Sep 4, 2018

महात्मा गांधी के आंदोलन और जीवनी।

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महात्मा गांधी के आंदोलन और  जीवनी। 

महात्मा गांधी आंदोलन और  जीवनी। 

" जिस दिन प्रेम की शक्ति.
शक्ति के प्रति प्रेम पर हावी हो जाएगी,
दुनिया में अमन आ जाएगा "

"ये कथन हमारे राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के थे की जिस दिन शक्ति पर प्रेम हावी हो जाएगा उस दिन हमारे देश मे अमन आ जायेगा"

महात्मा गांधी जी की जीवनी

महात्मा गांधी जी का जन्म 1869 गुजरात  के पोरबंदर में हुआ था उनके पिता का नाम करमचंद गांधी था जो कि पोरबंदर के दीवान थे उनकी मां का नाम पुतलीबाई था जो धार्मिक प्रवृत्ति के थे और उनके धार्मिक प्रवृत्ति का असर महात्मा गांधी पर काफी पड़ा था उनकी पत्नी का नाम कस्तूरबा गांधी था जो कि उन से 1 साल बड़ी थी उनका विवाह 13 वर्ष की आयु में हो गया था ,1887 में उन्होंने मैट्रिक की परीक्षा पास की थी सन 1888  में उन्होंने भावनगर के सामलदास कॉलेज में पढ़ाई की यहां से वहां  लंदन गए जहां इन्होंने बैरिस्टर की शिक्षा प्राप्त की थी।

महात्मा गांधी जी के आंदोलन की परिभाषा

         " दे दी हमें आजादी बिना खड़ग बिना ढाल.साबरमती के संत तूने कर दिया कमाल."

हमारे राष्ट्रपिता के लिए लिखी गई है दो लाइनों उनके आंदोलन की पूरी व्याख्या करते हैं इसमें बोला गया है कि इस महात्मा ने बिना किसी हत्यार और बिना किसी को ढाल बनाकर हमारे देश भारत को सत्य और अहिंसा के सहारे आजादी दिलवाई।

महात्मा गांधी जी सत्य और अहिंसा के पुजारी थे उनका पूरा जीवन सत्य और अहिंसा के मार्ग पर आधारित था सत्य और अहिंसा के दम पर एकजुट होकर हमारे भारत देश को स्वतंत्रता दिलाई अपने पूरे जीवन में केवल सत्य और अहिंसा का ही प्रयोग किया एक तरह से उनका पूरा जीवन एक आंदोलन ही था उनके अनुसार केबल रक्त बहाकर ओर किसी को नुकसान पोहचाना ही आंदोलन नही होता आंदोलन सत्य और अहिंसा का सहारा लेकर भी किया जा सकता है और वो अपने जीवन के सभी आंदोलन में सफल भी रहे।

महात्मा गांधी जी के आंदोलन के नाम

महात्मा गांधी जी ने सत्य और अहिंसा के बदौलत अपने देश को स्वतंत्रता दिलाई इस हेतु उन्होंने कई आंदोलन करें जो कि इस प्रकार है।

(1) चंपारण सत्याग्रह -1917
 चंपारण बिहार राज्य का एक जिला है और इस जिले के किसानों की मदद के लिए यह आंदोलन किया गया था इसे निल की खेती को रोकने के लिए किया गया था क्योंकि नील की खेती से जमीन खराब हो जाती थी इस आंदोलन को चंपारण आंदोलन नाम दिया गया था।

(2) खेड़ा सत्याग्रह- 1918
खेड़ा गुजरात में है यह एक किसान आंदोलन था जिसमें किसानों की दशा को सुधारने के लिए किया गया था जो कि लगान व्रद्धि की समाप्ति पर आधारित था।

(3) अहमदाबाद अनशन -1918
अहमदाबाद अनशन अहमदाबाद के कर्मचारियों पर आधारित था इस आंदोलन का मुख्य उद्देश्य मालिकों द्वारा मजदूरों को दिया जाने वाला प्लेग बोनस को समाप्त करना था।

(4)खिलाफत आंदोलन -1919
खिलाफत आंदोलन भारत में मुख्य रूप से मुसलमानों द्वारा चलाया गया था यह आंदोलन राजनीति  ऒर धार्मिक था इस आंदोलन का उद्देश्य (शुन्नी)
इस्लाम के  मुखिया माने जाने वाले तुर्की के खलीफा के पद की पुनः स्थापना कराने हेतु या आंदोलन किया गया था।

(5) असहयोग आंदोलन 1920
असहयोग आंदोलन महात्मा गांधी  तथा भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के बीच के नेतृत्व  में आंदोलन चला था जिसने भारतीय स्वतंत्रता  आंदोलन को एक नई जागृति प्रदान करि।

(6) दांडी मार्च  -1930
दांडी मार्च सत्याग्रह अंग्रेज सरकार के नमक के ऊपर कर लगाने के कानून के विरुद्ध किया गया आंदोलन था।

(7) सविनय अवज्ञा आंदोलन -1930
सविनय अवज्ञा आंदोलन गांधी जी द्वारा 1930 में शुरू किया गया था जिसका अर्थ था बिना किसी हिंसा के किसी सरकारी आदेश की अवहेलना करना (लॉर्ड इरविन )ने गांधी जी की 11 मांगों को नामंजूर कर दिया था तो महात्मा गांधी जी ने इन मांगों के लिए सविनय अवज्ञा आंदोलन किया था।

(8) व्यक्तिगत सविनय अवज्ञा आंदोलन - 1940
व्यक्तिगत सविनय अवज्ञा आंदोलन गांधी जी की इरविन पेंट समझौता को ना मानना और ब्रिटिश सरकार द्वारा पूर्ण स्वराज की बात को स्वीकार नहीं करने के विरुद्ध व्यक्तिगत सविनय अवज्ञा आंदोलन  पूर्ण स्वराज्य हेतु शुरु किया गया था।

(9) भारत छोड़ो आंदोलन - 1942
भारत छोड़ो आंदोलन द्वितीय विश्व युद्ध के समय आरंभ किया गया था जिसका मकसद भारत मां को अंग्रेजों की गुलामी से आजाद कराना  था महात्मा गांधी जी ने इस आंदोलन के शुरुआत अखिल भारतीय कांग्रेस समिति के मुंबई अधिवेशन से शुरू की थी।

(10) नोआखाली सत्याग्रह  -1946

महात्मा गांधी स्वतंत्र आंदोलन के द्वारा सांप्रदायिकता के खिलाफ लड़ते रहते थे क्योंकि वह जानते थे कि इसका घातक परिणाम सामने आएगा उनका मानना था यदि ऐसा हुआ तो हिंदू मुसलमानों में आपसी  मतभेद होगा तो भारत को कभी भी इस गुलामी से मुक्ति नहीं मिल पाएगी साम्प्रदायिक सद्भावना हेतु उन्होंने ये आंदोलन किया था।

गांधी जी के जीवन दर्शन का आधार भारतीय आदर्शवाद है

महात्मा गांधी जी के जीवन के मोटे तौर पर चार प्रमुख तत्व जो उनके आदर्शवाद पर आधारित है.

(1) सत्य
 गांधी जी के लिए ईशवर और सत्य में कोई अंतर नहीं था वह कहते थे यदि कोई व्यक्ति मन, वचन ,कर्म , अथवा कार्य में सत्य का प्रयोग करता है तो उसे ईश्वर अवश्य प्राप्त होता है।

(2) अहिंसा
अहिंसा अपने  सक्रीय रूप में जीवन के प्रति सद्भावना है यह शुद्व प्रेम  है।

(3) निर्भयता
समस्त ब्रहा भयो  से मुक्ति इसका अर्थ है।

(4) सत्याग्रह
विरोधी को कष्ट देकर नहीं अपितु स्वयम अपने आप को कष्ट देकर सत्य का समर्थन कराना सत्याग्रह कहलाता है।

गांधी जी का शिक्षा दर्शन

संसार के अधिकांश लोग गांधी जी को एक महान राजनीतिक ही मानते हैं परंतु उन्होंने देश की राजनीतिक उन्नति की अपेक्षा सामाजिक उन्नति को अधिक महत्व दिया था जिसमें उन्होंने शिक्षा को अधिक महत्व दिया जिसमें खास तौर पर बच्चों की शिक्षा पर ज्यादा बल दिया उनके अनुसार साक्षरता ना तो शिक्षा का अंत है और न आरंभ  यह केवल एक साधन है जिसके द्वारा पुरुष व स्त्री को शिक्षित किया जा सकता है।

 गांधी जी की शिक्षा के उद्देश्य

 इन्हें दो भागों में बांटा गया था।

(1) गांधीजी के तात्कालिक उद्देश्य

(2) शिक्षा का सर्वोच्च उदेश्य

गांधीजी के तात्कालिक उदेश्य इस प्रकार है। 

(1) जीविकोपार्जन का उद्देश्य

(2) सांस्कृतिक उद्देश्य

(3) पूर्ण विकास का उद्देश्य

(4) नैतिक अथवा चारित्रिक विकास

 (5) मुक्ति का उद्देश्य

शिक्षा का सर्वोच्च उद्देश्य

गांधी जी के अनुसार शिक्षा का सर्वोच्च उद्देश्य स्तय अथवा ईशवर की प्राप्ति शिक्षा के सारे उद्देश्य इस उद्देश्य के अधीन है यह  उद्देश्य वही आत्माभूति का उद्देश्य है ,आत्मा का विकास करना चरित्र का निर्माण करना है तथा व्यक्ति को ईश्वर ओर आत्मानुभूति के लिए प्रयास करने के योग्य बनाना है सर्वोच्च उद्देश्य है शिक्षा का ।

निष्कर्ष
इस प्रकार महात्मा गांधी जी ने अपना पूरा जीवन देश को समर्पित कर दिया था उस दुबले-पतले से दिखने वाले व्यक्ति महात्मा गांधी जी ने अपने  शरीर के वस्त्र तक देश के लिए छोड़ दिया था तो उनके बारे में कुछ भी लिखना या बोलना कहीं ना कहीं कुछ कम ही लगेगा ऐसे महात्मा को मेरा शत शत नमन है ।


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