Apr 15, 2016

रघुवीर सहाय [Raghuvir Sahay biography in hindi]

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जीवन परिचय



जन्म:- रघुवीर सहय जी का जन्म लखनऊ में हुआ था | उनकी संपुर्न्य शिक्षा लखनोऊ में ही हुई | वही से उन्होंने अंग्रेजी में एम्.ए. किया | रघुवीर सहाए पेसे से एक पत्रकार थे | आरंभ में वे प्रतीक में सहायक संपादक के रूप में काम किया | फिर भी कुछ समाय तक आकाशवानी के समाचार विभाग के में रहे | कुछ समय में हेदराबाद से प्रकाशित होने वाली पत्रिका कल्पना के संपादक से भी जुड़े और इसके बाद कई सालो तक उन्होंने दिनमान संपादक किया |

साहित्यिक विशेषतये:- सहाय न्यू कविता के कवी है | उनकी कुछ प्रमुख कविताए आज्ञेय से संपादित दूसरा सप्तक में संकलित हैं | कविता के अलावा उन्होंने विवेचनात्मक गध भी लिखा | उनके काव्य-संसार मैं आत्मपरक अनुभवों की जगह जनजीवन के आनुभव की रचनात्मक अभिव्यक्ति अपेक्चाक्रित अधिक हैं | वे सामाजिक संदर्भो के व्यापक निरिक्षण, अनुभव और बोध को कविता में वयक करते है |

          रघुवीर सहाए ने काव्य-रचना में अपनी पत्रकार दृष्टी का स्रजनात्मक रूप से उपयोग किया है | वे मानते हैं की अखबार की खबरों में दबि और छिपी हुई अनेक एसी बात  होती है, जिनमे मानवीय पीड़ा छिपी रह जाती हैं | उस छिपी हुई मानवीय पीड़ा की अभिव्यक्ति करना ही कविता का दयित्व हैमन |

          इस काव्य-दृष्टी के अनुसार ही उन्होंने अपनी नयी काव्य-भाषा का विकास किया है | उनकी काव्य-भाषा सटीक, दो टूक और विवरण प्रधान है | वे अनावश्यक शब्दों के प्रयोग से बचते है | भयाक्रांत अनुभव की आवेग रहित अभिव्यक्ति ही उनकी कविता की प्रमुख विशेषता हैं | रघुवीर सहाए ने मुक्त छंद के साथ-साथ छंद में भी काव्य-रचना की है | जीवन आनुभाओ की अभिव्यक्ति के लिए वे कविता की संरचना में वृत्तांत या कथा का उपयोग करते हैं |

प्रमुख-रचनाएँ:-उनकी प्रमुख रचनाए-सीढियों पर धुप मैं, हाँसो हाँसो जल्दी हाँसो, आत्महत्या के विरुद्ध, और लोग भूल गये हैं | छह खंडो में रघुवीर सहाए रचनावली प्रकाशित हुई हैं, जिसमे उनकी लगभग सभी रचनाए सामिल है | ‘लोग भूल गये हैं’ काव्य संग्रह पर उन्हें सहित्य अकादमी परुस्कार मिला था |
    
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