Oct 4, 2018

गणेशोत्सव पर निबंध, गणेश चतुर्थी पर निबंध

loading...
गणेशोत्सव पर निबंध, गणेश चतुर्थी पर निबंध
गणेशोत्सव, गणेश चतुर्थी। 

गणेशोत्सव पर निबंध, गणेश चतुर्थी पर निबंध, गणेश उत्सव निबंध, गणेश उत्सव का महत्व।

 प्रस्तावना: गणेश चतुर्थी/उत्सव हिंदुओं का प्रमुख त्योहार है। इसे बहुत ही धूमधाम से मनाया जाता है इसे घर के सभी सदस्य ही बडी खुशियों के साथ मनाते हैं। हमारे हिंदू धर्म में हर कार्य से पहले गणेश जी को सर्व प्रथम पूजा जाता है। इस त्योहार को ना केवल हिंदू बल्कि अन्य धर्म के लोग भी बड़े उत्साह के साथ मनाते हैं। पुराणों के अनुसार गणेश चतुर्थी के दिन गणेश जी का जन्म हुआ था। यह त्योहार खासतौर से महाराष्ट्र में मनाया जाता है। परंतु अब यह भारत के सभी राज्य में बहुत ही हर्षोल्लास और धूमधाम के साथ मनाया जाता है।

गणेश चतुर्थी/उत्सव कब मनाया जाता है? गणेश चतुर्थी शिव पुराण में भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को गणेश उत्सव मनाया जाता है। जबकि गणेश पुराण के अनुसार यह गणेशअवतार भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी चतुर्दशी को हुआ था। गण+पति= गणपति। संस्कृतकोशानुसार गण अर्थात पवित्रक । पति अर्थात  स्वामी गणपति अर्थात पवित्र के स्वामी कहा जाता है और इस दिन को बड़े धूमधाम से गणेश महोत्सव के रूप में मनाया जाता है।

गणेश चतुर्थी/उत्सव की शुरुआत

1983 में से लोकमान्य तिलक ने  सामाजिक कार्यकर्ता भारतीय राष्ट्रवादी तथा स्वतंत्रता सेनानी के द्वारा इस
शुरुआत की उस समय अंग्रेजी शासन से भारतीयों को बचाने के लिए एक गणेश पूजा की प्रथा बनाई उत्सव को एक दंता, असीम शक्तियों की भगवान, असीम शक्तियों के भगवान, हरम्बा, विघ्नहर्ता लंबोदरा विनायक,  भगवानों की बुद्धि, स्मृति तथा संपत्ति के भगवान आदि के नाम से जाना जाता है। ओर इस उत्सव की शुरआत हुई।

गणेश उत्सव की एक प्रसिद्धकथानुसार 
देवदत्त पटनायक के मुताबिक गणेश के जन्म की कहानी कुछ इस प्रकार । वह कहते है कि एक बार माता पार्वती ने घर में स्नान करते समय अपने शरीर के मेल से एक पुतला बनवाया था। उसको पुतले को सजीव करके मां पार्वती ने उनका गणेश नाम रख दिया ओर उसे मुख्य द्वार जाकर पहरा देने के लिए कहा। पार्वती जी ने गणेश जी से कहा कि पुत्र देखते रहना जब तक मैं स्नान ना कर लूं तब तक कोई भी भीतर ना आ सके। उस समय भगवान शिव जी भोगवती जगह पर गए हुए थे। जब वो वहां से वापस आए तो घर में जाने लगे तब गणेश जी ने अंदर उन्हें अंदर  जाने से रोका इस शिव जी को गुस्सा आ गया और उन्होंने गणेश जी का सिर धड़ से अलग कर दिया। जब पार्वती पार्वती मां को पता चला।

तो वो विलाप करने लगी और गणेश जी को  फिर से जीवित करने के लिए कहने लगी। तब शिव जी ने हाथी के बच्चे का मुँह काटकर गणेश जी के धड़ पर लगा दिया और उन्हें जीवित भी कर दिया। और भाद्रपक्ष शुक्ल चतुर्थी के दिन घाटी इस घटना को गणेश जी के नाम कर दिया और कहा कि जो भी व्यक्ति या देवीदेवता जब तक सर्वप्रथम गणेश जी को नही पूजेंगे तब तक व्यक्ति की कोई भी पूजा सफल नही कहलाएगी। तब उसके बाद से ही गणेश चतुर्थी पूजा की शुरुआत हुई। ओर सभी व्यक्ति इन की स्थापना करके सर्वप्रथम पूजनीय गणेश जी से कामना करते है। कि हमारे सभी कार्य सफल और शुभ हो।और हमे खुशया प्राप्त हो।

गणेश महोत्सव, गणेशोत्सव,  गणेश चतुर्थी
हमारे देश में गणेश महोत्सव का एक पारंपरिक को सांस्कृतिक त्योहार है। इस महोत्सव का सबसे ज्यादा असर युवा वर्ग को बच्चों में देखने को मिलता है ।इस त्यौहार को समारोह के बजाय समुदाय की भागीदारी के माध्यम से मनाया जाता है ।इस समारोह में पंडाल तैयार करते हैं । समुदाय के लोग पूजा करने के लिए गणेश जी की प्रतिमा लाते हैं वह दूसरों की तुलना में अपने पंडाल को ज्यादा सुंदर दिखाने के लिए जो उनसे बनता है वो ये करते है। अपनी मूर्ति को सुंदर दिखाने के लिए सुंदर फूल, माला ,बिजली की रोशनी आदि का उपयोग करते हैं ।और तरह-तरह से पंडाल को सजाते हैं पंडित जी लाल सफेद धोती के साथ मूर्ति की स्थापना मंत्र उच्चारण के साथ करते हैं ।फिर प्रसाद आदि चडाते है। जिसमें गणेश जी का प्रिय लड्डू ओर मोदक तो जरूर शामिल रहता है।

इस प्रकार पूरे दस दिन तक यह समारोह चलता है। ओर  अनंत चतुर्थी को गणेश जी की पूजा अर्चना करने के बाद सभी सदस्य मिलकर मूर्ति का विसर्जन करते हैं। और उनसे पार्थना करते है कि। है गणपति महाराज अगले बरस तू जल्दी आना और हमारे सभी दुखो ओर दर्द को हर कर अपने साथ ले जाना।

उपसंहार
इस प्रकार यह गणेश उत्सव हम हिंदुओं का अति महत्वपूर्ण और हर्षोल्लास का त्योहार है जिसमें हम भगवान से प्रार्थना करते हैं कि।

         वक्रतुंड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ
           निर्विघ्नम कुरु देव शुभ कार्यषु सर्वदा।

मतलब है हाथी के जैसे विशालकाय जिसका तेज सूर्य के सहस्त्र किरणों के समान है। बिना विघ्न के मेरा कार्य पूर्ण हो और सदा  ही मेरे लिए शुभ हो। ओर ऐसी कामना करते हैं और उनसे विनती करते हैं कि धर्मों में भेदभाव मिटाकर हम हमेशा ही हम इस उत्सव को खुशी के साथ मनाएं और अगले बरस फिर आपके आगमन की तैयारी करें।

#सम्बंधित:Hindi Essay, हिंदी निबंध। 

loading...

SHARE THIS

0 comments: