May 28, 2017

करियर का चुनाव संतुलन के साथ

करियर का चुनाव संतुलन के साथ

करियर का चुनाव संतुलन के साथ

करियर (Career ) का चुनाव सदेव मांग और क़ाबलियत के अनुसार करना चाहिए , कहने का मतलब हे की डिमांड ( Demand ) और स्किल ( Skill ) के अनुसार करना चाहिए . कभी भी माता पिता या किसी अन्य की सलाह के आधार पर करियर (Career ) का चुनाव नहीं करना चाहिए |
दसवी और बारहवी के बाद हर विधियार्थी के सामने यही सवाल होता हे की कोन सा करियर (Career ) चुने. इसका सबसे अच्छा उपाय यहाँ हे की शांत मन से सोचे की आप को क्या अच्छा लगता हे और उस कार्य को आप अन्य लोगो से केसे बेहतर कर सकते हे , ये तो हे आप के मन और इच्छा की बात अब दूसरा तरीका हे जिस में आप सोचे की अपनी स्किल ( Skill ) के द्वारा उस काम को किस हद तक पूरा कर सकते हे |

इस सोच में दो और कारण हे पहला की कही उस काम को पूरा करने में आप की स्किल ( Skill ) में कोई कमी तो नहीं हे , और दूसरा वो काम आप की स्किल ( Skill ) के लायक हे या नहीं . जो आप की शिक्षा और अनुभव के आधार पर आप को पूरा सम्मान और पैसा दिला सके |

अब तीसरा और अंतिम तरीका हे करियर चुनने का जो काम आप करना चाहते हे , अपनी शिक्षा और अनुभव के आधार पर उस काम को लोग समझते हे या नहीं , और उस काम की उस जगह पर उचित मांग हे या नहीं, और उस काम की उचित कीमत प्राप्त होगी या नहीं |

 करियर का चुनाव करने से पहले इन तीनो विषयो पर सोचना आवश्यक हे , कियोकी आप की सोच कितनी अच्छी और सामाजिक हो पर आप की भी अपनी पारिवारिक जिम्मेदारिया और आवशकता हे . और हर व्यक्ति की आर्थिक स्थिति भी अलग होती हे , उस का भी आप के करियर (Career ) पर असर पड़ता हे . यदि आप किसी दुसरे शहर या राज्य में पड़ने या काम करने जा रहे हे , तो उसकी लागत को अपनी मिलने वाली सैलरी ( Salary ) और इनकम ( Income ) से जरुर मूल्यांकन करे ,फिर उस जॉब ( Job ) और शिक्षा संस्था को चुने |

कियोकी हमारे देश में मेट्रो सिटी ( Metro City ) को छोड़ कर , और बड़ी कंपनीयो ( Company ) को छोड़ कर छोटी कंपनी ( Company )  या छोटे शहरो में काम के हालत सरकार के मानक के अनुसार नहीं हे . मूल सुविधो का भी आभाव हे |

हमारे देश में स्टूडेंट  AC Class Room में पड़ते  हे , और बड़े कॉलेज में जो सर्वसुविधा युक्त होते , उन में डिसिप्लिन ( Discipline ) और कई टेक्निकल ( Technical ) और प्रेक्टिकल   ( Practical )  बाते बहुत अच्छे से सिखाई जाती हे . लेकिन जब हम काम करते हे तो एसा कुछ नहीं मिलता , कहने का मतलब हे की हम काम लेबर क्लास (Labour Class ) में करते हे .  हमारी शिक्षा के अनुसार काम का वातावरण नहीं होता हे , और होता भी हे तो बहुत कम जगह पर सिमित दायरे में |

करियर का चुनाव संतुलन के साथ


 जेसे हम को कॉलेज ( College ) में सॉफ्टवेर ( Software ) के बारे में बहुत कुछ बारीकिय सिखाई जाती हे , और जब हम किसी लोकल कंपनी ( Local Company ) में काम करते हे तो उन के पास लाइसेंस सॉफ्टवेर ( License Software ) तक नहीं होते हे . ऐसे कुछ रियल ( Real ) उदाहरण में आप के सामने रखता हु , इस तरहा की कंपनियों ( Company ) का चुनाव सोच समझ कर करे . और काम करना भी पड़े तो कोई एक्स्ट्रा वर्क ( Extra Work ) भी करे और अच्छी कंपनी ( Company )  काम ( Work ) को तलाश ते रहे |

1. जेसे सही रोड ट्रांसपोर्ट ( Road Transport ) की समस्या कई इंडस्ट्रियल एरिया ( Industrial Area ) में हे , पक्के रोड ( Road ) नहीं हे . जिस से बारिश में काफी परेशानी होती हे , कियो वाही से भरी वाहन गुजर ते हे , जिस से दुर्घटना का भी खतरा रहता हे . लेट नाईट में पब्लिक  ट्रांसपोर्ट ( Lat Night Public Transport ) की सुविधा नहीं होती , या पब्लिक ट्रांसपोर्ट ( Public Transport ) की ही सुविधा नहीं होती |

2. साफ पानी और खाने की व्यवस्था नहीं होती , कई कंपनी ( Company ) में तो शोचालय तक की व्यवस्था नहीं होती |

3. 12 से 13 घंटे का वर्किंग टाइम ( Working Time ) जिस से व्यक्ति अपने आप और परिवार को समय नहीं दे पता . और उसकी सामाजिक लाइफ ( Life ) समाप्त हो जाती हे |     

4. सही इंफ्रास्ट्रक्चर ( Infrastructure ) की समस्या , आग और क्राइम ( Crime ) से सिक्यूरिटी ( Security ) की सुविधा नहीं होती |

5. PF और ESIC में दोनों पार्ट ( Part ) कर्मचारी की सैलरी ( Salary ) में से काट कर कास्ट ऑफ़ एम्प्लोयी  
( Cost Of  Employee )  दिखाना बुक ( Book ) में , मतलब १५०००/- सैलरी ( Salary ) होने पर आप को केवल 8000 नगद मिलेगे |

6. कंपनी का सिस्टम ( Company System ) और सर्वर ( Server ) ख़राब होने पर , कर्मचारी दवारा किया जाने वाला ओवर टाइम ( Over Time ) और उसका भी भुगतान न होना . कर्मचारी बीमा न होना |

ऐसी कंपनियों ( Company ) का चुनाव सोच समझ कर करे | एकाउंटिंग, बीपीओ, प्रिंटिंग, एडवरटाइजिंग, ऑटोपार्ट्स, ( Accounting, BPO, Printing, Advertising, Industry )  इंडस्ट्री में ये समस्या सब से जयादा हे |

और यदि आप इन्वेस्टमेंट, फाइनेंस, इन्सुरांस, स्टॉक मार्केट, सॉफ्टवेयर, और एकाउंटिंग, ( Investment, Finance, Insurance, Stock Market, Software, Accounting ) के कार्य से जुड़े हे , तो आप ये ध्यान रखे की भारत के सभी बड़े शहर और मेट्रो सिटी ( Metro City ) को छोड़ कर , अन्य छोटे शहरो में इन को जयादा सामान की द्रष्टि से नहीं देखा जाता और उचित भुगतान भी नहीं मिलता |

 इस तरह के कम को गाँवो और छोटे शहरो में न करे , जिस से आप पर बेवजह का मानसिक तनाव  भी नहीं होगा , और आप की शक्ति और उत्त्साह का हास् भी नहीं होगा , और आप पारिवारिक दबाव से भी बच सकते हे |



SHARE THIS

Author:

Writer  &  Accountant

0 comments: