May 1, 2020

Rima Bose : उड़ान - Poem- Poem

loading...

उड़ान - Poem


अगर  हम पक्षी होते
तो स्वछंद रूप से गगन में पंखो को पसार कर उड़ते
संसार की कोई फ़िक्र नहीं होती
जहां दाना पानी मिलता ,वहां चुग लेते
ऐसी उड़ान भरते की हवा भी  हमे नहीं छू सकती
रवि की पहली किरण से पहले उठ जाते
दिन ढलने से पहले अपने छोटे आशियाने में वापस जाते
अगर हम पक्षी होते
रोज- रोज समाज में फैली अराजकता, हिंसा से दूर रहते
रात को गहरी निद्रा का आनंद उठाते
आकाश के चारो ओर चक्कर लगते
प्रकृति की अद्भूत सुंदरता को निहारते
अगर हम पक्षी होते
स्वार्थी मानव बन जाते है शिकारी
मार -गिराकर करते है अपनी इच्छा पूरी
कभी जाल में फंस जाते
कभी पिंजरे में बांध हो जाते
खो देते है हम आज़ादी हमारी
अगर हम पक्षी होते

रंग -बिरंगे फूलो पर बैठे
आज़ादी का लुफ्त उठाते
तरु की छायांदार डालियों पर बैठे
खट्टे -मीठे फल खाते
प्यार भरे संदेश इस दुनिया को हम पहुंचाते
देश के सैनिको को सलाम करते
और आज़ादी के गीत गाते
अगर हम पक्षी होते
लेखिका  : रीमा बोस



SHARE THIS

0 comments: