Jun 4, 2016

आदर्श विधार्थी [adarsh vidyarthi]

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adarsh vidyarthi essay in hindi

भूमिका-विधार्थी का अर्थात्- विधा का अर्थी, विधा प्राप्त करना जिसका लक्ष्य हो | यूँ तो विधालय में शिक्षा प्राप्त करने वाला हर बालक और बालिका विधार्थी है, किंतु उनमें से कम ही ऐसे होते हैं, जिन्हें हम ‘ आदर्श विधार्थी ’ कह सकते हैं | आदर्श विधार्थी में बहुत से गुण एवं बहुत से विशेषताएँ होती हैं, जिन्हें अपनाकर वह निरंतर सफलता के सीडी पर चड़ता जाता है |
विस्तार- विधार्थी जीवन गीली मिटटी के सामान होता है, उसे जैसा आकर देना चाहें, दिया जा सकता है | उसमे जैसे बीज बोए जाएँगे, वैसी ही फ़सल भविष्य में प्राप्त होगा | इसीलिए इस काल में जैसे संस्कार, जैसे मूल्य विधार्थी बीज रूप में अपने भीतर समा लेता है , भविष्य में भी उनका व्यक्तित्व वैसा ही बन जाता हैं | आदर्श विधार्थी श्रेष्ठ संस्कार ग्रहण करता हैं | चरित्र-निर्माण को विशेष महत्व देता है |

आदर्श विद्यार्थी पर निबंधआदर्श विधार्थी की प्रमुख विशेषता होती है- अनुशासन प्रियता | वह सारे कार्य को को नियम के अनुशार ही दिए हुए समय पर करता है | उसमें संयम होता है | चंचल मन पर विवेक की लगाम लगाकर वह मन को भटकने से बचाता है |

आदर्श विधार्थी जिज्ञासु होता है | जानने की तीव्र इच्छा उसमें ज्ञान प्राप्त करने की इच्छा को सुदृढ़ करती है | वह अपने अध्यापकों से प्रशन पूछता है, शंकाओ का समाधान खोजने के लिए रूचि लेता है | नई-नई बातों की जानकारी प्राप्त करने की उसमें जिज्ञासा होती है |

adarsh vidyarthi ke kartavya in hindiआज्ञाकारिता, एकाग्रता और स्वावलंबन के गुण एक आदर्श विधार्थी में होता हैं | गुरुजनों के की प्रति उनमें सम्मान और कृतज्ञता की भावना रहती है | एकांत होकर पढ़ना पढना पसंद करते हैं, और कम समाये में वे अधिक पढाई करने की योग्यता राखते है | समस्याओं या शंकाओं का हल स्वयं करने का प्रत्यं करते है |

एक आदर्श विधार्थी जनता है की शिक्षा का उदेश्य विभिन्न विषयों का ज्ञान प्राप्त करना ही नहीं  है | व्यक्तित्व के सर्वागीण विकास को वह महत्त्व देता है | पढाई-लिखाई के साथ-साथ वह खेलकूद, नृत्य-संगीत आदि पाठ्येतर गतिविधियों में भी बढ़-चढ़  कर हिस्सा लेता है |

उपसंहार- इस प्रकार हम कह सकते है की एक आदर्श विधार्थी वही है, जो अच्छे गुणों को अपनाने और बुरे गुणों से बचने का प्रत्न करता है |वह धुन का पक्का, परिश्रमी और सदाचारी होता है | अपने उज्जवल भाविष्य की आधारशिला को वह सुदृढ़ बनाने में लगा रहता है | आज का आदर्श विधार्थी ही कल का सुनागरिक बनता है | उसका जीवन तो सफल बनता ही है, वह अपने राष्ट्र के निर्माण के लिए योगदान देकर जीवन को अर्थवान बनाता है |  
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