Sep 10, 2017

घनश्याम दास बिड़ला

Ghanshyam das Birla

घनश्याम दास बिड़ला, बिड़ला ग्रुप के संस्थापक थे | वर्तमान में इसका नाम आदित्य बिड़ला ग्रुप हे | घनश्याम दास बिड़ला का जन्म सन 11 अप्रेल 1894 ग्राम पिलानी  राजस्थान में हुआ था | इन के पिता का नाम बलदेवदास बिड़ला था | इनके पिता की चार संतान जुगल किशोर, रामेश्वरदास, घनश्याम दास, ब्रजमोहन दास थी | इनकी माता का नाम योगेश्वरी देवी था | मात्र 14 वर्ष की आयु से ही अपनी सामान्य शिक्षा पूरी कर वे अपने खानदानी व्यावसाय में योगदान देने लगे | आईडिया, हिंडालको, और भी कई कंपनिया सव्मित्व में हे | इस ग्रुप का करोबार 20 से अधिक देशो में फेला हे | जिसमे जी डी बिरला का विशेष योग दान रहा | घनश्याम दास बिड़ला भारतीय अर्थव्वस्था के सूत्रधार थे | भारतीय अर्थव्वस्था को प्रगति के पथ पर अग्रसर करने के लिए उनका नाम स्वर्णिम अक्षरों में अंकित हे | घनश्याम दास बिड़ला कभी भी उपलब्धियो से संतुष्ट नहीं होते थे | एक लक्ष्य को प्राप्त कर अगले के लिए अग्रसर हो जाते थे | वे सदेव आत्म प्रसंसा के खिलाफ थे | इसलिए उन्होंने अपनी जीवनी पर कभी सहमती नहीं दी | वेसे उन्होंने अपने को कई बार अभिव्यक्त किया जिसका उलेख उनके दवारा लिखे पत्र पत्रिकाओ और भाषण में मिलता हे | जिसमे उनके जीवन दर्शन की झलक मिलती हे | जिससे उनके जीवन की काफी जानकारी मिलती हे | उनके दवारा कियो गए 60 साल के लगतार प्रयासों के कारणों ही 20 सदी में आधुनिक भारत की नीव पड़ी | जब देश आजादी के लिए संघर्ष कर रहा था | तब भी ब्रिटिश सरकार के अधिकारी विस्टन चर्चिल भी भारत में सवेधानिक शासन व्यवस्था के लिए उनसे परामर्श लेते थे | उनके दवारा ही भारत में पूंजीवादी व्यवस्था नीव पड़ी | आजादी के बाद उन्होंने देश के उधोग के विकास, कला, संस्कृति, तकनिकी, प्रोधोयोगिकी, शिल्पकला, राजनीती, महत्पूर्ण योगदान दिया | उन के जेसा योगदान किसी और अन्य भारतीय ने नहीं दिया | 1942 आते आते जी.डी. बिड़ला, मील मालिक और उद्योगपति के तोर पर पहचान बना चुके थे | गांधीजी के विचारो से प्रभावित होकर उन्होने खुबसूरत मंदिर, शिक्षण संसथान और सामाजिक कार्यो में भी योगदान दिया | उन्हें दानशीलता और महात्मा गाँधी से आदर्श संबंधो के लिए भी जाना जाता हे | लेकिन दुर्भाग्य से महात्मा गाँधी की हत्या उनके दिल्ली स्थित आवास पर ही हुई थी | सामाजिक कार्यो के साथ साथ उन्होंने कभी भी अपने व्यवसायिक हितो को भी क्षति नहीं पहुचने दी | 1947 के पूर्व वे स्वदेशी उधोग के प्रबल समर्थक थे, उन्होंने भारतीय उधोग और उनके विकास के लिए अनेक कार्य किये | जब विश्व युद्ध के कारण विश्व की अर्थव्यवस्था ख़राब थी तब भी घनश्याम दास बिड़ला ने व्यापक लाभ कमाया | इस कारण उन होने स्वयं को भारत के प्रथम उधोगपति के रूप में स्थापित कर लिया था | उन्ही के प्रयासों से भारतीय उधोगो को ब्रितानी हुकूमत से रियायते प्राप्त हुई | पूंजीवादी जगत को मजबूत करने के लिए उन्होंने राजनितिक ढाचे के साथ परस्पर समझ को भी विकसित करने का कार्य भी किया |
जी.डी. बिड़ला ने अनेक कार्य किये और वे असिम प्रतिभा के धनी थे | इस लेख में उलेखित विवरण उन के व्यक्तित्व की एक झलक मात्र हे |     

 

   


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Writer  &  Accountant

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