक पूंजी होती है, तो आप विभिन्न उद्योगों द्वारा दी जाने वाली विभिन्न योजनाओं में निवेश कर सकते हैं। एक विविध पोर्टफोलियो होने से आपको उच्च रिटर्न, सुरक्षित दीर्घकालिक निवेश और प्रभावी जोखिम प्रबंधन जैसे निवेश के सभी लाभ मिल सकते हैं। अपने पोर्टफोलियो को विविधता देने के लिए आप कुछ योजनाओं जैसे स्टॉक, फंड और बॉन्ड में निवेश कर सकते हैं जिनमें बाज़ारी जोखिम शामिल है। इसी प्रकार, अपने निवेश से जुड़े जोखिम स्तर को कम करने के लिए पेंशन योजनाओं, एफडी या बीमा पॉलिसी जैसी सुरक्षित निवेश योजनाओं में भी निवेश करें। अमूर्त संपत्तियों में निवेश करने के अलावा, आप अचल संपत्ति जैसी मूर्त संपत्तियों में निवेश करके भी अपने निवेश को विविधता दे सकते हैं। हालांकि, रियल एस्टेट लिक्विडिटी के मामले में बिलकुल निम्न स्थान पर है और आपके पैसे को आसानी से प्राप्त करना मुश्किल बनाता है।

एक उचित निवेश का निर्माण सिर्फ शुरुआत है! एक बार जब आप योजनाबद्ध निवेश निष्पादित कर लेंगे, तो आपको बाजार के प्रदर्शन और आपके निवेश पर इसके प्रभावों की निगरानी करने में सतर्क रहना होगा। आपको कानून और निवेश के नियमों के अपडेट के बारे में चौकन्ना रहने की भी आवश्यकता होती है। एक बार आपकी योजना तैयार हो जाती है तो, उसके बाद, मार्केट रिसर्च नियमित रूप से करना आवश्यक होता है। इन प्रथाओं के अतिरिक्त, आउटपुट के लिए आपके निवेश और बाजार के रुझान की निगरानी आपको अपने पैसे को प्रभावी ढंग से प्रबंधित करने में मदद करते हैं। 

Oct 29, 2018

क्या आप अपनी dream job पाना चाहते हैं? 5 step plan to get your dream job

क्या आप अपनी dream job पाना चाहते हैं? 5 step plan to get your dream job

मुझे याद है, बचपन में जब कोई मुझसे पूछा करता था कि तुम बड़े हो कर क्या बनना चाहते हो, तो मेरा एक ही जवाब होता था, कि मैं बड़ा हो कर policeman बनना चाहता हूँ. उनकी वर्दी, और निडरता मुझे हमेशा ही आकर्षित करती थी. लेकिन जैसे जैसे मैं बड़ा हुआ, मेरी सोच में बदलाव आया, और उसी के साथ बदलाव आया मेरे career goals में. बचपन के बजाय, मेरे goals अब बेहतर तरीके से सोचे और सुलझे हुए थे. लेकिन इतना सोचने के बाद भी मैंने कई ऐसी jobs की, जिनमे मुझे बिलकुल भी interest नहीं आया. काफी समय बाद मैं अपने passion को समझ पाया. मुझे यकीन है कि आप में से भी कई लोग इस दौर से गुज़र रहे होंगे. लेकिन आपको घबराने की बिलकुल भी ज़रुरत नहीं है. अक्सर अपनी dream job को पहचानना थोड़ा मुश्किल हो जाता है, लेकिन एक बार आपने जान लिया, कि आप अपनी ज़िन्दगी में क्या करना चाहते हैं तो कोई आपको नहीं रोक सकता। 
5 step plan to get your dream job
5 step plan to get your dream job
इस article में हम इसी बारे में विस्तार से बात करेंगे. हम जानेंगे कि किस तरह आप ना सिर्फ अपनी dream job को पहचान सकते हैं, बल्कि उसे पा भी सकते हैं. तो चलिए शुरू करते हैं।
1. अपने passion को पहचाने (Identify your passion):
मैं कई बार ऐसे लोगों से मिलता हूँ जो सालों का experience लेने के बावजूद कहते हैं, कि उन्हें job में मज़ा नहीं आता. ये बड़े ही दुःख की बात है. एक व्यक्ति तभी सफल हो सकता है जब वो अपने काम से प्यार करे, जब उसे अपना काम करने में मज़ा आये. लेकिन हम अक्सर जल्दबाज़ी में कोई भी job चुन लेते हैं. नतीजा, जल्दी ही हम उस काम से bore होने लगते हैं और फिर शिकायत करते हैं कि हमे काम करने में मज़ा नहीं आ रहा।

इसलिए बेहतर यही है कि शुरू से ही अपना job ध्यान से चुने. अच्छे से सोचें, कि ऐसा कौनसा काम है जो आपको ख़ुशी देता है. लेकिन ध्यान रहे कि आपको ये भी देखना होगा कि उस काम का कोई scope है भी या नहीं. अगर आप ऐसा कोई profile चुन लेंगे, जिसके scope नहीं है तो आपको salary कम ही मिलेगी. तो अपनी dream job चुनते वक़्त इन दोनों बातो का ज़रूर ध्यान रखें।

आप confused हो रहे हैं तो अपने आस पास के लोगो से सलाह ले सकते हैं. अपने friends, family members, आदि से discussion करें और बैठ कर फिर हर profile के फायदे और नुकसान देखें. जल्दी ही आप अपनी dream job को पहचान लेंगे।

2. Job के लिए आवश्यक skills लाएं (Acquirer required skillset for job)

ध्यान रहे कि हर job के लिए employer candidate में कुछ special skills ढूंढता है, जिनके ना होने पर लोग interview में reject हो जाते हैं. अगर आप भी बिना skills के ही job के लिए apply कर देते हैं तो ये एक बहुत बड़ी गलती है. बिना skills के आप कभी job पा ही नहीं सकते. इसलिए जैसे ही आप अपनी dream job निश्चित करें, उसी दिन से उसकी तैयारी शुरू कर दें. पता लगाए कि उस job में select होने के लिए सबसे ख़ास skills कौनसी हैं. इसके अलावा 1-2 extra skills भी सीख लें. इससे आपके job पाने के chances और भी बढ़ जायेंगे.

अगर आपकी कोई dream company है, तो उसके बारे में भी पता लगाएं. Company के बारे में अच्छे से research करना आपको interview के वक़्त बहुत फ़ायदा देगा. 

3. एक आकर्षक resume बनाये (Create an attractive resume):

क्या आप जानते हैं कि एक average employer केवल 40 seconds में आपका resume देख कर ये निश्चय कर लेता है कि आपको interview के लिए बुलाना है या नहीं. ऐसे में अगर आपका Resume बहुत ही common है तो आपके hire होने के chances बहुत कम हैं. हाँ, हम सभी के पास एक Resume होता है जो हमारा perfect Resume होता है, लेकिन यह हमे dream job नहीं दिला सकता. आपके Resume में कुछ खासियत होने पर ही आपका चयन हो पायेगा. इसलिए अगर आपका Resume बहुत ही साधारण सा है, तो job पाने की बात बिलकुल भूल जाएँ. आपका Resume आपका first impression बनाता है और यक़ीनन, आप ये first impression long lasting बनाना चाहेंगे. लेकिन आपका साधारण सा Resume ये काम बिलकुल नहीं कर पायेगा. आप चाहे तो Canva CV maker tool का उपयोग कर के एक बहुत ही अच्छा Resume केवल 10 minute में बना सकते हैं, वो भी free में. लेकिन आप जैसे भी अपना Resume बनायें, नीचे दी हुई बातों का ज़रूर ध्यान रखें:
  • याद रहे, Resume आपकी autobiography नहीं है. तो जितना ज़रूरी हो, उतनी ही जानकारी दें. 
  • आपको शायद colors बहुत पसंद हैं, लेकिन Resume में 2 से ज्यादा colors ना चुने. 
  • Resume में objective का ना उपयोग करें. इसके बजाय एक अच्छी सी career summary लिखें. 
  • केवल वही hobbies mention करें जो आपके job profile से match करती हैं. 
  • कोई भी बात झूठ ना बोलें, वरना आपको interview में परेशानी हो सकती है. 
4. Networking करते रहें (Leverage the power of networking):

Networking की importance को कभी भी ignore नहीं किया जा सकता. जब आप अपनी dream job पहचानते हैं तो यक़ीनन आप कुछ ऐसी companies का भी पता लगाते हैं जहाँ आप काम करना चाहेंगे. तो अगला step है, इन companies में contacts बनाना. LinkedIn पर उस Company को search करें, और उनके employees को request भेजे. उनसे बात करें. अपने दोस्तों में भी पता लगाएं कि क्या आपका कोई जानकार उस Company में पहचान रखता है? इससे आपको इस Company को समझने में मदद मिलेगी. साथ ही, आप ये भी समझ पाएंगे कि Company किस तरह का काम करती है. इसके अलावा, वैसे भी ज्यादा से ज्यादा professionals से बाते करें, ideas share करें, इससे आपकी knowledge बढ़ेगी और क्या पता, आगे चल कर ये आपको किसी अच्छी Company में recommend कर दें.

5. असफलता से निराश बिलकुल ना हों (Never get defeated by failures)

कई बार ऐसा होता है कि हर चीज़ आपके favor में होते हुए भी आपका काम नहीं बन पाता. लेकिन इसका मतलब ये नहीं है कि आप सब छोड़ कर हार मन कर बैठ जाएँ. हालाँकि ये स्वाभाविक है लेकिन आपको ये आदत बदलनी होगी, वरना आप आगे ही नहीं बढ़ पाएंगे. जीत हार जीवन का एक हिस्सा है. कहा भी गया है, "race में हारता वो नहीं जो गिर जाता है, बल्कि वो है जो गिर कर उठता नहीं.".

तो अगर आपको कभी असफलता मिलती है तो उससे सीखें. देखें कि कहाँ आपने गलती की, या कहाँ आप improve कर सकते हैं और फिर से try करें. जल्दी ही आपको आपकी dream job ज़रूर मिलेगी.

दोस्तों, उम्मीद है आप ये tips ज़रूर follow करेंगे. हर अच्छी चीज़ धैर्य और मेहनत मांगती है और अगर आपमें ये दोनों गुण है तो आप सफल ज़रूर होंगे.

Oct 4, 2018

गणेशोत्सव पर निबंध, गणेश चतुर्थी पर निबंध

गणेशोत्सव पर निबंध, गणेश चतुर्थी पर निबंध

गणेशोत्सव पर निबंध, गणेश चतुर्थी पर निबंध
गणेशोत्सव, गणेश चतुर्थी। 

गणेशोत्सव पर निबंध, गणेश चतुर्थी पर निबंध, गणेश उत्सव निबंध, गणेश उत्सव का महत्व।

 प्रस्तावना: गणेश चतुर्थी/उत्सव हिंदुओं का प्रमुख त्योहार है। इसे बहुत ही धूमधाम से मनाया जाता है इसे घर के सभी सदस्य ही बडी खुशियों के साथ मनाते हैं। हमारे हिंदू धर्म में हर कार्य से पहले गणेश जी को सर्व प्रथम पूजा जाता है। इस त्योहार को ना केवल हिंदू बल्कि अन्य धर्म के लोग भी बड़े उत्साह के साथ मनाते हैं। पुराणों के अनुसार गणेश चतुर्थी के दिन गणेश जी का जन्म हुआ था। यह त्योहार खासतौर से महाराष्ट्र में मनाया जाता है। परंतु अब यह भारत के सभी राज्य में बहुत ही हर्षोल्लास और धूमधाम के साथ मनाया जाता है।

गणेश चतुर्थी/उत्सव कब मनाया जाता है? गणेश चतुर्थी शिव पुराण में भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को गणेश उत्सव मनाया जाता है। जबकि गणेश पुराण के अनुसार यह गणेशअवतार भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी चतुर्दशी को हुआ था। गण+पति= गणपति। संस्कृतकोशानुसार गण अर्थात पवित्रक । पति अर्थात  स्वामी गणपति अर्थात पवित्र के स्वामी कहा जाता है और इस दिन को बड़े धूमधाम से गणेश महोत्सव के रूप में मनाया जाता है।

गणेश चतुर्थी/उत्सव की शुरुआत

1983 में से लोकमान्य तिलक ने  सामाजिक कार्यकर्ता भारतीय राष्ट्रवादी तथा स्वतंत्रता सेनानी के द्वारा इस
शुरुआत की उस समय अंग्रेजी शासन से भारतीयों को बचाने के लिए एक गणेश पूजा की प्रथा बनाई उत्सव को एक दंता, असीम शक्तियों की भगवान, असीम शक्तियों के भगवान, हरम्बा, विघ्नहर्ता लंबोदरा विनायक,  भगवानों की बुद्धि, स्मृति तथा संपत्ति के भगवान आदि के नाम से जाना जाता है। ओर इस उत्सव की शुरआत हुई।

गणेश उत्सव की एक प्रसिद्धकथानुसार 
देवदत्त पटनायक के मुताबिक गणेश के जन्म की कहानी कुछ इस प्रकार । वह कहते है कि एक बार माता पार्वती ने घर में स्नान करते समय अपने शरीर के मेल से एक पुतला बनवाया था। उसको पुतले को सजीव करके मां पार्वती ने उनका गणेश नाम रख दिया ओर उसे मुख्य द्वार जाकर पहरा देने के लिए कहा। पार्वती जी ने गणेश जी से कहा कि पुत्र देखते रहना जब तक मैं स्नान ना कर लूं तब तक कोई भी भीतर ना आ सके। उस समय भगवान शिव जी भोगवती जगह पर गए हुए थे। जब वो वहां से वापस आए तो घर में जाने लगे तब गणेश जी ने अंदर उन्हें अंदर  जाने से रोका इस शिव जी को गुस्सा आ गया और उन्होंने गणेश जी का सिर धड़ से अलग कर दिया। जब पार्वती पार्वती मां को पता चला।

तो वो विलाप करने लगी और गणेश जी को  फिर से जीवित करने के लिए कहने लगी। तब शिव जी ने हाथी के बच्चे का मुँह काटकर गणेश जी के धड़ पर लगा दिया और उन्हें जीवित भी कर दिया। और भाद्रपक्ष शुक्ल चतुर्थी के दिन घाटी इस घटना को गणेश जी के नाम कर दिया और कहा कि जो भी व्यक्ति या देवीदेवता जब तक सर्वप्रथम गणेश जी को नही पूजेंगे तब तक व्यक्ति की कोई भी पूजा सफल नही कहलाएगी। तब उसके बाद से ही गणेश चतुर्थी पूजा की शुरुआत हुई। ओर सभी व्यक्ति इन की स्थापना करके सर्वप्रथम पूजनीय गणेश जी से कामना करते है। कि हमारे सभी कार्य सफल और शुभ हो।और हमे खुशया प्राप्त हो।

गणेश महोत्सव, गणेशोत्सव,  गणेश चतुर्थी
हमारे देश में गणेश महोत्सव का एक पारंपरिक को सांस्कृतिक त्योहार है। इस महोत्सव का सबसे ज्यादा असर युवा वर्ग को बच्चों में देखने को मिलता है ।इस त्यौहार को समारोह के बजाय समुदाय की भागीदारी के माध्यम से मनाया जाता है ।इस समारोह में पंडाल तैयार करते हैं । समुदाय के लोग पूजा करने के लिए गणेश जी की प्रतिमा लाते हैं वह दूसरों की तुलना में अपने पंडाल को ज्यादा सुंदर दिखाने के लिए जो उनसे बनता है वो ये करते है। अपनी मूर्ति को सुंदर दिखाने के लिए सुंदर फूल, माला ,बिजली की रोशनी आदि का उपयोग करते हैं ।और तरह-तरह से पंडाल को सजाते हैं पंडित जी लाल सफेद धोती के साथ मूर्ति की स्थापना मंत्र उच्चारण के साथ करते हैं ।फिर प्रसाद आदि चडाते है। जिसमें गणेश जी का प्रिय लड्डू ओर मोदक तो जरूर शामिल रहता है।

इस प्रकार पूरे दस दिन तक यह समारोह चलता है। ओर  अनंत चतुर्थी को गणेश जी की पूजा अर्चना करने के बाद सभी सदस्य मिलकर मूर्ति का विसर्जन करते हैं। और उनसे पार्थना करते है कि। है गणपति महाराज अगले बरस तू जल्दी आना और हमारे सभी दुखो ओर दर्द को हर कर अपने साथ ले जाना।

उपसंहार
इस प्रकार यह गणेश उत्सव हम हिंदुओं का अति महत्वपूर्ण और हर्षोल्लास का त्योहार है जिसमें हम भगवान से प्रार्थना करते हैं कि।

         वक्रतुंड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ
           निर्विघ्नम कुरु देव शुभ कार्यषु सर्वदा।

मतलब है हाथी के जैसे विशालकाय जिसका तेज सूर्य के सहस्त्र किरणों के समान है। बिना विघ्न के मेरा कार्य पूर्ण हो और सदा  ही मेरे लिए शुभ हो। ओर ऐसी कामना करते हैं और उनसे विनती करते हैं कि धर्मों में भेदभाव मिटाकर हम हमेशा ही हम इस उत्सव को खुशी के साथ मनाएं और अगले बरस फिर आपके आगमन की तैयारी करें।

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