Apr 21, 2016

विधापति [Vidyapati]

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जन्म परिचय


(सन् 1380-1460)

जन्म:- विधापति का जन्म मधुबनी (बिहार) के बिस्पी गाँव के ऐसे परिवार में हुआ जो विधा और ज्ञान के लिए प्रशिद्ध था | उनके जन्म के संबंद से कोई प्रमाणित सुचना उपलब्ध नही हैं | उनके रचनाकाल और आश्रयदाता के राज्यकाल के अनुसंधान के आधार पर उनके जन्म और मृत्यु वर्ष का अनुमान क्या गया है | विधापति मिथिला नरेश राजा शिवसिंह के अभिन्न मित्र, राजकवि और सलाहकार थे |

शिक्षा:- विधापति बचपन से ही अत्यंत कुशाग्र बुध्दी और तर्कशील व्यक्ति थे | सहित्य, सांस्कृति, संगीत, ज्योतिष, इतिहास, दर्शन,न्याय, भूगोल, आदि के वे प्रकांड पंडित थे | उन्होंने संस्कृत, उपभ्रांश और मैथेली-तीन भाषाओ में रचनाएँ कीं | इसके अतिरिक्त उन्हें और भी कई भाषा-उपभाषा का ज्ञान था |

साहित्यिक विशेस्ताएँ:- वे आदिकाल और भक्तिकाल के संधिकवि कहे जा सकते हैं | उनकी कीर्तिलता और किर्तिपताका जैसी रचनाओ पर बरबरी संस्कृति और उपभ्रांस काव्य परंपरा का प्रभाव है तो उनकी पदावली की गीतों में भक्ति और श्रृंगार  की गूंज है | विधापति की पदावली ही उनके यश का मुख्या आधार है | वे हिन्दी सहित्य के मध्यकाल के पहले ऐसे ऐसे कवि है जिनकी पदावली में जनभाषा में संस्कृति की अभिव्यक्ति हुई है |


          मिथिला श्रेत्र के लोक-व्यवहार में और सांस्कृतिक अनुष्ठानो में उनके पद इतने रच-बस गये है की पदों की पंक्तिया अब वह की मुहावरे बन गयी हैं | पद लालित्य, मानवीय प्रेम और व्यावहरिक जीवन के विविध रंग इन पदों को मनोरम और आकषर्क बनाते हैं | राधा-कृष्ण के प्रेम के माध्यम से लौकिक प्रेम के विभिन्न रूपों का चित्रण, स्तुति-पदों में विभिन्न देवी-देवताओं की भक्ति, प्रकृति सम्बंधित पदों में प्राकृतिकी मनोहर छवी रचनाकार के आपुर्व कौशल, प्रतिभा और कल्पनाशीलता के परिचायक हैं | उनके पदों में प्रेम और सौंदर्य की अनुभूति की जैसी निश्छल और प्रगाढ़ अभिवेक्ति हुई है वह अन्यत्र दुर्लभ हैं |


महत्वपूर्ण रचनाएँ:- पुरुष परीक्षा, भू-परिकर्मा, कीर्तिलता, कीर्तिपताका, लिखनावली और पदावली |        
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