Aug 16, 2018

अटल बिहारी वाजपेयी -निधन 16 August 2018 और परिचय।

अटल बिहारी वाजपेयी -निधन 16 August 2018 और परिचय।

प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी
पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी

पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी जी का निधन 16 अगस्त 2018 

तीन बार प्रधानमंत्री रहे भाजपा के वरिष्ठ नेता अटल बिहारी बाजपेयी का गुरुवार को नई दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) में निधन हो गया। राजघाट के पास स्थित राष्ट्रीय स्मृति भवन में उनका अंतिम संस्कार किया गया।

बीते 36 घंटों से उनकी हालत नाज़ुक बनी हुई थी और तमाम प्रयासों के बावजूद उनके स्वास्थ्य में कोई सुधार नहीं हो पाया. तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर रखा गया था।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने निधन पर शोक व्यक्त करते हुए ट्वीट किया, ‘अटल जी आज हमारे बीच में नहीं रहे, लेकिन उनकी प्रेरणा, उनका मार्गदर्शन, हर भारतीय को, हर भाजपा कार्यकर्ता को हमेशा मिलता रहेगा. ईश्वर उनकी आत्मा को शांति प्रदान करे और उनके हर स्नेही को ये दुःख सहन करने की शक्ति दे. ओम शांति!’

अपूरणीय क्षति बताते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि उन्होंने जीवन का प्रत्येक पल राष्ट्र को समर्पित कर दिया था और उनका जाना, एक युग का अंत है.


एक अन्य ट्वीट में मोदी ने कहा, ‘यह अटलजी कर दृढ़ता और संघर्ष की वजह से ईंट दर ईंट भाजपा का निर्माण हुआ. पार्टी का संदेश फैलाने के लिए उन्होंने पूरे भारत का भ्रमण किया था, इसी की वजह से भाजपा राष्ट्रीय राजनीति और तमाम राज्यों में मज़बूती के साथ उभरी.’

मोदी ने कहा कि यह अटल बिहारी वाजपेयी के अभूतपूर्व नेतृत्व के कारण ही 21वीं सदी में मज़बूत, समृद्ध और समावेशी भारत की नींव स्थापित हुई. विभिन्न क्षेत्रों में उनकी भविष्योन्मुखी नीतियों ने प्रत्येक भारतीय नागरिक के जीवन को छुआ.

उन्होंने कहा, अटल जी का जाना मेरे लिए निजी और कभी न भर सकने वाली क्षति है. उनके साथ मेरी तमाम यादें जुड़ी हुई हैं. मेरे जैसे कार्यकर्ताओं के लिए वह प्रेरणा थे. मैं उनकी बुद्धिमत्ता और असाधारण हाज़िरजवाबी को हमेशा याद रखूंगा


अटल बिहारी वाजपेयी जीवन परिचय 

अटल बिहारी वाजपेयी का जन्म 25 दिसम्बर 1924 को ब्रह्ममुहर्त में 4.30 से 5 के बीच ग्वालियर मध्य प्रदेश में हुआ था | इनके पिता का नाम कृष्ण बिहारी वाजपेयी था जो मध्य प्रदेश रियासत में अध्यापक थे | इनकी माता का नाम कृष्णा वाजपेयी था | अटल जी की प्राम्भिक शिक्षा ग्वालियर के विक्टोरिया कालेज में हुई यह से उन्होंने अपनी बी.ए. की डिग्री प्राप्त की वर्तमान में इस कॉलेज का नाम रानी लक्ष्मी बाई कॉलेज हे | फिर कानपूर के डी.ए.वी. कॉलेज से राजनीती शास्त्र में एम.ए. की डिग्री प्राप्त की | बाद में अपने पिता के साथ कानपूर से ही एल.एल.बी. की शिक्षा प्रारम्भ परन्तु एस कार्य को अधुरा छोड़ पूर्ण रूप से संघ से जुड़ गए |
अटल बिहारी वाजपेयी
अटल बिहारी वाजपेयी 

एक कवि के रूप में अटल जी एक श्रेष्ठ वक्ता और हिंदी के सिद्ध कवि हे | कियोकी काव्य के गुण अटल जी को विरासत में मिले | इनके पिता कृष्ण बिहारी वाजपेयी अध्यापक होने के साथ हिंदी और ब्रज भाषा के सिद्ध कवि थे | छात्र जीवन से अटल जी की काव्य में रूचि थी, महात्मा रामवीर की अमर रचना “विजय पताका” पड़कर अटल जी काव्य रचना एवं हिंदी साहित्य से और व्यापक रूप से जुड़ गए |


और अध्यन काल से ही वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्वयंसेवक बने, और तभी से राष्ट्रीय स्तर की वाद वादविवाद प्रतियोगिता में भाग लेते रहे | और आगे चल कर डा श्यमा प्रसाद मुखर्जी एवं पंडित दीनदयाल उपाध्याय से राजनीती की शिक्षा ली, और साथ ही साथ पांचजन्य, राष्ट्रधर्म, देनिक सवदेश, वीर अर्जुन, जेसे पत्र पत्रिका का संपादन भी किया | हलाकि अपनी राजनितिक सक्रियता के चलते वे अपने काव्य गुण का  ज्यादा उपयोग नहीं कर पाए |

सन 1955 में अपना पहला लोकसभा का चुनाव लड़ कर अपने राजनितिकजीवन की शुरुवात की, हलाकि इस चुनाव में उन को उनको हार का सामना करना पड़ा | सन 1957 में बलरामपुर उत्तरप्रदेश से दुबारा लोक सभा चुनाव जीत कर लोकसभा पहुचे | सन 1957 से 1977 तक जनता पार्टी की स्थापना तक जनसंघ के संसदीय दल के नेता रहे | मोरारजी देसाई सरकार में सन 1977 से 1979 तक विदेश मंत्री रहे |

सन 1980 में जनता पार्टी छोड़ कर, भारतीय जनता पार्टी की स्थापना में मदद की | और सन  6 अप्रेल 1980  को भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष बने | दो बार राज्य सभा सदस्य चुने गए | पहली बार सन 16 मई 1996 से 1 जून  1996 तक प्रधान मंत्री बने ये कार्यकाल 16 दिन चला | दूसरी बार सन 19 मार्च 1998  को अटल जी दूसरी बार प्रधान मंत्री बने ये कार्यकाल 13 माह तक चल | सन 17 अप्रेल 1999 एक मत से सरकार बहुतमत से बेदखल कर दिया गया |


 सन 13 अक्टूबर 1999 को अटल जी तीसरी बार प्रधान मंत्री बने ये कार्यकाल पुरे पांच साल 22 मई 2004 तक चला | अपना कार्यकाल पूरा करने वाली पहली गेरकांग्रेसी सरकार थी | सन 2005 में अटल जी सक्रीय राजनीती से सन्यास ले लिया | वर्तमान में वे अपने 6A कृष्णा मेनन मार्ग नई दिल्ली स्थित सरकारी आवास में रहते हे |

Aug 9, 2018

 सिंधु घाटी सभ्यता, मोहनजोदडो, हड़प्पा सभ्यता का इतिहास और रहस्य।

सिंधु घाटी सभ्यता, मोहनजोदडो, हड़प्पा सभ्यता का इतिहास और रहस्य।

जब-जब प्राचीन इतिहास की चर्चा होती है तो सिन्द्धु घाटी सभ्यता का नाम इतिहास के पन्नों में बहुत ही मशहूर है जब-जब सिंधु घाटी सभ्यता का नाम आता है उस सिंधु घाटी सभ्यता के सबसे बड़े रहस्यमई नगर मोहनजोदड़ो का नाम सबसे पहले आता है जो अब दक्षिणी एशिया के सिंधु नदी के पश्चिम में लरकाना डिस्ट्रिक्ट पाकिस्तान में मौजूद है। 
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 सिंधु घाटी सभ्यता, मोहनजोदडो, हड़प्पा सभ्यता का इतिहास और रहस्य। 

यह एक समय भारत का हिस्सा हुअा करता था परन्तु आजादी के बाद बंटवारे के साथ यह ऐतिहासिक शहर पाकिस्तान के हिस्से में चला गया। मोहनजोदड़ो का अर्थ होता है मुर्दों का टीला। मनुष्य द्वारा निर्मित विश्व का सबसे पुराना शहर माना जाता है। 

आखिर क्या है ? मोहनजोदडो का इतिहास। हड़प्पा सभ्यता से इसका क्या संबंध है मोहनजोदारो इतिहासकारों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है क्यों मोहनजोदाड़ो का हिंदू धर्म से संबंध बताया जाता है। 
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मोहनजोदड़ो की खोज 1922 में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के ऑफिसर राखल दास बनर्जी ने की थी यह शहर सिंधु नदी के किनारे स्थित है हड़प्पा में २ साल तक बहुत ही ज्यादा खुदाई के बाद हड़प्पा से 590 किलोमीटर दूर  उत्तर दिशा में मोहनजोदडो की खोज हुई थी बाद में मोहनजोदड़ो की ज्यादातर खुदाई 1964 से 1965 तक Dr. George F. Dales ने करवाई थी इसके बाद खुदाई को रोक दिया गई ताकि सर्वेक्षण को सुरक्षित रखा जा सके । माना जाता है यह शहर 200 हेक्टर क्षेत्र में फैला हुआ था कहा जाता है सौ साल में जितनी खुदाई हुई है यह मात्र  इसकी  एक तिहाई ही है इस की खुदाई में धातु की मूर्तियां और बहुत सारी मूल्यवान वस्तुएं शामिल है कहा जाता है। 

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यह सभ्यता 5500 साल पुरानी होने के साथ-साथ इसकी जनसंख्या 40000 से भी अधिक थी आईआईटी खड़गपुर  और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के अनुसार यह 5500 नहीं बल्कि 8000 साल पुरानी सभ्यता थी मोहनजोदारो नगर के लोग बहुत बुद्धिमान थे इतने साल पहले बने इस शहर को इतने व्यवस्थित ढंग से बनाया गया है कि जिसकी कल्पना भी हम नहीं कर सकते हैं पाकिस्तान के सिंध में लगभग 4600 साल पहले इसका निर्माण हुआ था खुदाई के दौरान इस शहर की बारे में लोगों को जानकारी हुई इसमें बड़ी-बड़ी इमारतें जलकुंड, मजबूत दीवार वाले घर, सुंदर चित्र कार्य, मिट्टी और धातु की बनी बर्तन मुद्राएं मूर्तियां तराशे हुए पत्थर और भी बहुत सी चीजें मिली जिससे यह पता चलता है कि यह एक व्यवस्थित शहर बना हुआ था जैसे हम आज रहते हैं वैसे ही वह लोग भी घरों में रहते थे, खेती किया करते थे । 

इस प्राचीन सभ्यता के लिए पाकिस्तान को एक नेशनल आइकन माना जाता है सन 1856 में एक अंग्रेज इंजीनियर रेल रोड बनाते समय इस प्राचीन सभ्यता को खोज निकाला था रेलवे ट्रैक बनाने के लिए यह इंजीनियर पत्थरो की तलाश कर रहा था जिससे वह गिट्टी बना सके यहां उन्हें बहुत मजबूत और पुराने ईट मिली जो बिल्कुल आज की ईट की तरह बनी हुई थी वहां के एक आदमी ने बताया इस सब के घर इन्हीं ईट से बने हैं जो उन्हें खुदाई में मिलते हैं तब इंजीनियर समझ गया कि यह जगह किसी प्राचीन शहर के इतिहास से जुड़ी है इस इंजीनियर को सबसे पहले सिंधु नदी के पास बसे इस सबसे पुरानी सभ्यता के बारे में पता चला था सिंधु नदी के पास होने के कारण इस स्थान को सिंधु घाटी की सभ्यता कहा गया इस प्राचीन सभ्यता के समय एक और प्राचीन सभ्यता की थी जिसमें  यह बात पुरातत्ववेत्ताओं द्वारा कही गई है शहर के चारों ओर ईट की मोटी दीवार थी जो रक्षा के लिए बनाई गई थी इसके साथ ही पता लगाया गया कि कुछ लोग ईट के घरों में रहते थे जो तीन तीन मंजिल के बने हुए थे कुछ घरों में बाथरूम भी थे जिसमें पानी निकास के लिए नालियां भी थी दुनिया में पहली नाली का निर्माण यहीं से हुआ। 

पुरातत्व के अनुसार लोग खेती भी किया करते थे उन्हें गेहूं चावल उगाना आता था लोग जानवर भी पाला करते थे। भारतीयों द्वारा मोहनजोदड़ो की खोज सन 1922 में राखल दास बनर्जी जो पुरातत्व सर्वेक्षण के सदस्य थे पाकिस्तान में सिंधु नदी के पास में खुदाई का काम किया था उन्हें बुद्ध का स्तूप  सबसे पहले दिखाई दिया जिसके बाद आशंका जताई गई कि यहां नीचे कुछ इतिहास दबा हुआ है आगे बढ़ाते हुए। 1925 में जॉन मार्शल ने खुदाई का काम करवाया सन 1965 तक इसे भारत के अलग-अलग लोगों की कमांड में करवाया गया लेकिन इसके बाद इस खोज को बंद करा दिया गया और कहा गया कि खुदाई की वजह से प्रकृति को नुकसान हो रहा है।
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मोहनजोदड़ो की विशेषताएं :-  खोज के दौरान पता चला यहां के लोग गणित का भी ज्ञान रखते थे इन्हें जोड़ घटाना मापना सब आता था जो एक ईंट उस समय अलग अलग शहर में उपयोग की गई थी वह सब एक ही वजन व साइज की थी मानो की एक ही सरकार के द्वारा बनवाया गया था पुरातत्ववेत्ताओं के अनुसार सिंधु घाटी सभ्यता के लोग गाने बजाने खेलने कूदने के भी शौकीन थे। 

उन्होंने कुछ म्यूजिक इंस्ट्रूमेंट भी खोज निकाले थे वे लोग साफ सफाई पर ध्यान देते थे उन्होंने कंकाल  के दांत का निरीक्षण भी किया था जिससे यह पता चला था कि उनकी नकली दांत भी लगे हुए मतलब प्राचीन सभ्यता में डॉक्टर भी हुआ करते थे। 

कुछ लोगो ने बहुत से धातु के गहने व कॉटन के कपड़े भी खोज निकाले थे यह गहने आज भी बहुत से संग्रहालय में रखे हुए हैं इसके अलावा बहुत सी चित्रकारी, मूर्तियां,सिक्के, दिए,बर्तन, बाज़ार भी मिले थे जिन्हें देश विदेश के संग्रहालयों में रखा गया है। 

खोज में पता चला था कि यह लोग खेती भी किया करते थे कुछ इससे यह सिद्ध होता है कि इनको पढ़ना लिखना भी आता था जहां के लोग सोने चांदी के गहने भी पहनते थे। 

ये एक रहस्या बना हुआ है और अनुमान लगाया जाता है : कहते हैं प्राचीन सभ्यता में 5000000 तक लोग रहते थे। वह भूचाल आया और सब तहस-नहस कर दिया। इसी भूचाल के चलते मोहनजोदड़ो दब गया और भूकंप के बाद हिमालय पर्वत बन गया कुछ खोज से पता चलता है कि उस समय वहां रहने वालों के दुश्मन भी हुआ करते थे कुछ हमलावरों ने वहां हमला कर पूरे शहर को नष्ट कर दिया था अभी पुरातत्व वाले और खोज में लगे हुए हैं पता कर रहे हैं कि कैसे इस शहर का निर्माण हुआ वहां रहने वालों ने कैसी इतने अग्रिम सभ्यता का निर्माण किया और कैसे इनका अंत हुआ? सब सवालों के जवाब के लिए पुरातत्ववेत्ताओं की खोज जारी है

इस वीडियो को सुने सिंधु घाटी सभ्यता, मोहनजोदडो, हड़प्पा सभ्यता का इतिहास के बारे में कुछ मजेदार बातें आपको पता चलेगी। 


तो आपको हमारा ये छोटा सी पेशकस कैसा लगा। आशा करते है आपको ये इतिहास से सम्बंधित रोचक बातें पढ़ने में अच्छा लगा। आप अपने मित्रो से इस लेख को ज्यादा से ज्यादा शेयर करे। 

Jul 25, 2018

सम्राट अशोक [Samrath-Ashoka] भारत का मौर्य सम्राट

सम्राट अशोक [Samrath-Ashoka] भारत का मौर्य सम्राट

सम्राट अशोक [Samrath-Ashoka] भारत का मौर्य सम्राट
सम्राट अशोक -भारत का मौर्य सम्राट 

सम्राट का अर्थ होता है पूरे राष्ट्र को जीतने वाला।
आइए हम जानते हैं #सम्राट अशोक के इतिहास के बारे में। 
चंद्रगुप्त मौर्य की मृत्यु के बाद उनका राजपाट उनके बेटे बिंदुसार द्वारा संभाला गया कुछ समय बाद ही बिंदुसार की मृत्यु हो गई । बिंदुसार का एक पुत्र अशोक (सम्राट अशोक) था वही अपने पिता की मृत्यु के बाद संपूर्ण साम्राज्य का शासक बना, भूतकालीन इतिहास में ऐसा कोई सम्राट नहीं हुआ जो अशोक के समान सभी गुणों में संपन्न हो। 

अशोक का शासनकाल भूतकालीन इतिहास के लिए अत्यंत गौरवमय रहा क्योंकि उस काल में अशोक ने अपनी असाधारण योग्यता क्षमता से भारत को दुनिया के सामने एक विशाल राष्ट्र की तरह खड़ा कर दिया था । किसी इतिहासकार ने कहा है कि इतिहास के पन्नो को रंगने वाले हजार राजाओं मे अशोक का नाम सर्वोपरि सूर्य के समान है उसे विश्व की महान विभूतियों मे से एक कहा जा सकता है, श्रेष्ठ प्रशासनिक व्यवस्था, धर्म का सरंक्षी, हृदय की दया व उदारता, कला का विकास एवं प्रजा की हित की दृष्टि से सम्राट अशोक एक महान राजा था,  अशोक ने शस्त्र विजय के स्थान पर धर्म विजय प्राप्त करने की बात कही। अशोक वे सांस्कृतिक उपलब्धियां है जो विश्व की इतिहास में अतुलनीय है,  इसके साथ उसकी राजनीतिक उपलब्धियां जो उसके अमर कीर्ति का आधार है। पूरे संसार का भौतिक एवं आध्यात्मिक उत्थान अशोक के जीवन का परम आदर्श था ।

प्रारंभिक जीवन और परिवार - अशोक की माता का नाम सुभद्रांगी (रानी धर्मा) था, अशोक की माता चंपा के एक ब्राह्मण की पुत्री थी इतिहास में उनके लिए दर्शनीया, प्रसादिका और जनकल्याणी का प्रयोग किया गया है तो कहीं बौद्ध धर्म ने उसका नाम धर्मा बतलाया गया है, इनका दूसरा बेटा विगताशोक-तिष्य अशोक का सगा भाई था। 

पुराने इतिहास में अशोक के पिता बिंदुसार की 16 रानियों तथा उनसे उत्पन्न 101 पुत्रों का उल्लेख मिलता है जिसमें सुसीम अथवा सुमन सबसे बड़ा था इतिहास के पन्नों से अशोक की अनेक पत्नियों की जानकारी मिलती है। जिसमें विदिशा की श्रेष्ठी पुत्री देवी (शाक्य कुमारी के रूप में पहचानी जाती थी), असन्धमित्रा, तिक्षयरक्षिता, पद्मावती कारुवाकी अथवा चारूवा मुख्य थी। देवी से महेंद्र नामक पुत्र और संघमित्रा नामक पुत्री हुई, पद्मावती से कुणाल और धर्म विवर्धन नामक पुत्र हुआ, कारुवाकी से तीवर अथवा तीवल नामक पुत्र हुआ। इतिहास में अशोक के एक अन्य पुत्र जालौक का भी उल्लेख मिलता है तथा उनकी एक अन्य पुत्री भी थी जिसका नाम चारुमती था।

प्रांत के शासक के रूप में अशोक - सम्राट अशोक बिंदुसार के शासन के समय  उपराजा के तौर पर शासन संबंधी अनुभव प्राप्त कर लिया था, उन्हें सर्वप्रथम अवंति प्रांत का सूबेदार नियुक्त किया गया था जहां उन्होंने विद्रोही तत्वों का नाश कर जनता में शांति व्यवस्था तथा संतोष जगाया उसकी इस जीत से खुश होकर उनके पिता बिंदुसार ने उन्हें तक्षशिला का सूबेदार बनाया क्योंकि उस राज्य में भ्रष्ट राजाओं के शोषण के विरुद्ध जनता ने विद्रोह शुरू कर दिया था। 

अशोक वहां पर भी जीत पाने में कामयाब रहा लेकिन  बिंदुसार के अंतकाल में तक्षशिला में पुनः विद्रोह शुरू हो गया था पर इस बार बिंदुसार ने अपने बड़े राजकुमार सुसीम को भेजा लेकिन प्रयास असफल रहा तब पुन: अशोक को भेजा गया जिसने सफलतापूर्वक कामयाबी हासिल की, वहां के कहीं मंत्रियों का समर्थन उसे मिल गया कुछ दिनों के बाद ही बिंदुसार की मृत्यु हो गई अपने समर्थ मंत्रियों जिनमें राधागुप्त प्रमुख था, के सहयोग से अशोक राजगद्दी पर आसीन हुए। 

उत्तराधिकारी के लिए संघर्ष - इतिहास से पता चलता है कि बिंदुसार की मृत्यु के बाद सिंहासन के लिए उनके पुत्रों में घमासान संघर्ष हुआ था इस संघर्ष में अशोक ने अपने बड़े भाई सुमन को हरा कर मार डाला और मगध के सिंहासन पर अपना आधिपत्य जमा लिया था इस संघर्ष में अशोक के 100 के करीब भाई मारे गए थे अशोक के मगध सम्राट बनने तथा उसके राज्याभिषेक में 4 वर्ष का अंतर था वह अंतर उनके उत्तराधिकार संघर्ष का काल था, बिंदुसार अपने बड़े पुत्र सुसीम को अपना उत्तराधिकार बनाना चाहते थे लेकिन महामंत्री खल्लाटक एवं मंत्री राधागुप्त अशोक के पक्ष में थे अंततः बिंदुसार की मृत्यु के बाद मंत्रियों की सहायता से अशोक शासन पाने में कामयाब रहा ।

अशोक के अपने शासनकाल में दो प्रमुख विजय प्रशंसनीय रही जिसमें काश्मीर की विजय तथा कलिंग विजय प्रमुख थी ।

अशोक के अन्य नाम - अशोक को तीन प्रमुख नामों से पुकारा जाता था जिसमें एक अशोक दूसरा देवाना प्रिय प्रियदर्शी और तीसरा राजा । ऐसे सम्राट को कोटि-कोटि नमन जिनसे हमारा राष्ट्र हमेशा गौरवान्वित महसूस करता हो।

कुछ महत्वपूर्ण सवाल जो अक्सर पूछे जाते है। Some question/Answer About Samrath-Ashoka . 

सवाल-सम्राट अशोक की  माता पिता  का नाम ?
जवाब- पिता-बिन्दुसार और माता- सुभद्रांगी (रानी धर्मा)

सवाल-सम्राट अशोक की पत्नी का नाम ?
जवाब- देवी, कारुवाकी, पद्मावती, तिष्यरक्षिता

सवाल- सम्राट अशोक किस वंश के थे ? उनका धर्म क्या था  ?
जवाब- मौर्य वंश और जाती बौद्ध धर्म

सवाल- सम्राट अशोक का राजकाल?
जवाब- 269 ईसा पूर्व से 232 ईसा पूर्व

सवाल- सम्राट अशोक की मित्यु ?
जवाब- 232 ईसा पूर्व

📣 आपके पास भी सम्राट अशोक [Samrath-Ashoka] से जुड़े कोई भी सवाल और उसके जवाब है तो हमें कमेंट में बातये हम जल्द ही आपके सवाल को यहाँ जोड़ेंगे। 

Jul 12, 2018

कम सिबिल स्कोर के साथ भी व्यक्तिगत ऋण पाने के लिए युक्तियाँ/सुझाव [CIBIL Score improve tips]

कम सिबिल स्कोर के साथ भी व्यक्तिगत ऋण पाने के लिए युक्तियाँ/सुझाव [CIBIL Score improve tips]

CIBIL SCORE : आपका क्रेडिट इन्फॉर्मेशन ब्यूरो इंडिया लिमिटेड (CIBIL) स्कोर एक तीन अंकों वाला नंबर है जो पूरी तरह से आपका क्रेडिट इतिहास है। यह स्कोर 300 से 900 तक होता है, जहां वित्तीय मामलों में 750 से ऊपर का स्कोर आपको योग्य बनाता है। आपका स्कोर जितना अधिक होगा, लोन देने वाले आपको और भी ज्यादा जिम्मेदार मानेंगे। यह उन्हें दिखाता है कि आप समय पर लोन चुका सकते हैं।
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Image: google | how to improve cibil score

जब व्यक्तिगत ऋण की बात आती है, तो आपका CIBIL स्कोर और भी महत्वपूर्ण होता है। यह लोन देने वालों की नज़रों में आपकी विश्वसनीयता और विश्वास बनाता है। यह कहना सही नहीं है कि आपको कम CIBIL स्कोर के साथ पर्सनल लोन नहीं मिल सकता है। उधार देने वाले आपके आवेदन को अनुमोदित तो कर सकते हैं, मगर चूंकि आप एक जोखिम वाले व्यक्ति हो सकते हैं तो आपसे ब्याज अधिक लेंगे।

तो, तुरंत ही एप्रूवल लें और बेहद मामूली दरों पर पर्सनल लोन लें, यहां वे तरीके हैं जिनमें आप अपना CIBIL स्कोर सुधार सकते हैं।

समय पर ईएमआई(EMI) भुगतान करें

अगर हम ईएमआई समय पर नहीं देते हैं या देर से देते हैं तो यह भी आपके सिबिल स्कोर पर प्रतिकूल प्रभाव डालते हैं। ईएमआई भुगतान की मिसिंग डेडलाइन के साथ भी यही होता है। तो, ईएमआई हमेशा समय पर दें और उसके लिए एक रिमाइंडर लगा लें। आप अपने बैंक के साथ एक ऑटो-डिडक्शन भी कर सकते हैं या ईएमआई भुगतान के लिए एक अलग नकद शेष रख सकते हैं। इस तरह, आप की न तो कोई डेडलाइन ही मिस होगी और न ही आपको यह चिंता होगी कि आपके पास जरूरी पैसा नहीं है, यही दो बातें हैं जो आपके क्रेडिट स्कोर को प्रभावित कर सकती हैं।

जितनी जल्दी हो सके  लोन चुकादें।

यदि आप समय के साथ लोन की समय सीमा बढ़ाते जाते हैं, तो यह आपके क्रेडिट स्कोर को नकारात्मक रूप से दिखाना शुरू कर देता है। इसलिए, लोन को बकाया रखने के बजाय इसे बोनस या निवेश से मिलने वाली आय के प्रयोग से चुकाने की कोशिश करें। जल्दी पुनर्भुगतान आपको क्रेडिट स्कोर को बढ़ावा देगा।

एक स्थिर आय पोर्टफोलियो बनाएँ।

एक सुरक्षित नौकरी आपको आश्वस्त करती है कि आपके पास ईएमआई का भुगतान करने के लिए जरूरी माध्यम है। यह आपके क्रेडिट स्कोर में बदल जाएगा। इसके अलावा, निवेश के माध्यम से आय के अन्य स्रोतों और / या किराये की संपत्ति से आय देखें। इससे लोन चुकाया दे सकता है।

यह भी पढ़ें: पर्सनल लोन लेना हुआ आसान। Personal loan लेने से पहले महत्पूर्ण बातें।

समय पर कर चुकाएं

यदि आप नियमित रूप से कर देते हैं तो यह आपके क्रेडिट स्कोर में जोड़ा जाएगा। आपकी बचत और संपत्ति के लिए आपकी आय और व्यय के लिए एकाउंटिंग लोन देने वालों की नज़रों में आपका मूल्य बढ़ाएगा। इसलिए, सुनिश्चित करें कि आपने सभी कर समय पर चुकाए हैं और वह सारी जानकारी है जिसे आप कानूनी रूप से घोषित करने के लिए बाध्य हैं। एक बार ऐसा करने के बाद, आपका क्रेडिट स्कोर इसे सकारात्मक तरीके से प्रतिबिंबित करेगा। यह विशेष रूप से महत्वपूर्ण है यदि आप किसी भी प्रकार का लोन ले रहे हैं। दस्तावेज दाखिल करते समय आपको पिछले कुछ वर्षों से अपनी कर रसीद जमा करनी पड़ सकती है।

चूंकि पर्सनल लोन पैसों की अलग-अलग ज़रूरतों को पूरा करने का एक आसान और तेज़ तरीका है, इसलिए अपने सीआईबीआईएल स्कोर पर ध्यान दें। एक बार जब आप अपने सीआईबीआईएल स्कोर की जांच कर लेंगे, और यदि कम हो तो अपने स्कोर को बढ़ाने का प्रयास करें और बजाज फिनसर्व से पर्सनल लोन लें। यहां आप एक लचीली अवधि, जमानत मुक्त, सरल पात्रता और लचीले प्रीपेमेंट का आनंद ले सकते हैं। पर्सनल लोन, होमलोन, बिजनिस लोन और कई अन्य वित्तीय उत्पादों के लिए बजाज फिनसर्व प्री-एप्रूव्ड ऑफर भी देखें। न केवल यह फाइनेंसिंग की प्रक्रिया को सरल करता है बल्कि बचत के समय भी आपकी मदद करता है।
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क़र्ज़ लेने से पहले कुछ बातों का ध्यान अवश्य रखें 

चाहें वो गृह ऋण हो या व्यापार ऋण, अगर आप कुछ बातों का ध्यान रखते हैं तो आपको एक ऋण को सँभालने में कभी कोई समस्या नहीं आएगी! आइये वैसी कुछ बातों पे ध्यान दें!

 ⚫ क़र्ज़ भुगतान की काबिलियत के अनुरूप ही लें 
अगर आप क़र्ज़ ले रहे हैं तो आपको चुकाना भी पड़ेगा क्यूंकि ये उधार है, आपका खुद का पैसा नहीं! इसलिए हमेशा ये सुनिश्चित करें के आप कोई भी क़र्ज़ उसको चुकाने की सहूलियत के हिसाब से ही लें| अपनी आमदनी के हिसाब से ही ऋण लें ताकि आप उसको चुका भी पायें|

 ⚫ क़र्ज़ कम अवधि के लिए ही लें 
क़र्ज़ पर ब्याज दर भी देना पड़ता है जो कि एक अलग खर्चा है इसलिए जितना जल्दी हो सके क़र्ज़ को उतार दें और अधिक से अधिक पैसा बचाएं!

 ⚫ फ़िजूलखर्ची के लिए क़र्ज़ न लें
क़र्ज़ सिर्फ आपातकालीन स्थिति में ही लें जब आपके पास पैसे ना हो और पैसे की सख्त ज़रूरत हो| इसलिए अपनी ज़रूरतों को पूरा करने के लिए ही ऋण लें और फ़िज़ूलखर्ची या अपनी इच्छाओं की पूर्ति के लिए तो बिलकुल भी ना लें|

अंतिम बात 

अब आपको ज्ञात हो चूका है कि बिजनेस लोन ब्याज दर को कम करने या बेहतर ऑफर पाने के लिए कौन सा कदम सही रहेगा! आज ही ऑनलाइन फॉर्म भरें और आगे बढे!

Jul 3, 2018

पर्सनल लोन लेना हुआ आसान। Personal loan लेने से पहले महत्पूर्ण बातें।

पर्सनल लोन लेना हुआ आसान। Personal loan लेने से पहले महत्पूर्ण बातें।

पैसा लेने का एक असुरक्षित तरीका, पर्सनल लोन बहुत सारे उद्देश्य पूरे करता है. फिर चाहे छुट्टी पर जाना हो, घर में कुछ साज सजावट करानी हो, कोई महंगा सामान खरीदना हो, एक पर्सनल लोन तुरंत पैसे मिलने का एक विकल्प होता है। हालाँकि इस लोन को लेने से पहले कुछ बातों को आपको जान लेना चाहिए।
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पर्सनल लोन कैसे लिया जाता है ? Personal loan 

आपको कितने लोन/ऋण की जरूरत है?

एक पर्सनल लोन लेने से पहले, बहुत जरूरी है कि आपको यह पता हो कि कितना ऋण लेना है। अपनी एकदम सटीक आवश्यकता का पता लगाने के लिए अपनी जरूरतों को जाने। क्योंकि एक असुरक्षित लोन होने के नाते आपका क्रेडिट स्कोर लोन की राशि तय करने में बहुत ही महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। एक ऐसा लोन लें जो आप अपने दूसरी आर्थिक जरूरतों से समझौता किये बगैर चुका सकें। आदर्श रूप से ईएमआई की रकम आपकी मासिक आय से 40% से ज्यादा नहीं होनी चाहिए।

लोन की अवधि क्या है?

लोन की अवधि लोन देने वाले पर निर्भर करती है. अधिकतर लोन देने वाले यह सुनिश्चित करते हैं कि आप अपनी सुविधा के अनुसार लोन चुका पाएं। इंटरनेट पर विविध पर्सनल लोन देने वालों की अवधि की तुलना करें और उसे चुनें जो आपकी और जरूरतों और रीपेमेंट क्षमता के हिसाब से सबसे सही हो। आप जो भी अवधि चुनेंगे वह आपकी मासिक ईएमआई को प्रभावित करेगी।

ब्याज की दर क्या है?

यह एक और जरूरी सवाल है जो आपको लोन लेने से पहले पूछना चाहिए. व्यक्तिगत ऋण की ब्याज दर मासिक ईएमआई के रूप में आती है। किसी भी अंतिम फैसले पर पहुँचने से पहले इंटरनेट पर विविध पर्सनल लोन देने वालों के ब्याज दर की तुलना कर लें। ब्याज दर आपके क्रेडिट स्कोर, लोन की राशि और अवधि और कई अन्य कारणों पर निर्भर करता है।

क्या आपको किसी बैंक से लोन लेना चाहिए या एनबीऍफ़सी से?

जहां पहले, बैंक पर्सनल लोन देने का प्राथमिक स्रोत थे, आज कई गैर-बैंकिंग वित्त कंपनियों (एनबीएफसी) भी पर्सनल लोन दे रहे हैं। एक नए द्रष्टिकोण के साथ कुछ प्रमुख एनबीएफसी फ्लेक्सी पर्सनल लोन भी दे रही हैं, जहां आपको केवल अपनी स्वीकृत ऋण से आप जो राशि इस्तेमाल करते हैं, उसी पर ब्याज देना होगा।

क्या आपके पास कोई और भी लोन/ऋण  है?

अगर आपके पास कोई पहले से ऋण  है, तो इसका सीधा असर आपकी लोन चुकाने की क्षमता पर पड़ेगा। लोन की राशि मंजूर करते समय उधारकर्ता इसे भी ध्यान में लेंगे। जब आपके पास पहले से ही कई लोन और देनदारियां हैं पर्सनल लोन के लिए आवेदन करते समय यह, सुनिश्चित करें कि आपने समय पर वर्तमान लोन की ईएमआई का भुगतान किया है।

पर्सनल लोन समय-समय पर पैदा होने वाली कई जरूरतों को पैसा देने के सबसे सुविधाजनक तरीकों में से एक है। अगर आप कई लोन की तुलना करेंगे और आप पर्सनल लोन के डॉक्यूमेंट को सही से समझ लेंगे तो आपको एक बेहतर डील मिल सकती है।

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