Apr 29, 2016

प्रेमचंद[Munshi Premchand]

जीवन परिचय


जन्म:- प्रेमचंद का जन्म वाराणसी जिले के लमही गाँव में सन् 1880 में हुआ | उनका मूल नाम धनपतराय था | उन्होंने प्राम्भिक शिक्षा वाराणसी में पाई | मेट्रिक करने के बाद वे आध्यापन कार्य करने लगे | फिर उन्होंने स्वाध्याय करके बी.ए. की परीक्षा उत्तीर्ण की | वे सरकारी नौकरी में भी रहे, परन्तु असहयोग आन्दोलन के समय नौकरी से त्यागपत्र  दे दिया और लेखन कार्य में ही लगे गए | प्रेमचंद में अपना लेखन कार्य उर्दू में नबाबराय नाम से आरम्भ किया, बाद में वे हिन्दी में लिखने लगे | उनकी पहली कहानी सन् 1915 में ‘सरस्वती’ पत्रिका में प्रकाशित हुई |

निधन:- इनकी मृत्यु सन् 1936 में हुई |

रचनाएँ:- कहानी संग्रह-मानसरोवर (आठों भागो में), गुप्तधन (दो भाग) |
उपन्यास-सेवासदन, कर्मभूमि, रंगभूमि, निर्मला, गबन, गोदान, प्रेमाश्रम |
नाटक-कर्बला, संग्राम, प्रेम की देवी |
निबंध संग्रह-विविध प्रसंग (तीन खंड में), कुछ विचार |
संपादन कार्य-माधुरी, हंस, मर्यादा, जागरण |

शिल्पगत विशेषताएँ:- प्रेंचंद में अपनी रचनाओं में किसानों, दलितों एवं नारियों की वेदना तथा वर्ण-व्यवस्था की कुरीतियों का मानव चित्रण किया है | वे सहित्य को सामाजिक परिवर्तन का सशक्त साधना मानते थे | उनकी दृष्टी में साहित्यकार समाज के भवन को गिरता नही, उसका निर्माण करता है | उन्होंने समाज-सुधर और राष्ट्रीय भावना को अपनी कृतिओं का स्थान दिया | कथा-संगठन एवं चरित्र-चित्रण की दृष्टी से उनकी रचनाएँ बेजोड़ हैं |

भाषा:- प्रेमचन की रचनायों की भाषा सजीव, मुहावरेदार और बोलचाल वाली की निकट हैं | इसमें उर्दू की स्वच्छता, गति और मुहावरे से साथ संस्कृत भावमयी पदावली की सुन्दर प्रयोग है | प्रेमचंद ने अपनी कहानियों और अपने उपन्यासों से हिंदी को लोकप्रिय बनाया |
हिंदी में बाल-मनोविज्ञानं  से सम्बंधित कहानियाँ बहुत कम लिखी गयी है | प्रेमचंद उन दुर्लभ कथाकारों में से हैं जिन्होंने पूरी प्रमाणिकता तथा तन्मयता से साथ बाल-जीवन को अपनी कहानिओं में स्थान दिया है | उनकी कहानियाँ भारत की साझी संस्कृति व ग्रामीण जीवन के विविध रंगों से सरोबर हैं |  


        

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